--Advertisement--

भ्रष्टाचार ने बिगाड़ी नहरों की हालत

सूर्यकान्त चतुर्वेदी | बिलासपुर जिले का सबसे बड़ा खूंटाघाट बांध अंग्रेजों ने 1924 में बनाया। तब इसकी लागत करीब 18 लाख...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:30 AM IST
सूर्यकान्त चतुर्वेदी | बिलासपुर

जिले का सबसे बड़ा खूंटाघाट बांध अंग्रेजों ने 1924 में बनाया। तब इसकी लागत करीब 18 लाख रुपए आई थी। दिलचस्प बात यह है कि बांध का स्ट्रक्चर 94 साल बाद अब भी सही सलामत है। वहीं हाल के वर्षो में 125 करोड़ की लागत से तैयार कराए गए 200 किलोमीटर नहर लाइनिंग के कार्य की हालत खस्ता हो गई है। कई जगहों पर तो पता ही नहीं चलता कि कोई काम हुआ है।

जाहिर है कि घटिया निर्माण के चलते नहर लाइनिंग का काम टिक नहीं पाया। सामान्य सी बात है कि यदि नहर लाइनिंग का काम घटिया होगा, तो टेल एरिया के खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंच नहीं पाएगा। दूसरे 10 फीसदी पानी जमीन सोख लेगी। यह बड़ा नुकसान है, जो किसानों के हिस्से में आ रहा है। खूंटाघाट बांध की नहरों की लाइनिंग का काम दो किस्तों में वर्ष 2007-8 से शुरू हुआ। ईआरएम योजना के अंतर्गत तब 101 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। यह कार्य 2011 में पूरा हुआ, तो नरेगा के अंतर्गत 24 करोड़ की लागत से शेष नहरों की लाइनिंग का काम कराया गया। यह कार्य वर्ष 2015 में पूर्ण हुआ।

94 साल पुराना बांध सलामत, 125 करोड़ की नहर लाइनिंग दो साल नहीं टिकी

खूंटाघाट बांध की ये नहर बिरकोना से होते हुए खमतराई की ओर जाती है। इसमें नहर लाइनिंग का कहीं अता पता नहीं है।

घटिया निर्माण के चलते जर्जर हुई नहरें

दैनिक भास्कर टीम ने खूंटाघाट बांध के अंतर्गत बिरकोना, बहतराई, मोपका, गतौरा, किसान परसदा आदि स्थानों की नहरों का जायजा लिया। नहर में सिल्ट जमा हो चुकी है। लाइनिंग के अवशेष कहीं नजर नहीं आते। स्पष्ट है कि या तो मौके पर कार्य हुआ ही नहीं और कागजों में बिल बन गया। या फिर कार्य हुआ, तो वह बेहद घटिया था, जो टिक नहीं पाया।

एक्सपर्ट कमेंट

लाइनिंग के नाम पर पैसे की बर्बादी


लाइनिंग का काम 10 साल टिकना चाहिए

सीधी बात

नहर लाइनिंग का काम कितने साल टिकना चाहिए?



-नहरों के सतत सुधार की जरूरत होती है। खराब काम होने पर भी नहर की हालत जर्जर हो सकती है।


-जिस स्थान विशेष में ऐसी शिकायत होगी, उसके बारे में देखकर ही कोई कदम उठाया जा सकता है। गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एसके अवधिया, सीई जल संसाधन खारंग संभाग