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शासन व अस्पताल के बीच उलझा स्मार्ट कार्ड से इलाज, मरीजों की मुसीबत बढ़ी

स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद हो जाने से हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:10 AM IST

शासन व अस्पताल के बीच उलझा स्मार्ट कार्ड से इलाज, मरीजों की मुसीबत बढ़ी
स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद हो जाने से हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट डॉक्टर अभी तक इस मसले का हल नहीं निकाल सके हैं। जिन लोगों को स्मार्ट कार्ड बंद होने की जानकारी नहीं है वे सबसे मुसीबत में हैं। स्मार्ट कार्ड से इलाज नहीं होने से कुछ लोग इस आस में इलाज शुरू नहीं करवा रहे कि उन्हें बताया जा रहा है कि जल्द ही यह सुविधा फिर से शुरू होने जा रही है। पिछले दो दिन में 3 मामले तो दैनिक भास्कर के पास ही ऐसे आए जब प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने गए मरीज के परिजनों को स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद हो जाने से परेशानी का सामना करना पड़ा।

अस्पतालों के आठ करोड़ अटके : स्मार्ट कार्ड से इलाज करने में डॉक्टरों को पिछले 6 माह से दिक्कत हो रही है। लगभग 8 करोड़ रुपए इंश्योरेंस कंपनी ने अटका रखे हैं। आईएमए के मुताबिक नए एमओयू के बाद हालत बिगड़ गई है। बहुत से मुद्दे हैं जो प्राइवेट चिकित्सकों को खटक रहे हैं। जैसे कुछ बीमारियों को पैकेज से हटाना, 1100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से इलाज करना, नर्सिंग होम एक्ट के तहत ग्रेडिंग सिस्टम लागू करना, गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों का इलाज करते समय को-पेमेंट की सुविधा न देना आदि। इसलिए डॉक्टरों ने इलाज बंद ही कर दिया।

नए एमओयू की वजह से अस्पतालों ने इलाज बंद किया

2.65लाख स्मार्ट कार्ड हैं जिले में

पता चला तो हुई परेशानी

तोरवा स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में अनुपमा कॉलोनी निवासी संतोष कुमार की प|ी धनलक्ष्मी को प्रसव पीड़ा के बाद नर्सिंग होम में शनिवार को भर्ती कराया गया था। धनलक्ष्मी ने वहां बेटी को जन्म दिया। गुरुवार की सुबह जब धन लक्ष्मी के पति संतोष कुमार स्मार्ट कार्ड लेकर नर्सिंग होम पहुंचे तो स्टॉफ ने बताया कि स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद है। यह जानकर वे परेशान हो गए। उन्हें नगद रुपए जमा करना पड़ा। ऐसे ही मामले अन्य प्राइवेट अस्पतालों में देखने मिल रहे हैं।

हाथ कट गया, इलाज नहीं हो रहा

व्यापार विहार स्थित एक हॉस्पिटल में सीतापुर से आए बुटलू एक्का ने बताया कि उनके बेटे सुरजीत एक्का का हाथ गन्ने का रस निकालने वाली मशीन से कट गया है। वे उसके इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड लेकर आए हैं लेकिन यहां आकर पता चला कि इससे इलाज बंद कर दिया गया है। वे पर्याप्त राशि लेकर नहीं आए थे और घर इतनी दूर है कि वे रुपए लेने के लिए भी नहीं जा सकते। इलाज कराने आए खैरझिटी के कन्हैया लाल साहू इस बात से नाराज हैं।

बच्चे का ऑपरेशन नहीं करवा पाए

खाम्ही पोस्ट आफिस में कार्यरत हीरालाल नाती गट्‌टू के ऑपरेशन के लिए दो दिन पहले मध्य नगरी चौक स्थित एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचे। वहां पता चला कि स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद है। उन्हें बताया गया कि फिलहाल इससे इलाज नहीं किया जा सकता। स्टॉफ ने यह भी नहीं बताया कि इलाज कब शुरू होगा। हीरालाल परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि अब वे क्या करें।

90नर्सिंग होम है बिलासपुर शहर में

68नर्सिंग होम से इलाज हो रहा था

पैर की हड्‌डी टूटी, रुपए नहीं होने से इलाज नहीं

मुंगेली जिले के ग्राम खंती निवासी पार्वती साकर 40 वर्ष के पैर की हड्डी टूट गई है। परिजनों ने उसे मुंगेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। मरीज के पैर का आपरेशन होना है। अस्पताल में डॉक्टर व संसाधन की कमी से मरीज को बेहतर इलाज नहीं हो रहा है। परिजनोें का कहना है कि रुपए नहीं है। स्मार्ट कार्ड से प्राइवेट अस्पताल में मरीज का इलाज करवाना चाहते हैं। पर स्मार्ट कार्ड से इलाज बंद होने से उसे बिलासपुर के किसी प्राइवेट अस्पताल नहीं ला पा रहे हैं।

मुंगेली जिला अस्पताल में भर्ती पार्वती साकर।

डीएमई ने बुलाई बैठक

स्मार्ट कार्ड के मामले को लेकर राजधानी में 3 अप्रैल को डीएमई ने सभी डॉक्टरों की बैठक बुलाई है। इसका संदेश भी सभी को भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में स्मार्ट कार्ड ही सबसे अहम बिंदु होगा जिस पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। सीएमएचओ डा. बीबी बोर्डे व आईएमए बिलासपुर के सचिव डा. आशीष मूंदड़ा भी इस बैठक को लेकर कह रहे हैं कि हो सकता है कि अबकी बार समस्या का समाधान हो जाए।

8करोड़ रुपए अटके हैं नर्सिंग होम के

3अप्रैल को राजधानी में बैठक

जल्द फैसला

मरीजों की परेशानी को देखते हुए ही डॉक्टरों से लगातार चर्चा की जा रही है। अब 3 अप्रैल को रायपुर में बैठक में है। इसमें निर्णय हो जाएगा। वैसे भी डॉक्टर पॉजीटिव मूड में दिख रहे हैं। डाॅ. बीबी बोर्डे, सीएमएचओ

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