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आनंद और शांति का स्रोत आत्मा है: ओशो प्रभाकर

ओशोधारा ध्यान केंद्र विद्यानगर बिलासपुर के तत्वाधान में ध्यान समाधि, सुरति समाधि और गायन प्रज्ञा का कार्यक्रम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:10 AM IST

ओशोधारा ध्यान केंद्र विद्यानगर बिलासपुर के तत्वाधान में ध्यान समाधि, सुरति समाधि और गायन प्रज्ञा का कार्यक्रम स्थानीय संस्कार भवन सरकंडा में हुआ। आचार्य ओशो प्रभाकर ने कहा कि मनुष्य की गहरी से गहरी खोज आनंद और सुख शांति की है लेकिन इसे बाहर से पाया नहीं जा सकता। आनंद और शांति का स्रोत आत्मा है जो कि हमारे भीतर है। इसलिए ओशो ने ऐसी ध्यान विधियों का सृजन किया है जो कि मनुष्य को अपनी ही चेतना की गहराइयों में जाने के लिए अभूतपूर्व रूप से सहायक है।

साधना शिविर का संचालन ओशो के संबुद्ध संन्यासी आचार्य ओशो प्रभाकर पटना, आचार्य ओशो दर्शन बिलासपुर और आचार्य मां भक्ति पूर्णिमा सूरजपुर ने किया। शिविर में लगभग 45 नए साधकों ने ध्यान और समाधि की गहराइयों में प्रवेश किया। संगीत और गायन में रुचि रखने वालों के लिए तीन दिवसीय गायन प्रज्ञा कार्यक्रम रखा गया था। संचालन प्रसिद्ध गायक आचार्य जलील मोहम्मद दिल्ली और आचार्य मनीष बाबू दिल्ली ने किया। साधना शिविर का आयोजन ओशोधारा मैत्री संघ बिलासपुर के मित्रों ने किया। इसमें प्रमुख रूप से स्वामी संतोष कुमार चंद्रा, मां वंदना परिहार, तेजस्वी दर्शन, गोपाल गबेल, नवीन साहू, विकास सिंह, मोनिका पांडेय, अरुण कुमार चंद्रा, श्रद्धा गुप्ता, नियति पमनानी और कृष्ण कुमार चंद्रा ने अपना सहयोग दिया।

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