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डामर से दाेगुनी महंगी कांक्रीट की सड़कें क्यों उखड़ रहीं, सरकार ने निकायों से मांगा जवाब

नगरीय निकायों द्वारा डामर सड़कों से दोगुनी लागत में सीमेंट कांक्रीट की सड़कें बनाई जा रहीं हैं। इसके लिए तय मापदंड...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:15 AM IST

नगरीय निकायों द्वारा डामर सड़कों से दोगुनी लागत में सीमेंट कांक्रीट की सड़कें बनाई जा रहीं हैं। इसके लिए तय मापदंड का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। कुछ सड़कों में घटिया क्वालिटी का मटेरियल उपयोग किया जा रहा है। इसलिए सड़कें समय से पहले खराब हो रहीं हैं। लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने अधिकांश निकायों को पत्र भेजकर इस पर नाराजगी जताई है। साथ ही ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।

छत्तीसगढ़ में कुछ सालों से कांक्रीट सड़कों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। ऐसी सड़कें शहर ही नहीं बल्कि गांवों में भी बहुतायत में बनाई जा रही हैं। लेकिन डामर व दूसरी सड़कों से मजबूत मानी जाने वाली इन सड़कों के निर्माण में विभाग के अफसर आैर ठेकेदार लापरवाही बरत रहे हैं। इसके कारण कांक्रीट की सड़कें भी समय से पहले खराब हो रही हैं। नगरीय प्रशासन विभाग की नाराजगी का कारण जानने भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि इन पांच - सात सालों में राष्ट्रीय आैर राजकीय मार्गों को छोड़कर शहर के भीतरी मार्ग भी कांक्रीट के ही बनाए जा रहे हैं। अफसरों का कहना है कि सरकार के आदेश के बाद ही ऐसा किया जा रहा है।

निकायों ने हाल ही में बनाई गई सड़कों की रिपोर्ट मुख्यालय भेजी थी जिसमें निकायों द्वारा दिए गए कुछ बिंदुआें पर विभाग ने ऐतराज जताते हुए निकायों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें नोटिस जारी कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि खराब सड़कें बनाने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

जल्द उखड़ जाती हैं डामर की सड़कें इसलिए अब शहरों आैर कस्बों में कांक्रीट की सड़कें बनाई जा रहीं हैं, कहा गया था इसकी लाइफ डामर की सड़कों से ज्यादा होती है। तय मापदंड पर ध्यान नहीं देने के कारण सड़कें खराब हो रहीं हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने कई निकायों को भेजा नोटिस

दो स्लैब की सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त

नगरीय प्रशासन विभाग ने पत्र जारी कर कहा है कि सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण मापदंड के मुताबिक नहीं करवाए जा रहे हैं। विभाग ने पत्र में कहा है कि निकायों ने भेजी गई टेस्ट रिपोर्ट में सीपीडब्ल्यूडी मेनुअल तथा आईएस कोड के प्रावधानों के अंतर्गत एनडीटी-रिबाउंड हमर टेस्ट का उल्लेख किया है, जबकि इस प्रकार का कोई भी टेस्ट नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नहीं करवाया जा रहा है। इसलिए उस तरह के मानकों की प्रतियां विभाग को उपलब्ध करवाई जाएं।

यह लिखा है पत्र में

सरकार अब डामर आैर मुरुम की सड़क बनाने की बजाय कांक्रीट की सड़क बनाने पर ही जोर दे रही है लेकिन सड़कों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। यही वजह है कि नगरीय प्रशासन विभाग ने ऐसी सड़कों को बनाए जाने से पहले इनके मटेरियल की टेस्टिंग नहीं किए जाने को लेकर नाराजगी जताई है।

गलियों के अलावा मुख्य सड़कें भी कांक्रीट की

कांक्रीट से गौरव पथ बनाया, मरम्मत की, फिर उखाड़कर डामर चढ़ाया

कांक्रीट की सड़क बनाने में किस तरह लापरवाही बरती जा रही है, इसका एक नमूना बिलासपुर की एक सड़क में देखने को मिला था। रायपुर की तरह वहां भी महाराणा प्रताप चौक से मंगला चौक तक की सड़क को गौरव पथ घोषित किया गया है। इसे पहले कांक्रीट से बनाया गया। कुछ ही महीनों में दरारें आने लगीं तो सड़क की मरम्मत पर बड़ी राशि खर्च की गई। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूरा कांक्रीट उखाड़कर नए सिरे से इसे डामर-गिट्टी से बनाया गया।

इन सड़कों पर ज्यादा होता है खर्च

विशेषज्ञों के मुताबिक एक किलोमीटर डामर सड़क बनाने में लगभग 45 से 50 लाख रुपए तक खर्च आता है। इतनी ही दूरी की सीमेंट की सड़क बनाने में लगभग एक से सवा करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं, क्योंकि इसमें सीमेंट आैर छड़ का उपयोग किया जाता है। बजट बढ़ने के बाद भी सड़कें समय से पहले खराब होने की शिकायत आने के कारण ही नगरीय प्रशासन विभाग के अफसर नाराज हैं। अफसरों का कहना है कि अगर इन सड़कों में गुणवत्ता ही नहीं होगी तो दोगुना खर्च करने का क्या आैचित्य है?

ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निगमों से कहा है

नगर निगम ने कांक्रीट सड़कों की जो रिपोर्ट भेजी है उसमें उन्होंने कुछ टेस्ट करवाने की बात कही है। उसी टेस्ट रिपोर्ट की पुष्टि के लिए हमने उनसे आईएस कोड मांगा है। साथ ही मापदंड के अनुरूप सड़कें नहीं बनाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। - एसके जैन, प्रमुख अभियंता, नगरीय प्रशासन विभाग

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