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मुस्कुराहट ही रांदल मां का प्रसाद: उमेश भाई जानी

गुजराती समाज भवन टिकरापारा में रविवार को सामूहिक 108 श्री रांदल माता महोत्सव का आयोजन किया गया। लोगों ने भक्ति रस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:25 AM IST

गुजराती समाज भवन टिकरापारा में रविवार को सामूहिक 108 श्री रांदल माता महोत्सव का आयोजन किया गया। लोगों ने भक्ति रस में आनंद की डुबकी लगाई। भिलाई से आए रांदल मां के उपासक उमेश भाई जानी व प्रकाश भाई ने अपनी भक्तिमय शैली में सूर्य रांदल कथा का वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि मुस्कराहट ही श्री रांदल माता का प्रसाद है। जो हमें देते हैं उसे देव कहते हैं। मां के स्वभाव का वर्णन करते हुए बताया कि मां दयालु, कृपालु और सभी दोषों को माफ कर हमारे गुणों को ही देखती हैं। उमेश ने बताया कि माता-पिता की सच्ची सेवा ही असली पूजा है। हम इंसान द्वारा बनाई पत्थर की मूरत को भोग लगाते हैं पर बहुत बार माता-पिता को भोजन नहीं दे पाते। आज इंसान का घर वेल सेट है घर में सोफा सेट है, लेमन सेट है, टी सेट है पर ताज्जुब की बात है कि घर वाले सब अपसेट हैं। मां भगवती रांदल ने अपने पुत्र यम और यमुना का उद्धार किया और अश्व रूप में सूर्य नारायण की आराधना की। पूजा में 54 जोड़ों ने हिस्सा लिया। 800 सुहागिनों की पग पूजा हुई। गुजराती समाज व अन्य समाज के भक्तों ने झूमकर गरबा रास किया। घोड़ा नृत्य, दो ताली, चार ताली, छकड़ी रास, सनेड़ा रास व जस गीत गाकर मां को प्रसन्न किया। मां से सुख-समृद्धि व शांति की कामना की।

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