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जमानत के लिए आधार की अनिवार्यता, फैसला सुरक्षित

जमानत पर रिहा करने से पहले आरोपी और जमानतदार का आधार वेरिफाई करने के मामले में हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:20 AM IST

जमानत पर रिहा करने से पहले आरोपी और जमानतदार का आधार वेरिफाई करने के मामले में हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई चल रही है। बुधवार को बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। गुरुवार को इस पर फैसला आने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट ने जमानत के एक मामले पर सुनवाई करते हुए 5 जनवरी को प्रदेश के सभी न्यायालयों और राज्य शासन के लिए अहम दिशा- निर्देश जारी किए थे। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने जमानत पर रिहा करने से पहले आरोपी और जमानतदार का आधार वेरिफाई करना अनिवार्य करते हुए सभी निचली अदालतों को इसका पालन करने के निर्देश दिए थे। आदेश के परिपालन में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों को लेकर हाईकोर्ट को पत्र लिखा गया, इसके बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने संज्ञान लेते हुए पुनरीक्षण याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन समेत वकीलों को भी पक्ष रखने के लिए कहा गया। इस बीच मामले को लेकर दुर्ग के पीयूष भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी प्रस्तुत कर दी, जिस पर सुनवाई के दौरान स्टेट बार कौंसिल की तरफ से बताया गया कि कौंसिल ने आदेश में संशोधन की मांग करते हुए हाईकोर्ट को पत्र लिखा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला प्रस्तुत होने के कारण हाईकोर्ट में मामले पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। पिछले गुरुवार यानी 25 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने आदेश में संशोधन के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन पर 10 दिनों के भीतर विधि के मुताबिक कार्रवाई का आग्रह करते हुए विशेष अनुमति याचिका को निराकृत कर दिया था। इसके बाद पिछले तीन दिनों से हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई चल रही थी, इस दौरान स्टेट बार कौंसिल समेत कई वकीलों ने आदेश के परिपालन में आ रही व्यवहारिक परेशानियों की जानकारी देते हुए संशोधन की मांग की। बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।

हाईकोर्ट

आरोपी और जमानतदार का आधार वेरिफाई करना उच्च न्यायालय ने किया है अनिवार्य

हाईकोर्ट ने जमानत के लिए दिए थे ये दिशा- निर्देश

जमानत के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने से पहले ट्रायल कोर्ट को आरोपी और जमानतदार का आधार कॉर्ड लेना होगा।

जमानत के लिए दस्तावेज और आधार कॉर्ड प्रस्तुत करने के एक सप्ताह के भीतर उसका सत्यापन करवाना होगा।

आरोपी की पहचान और जमानत के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही रिलीज ऑर्डर जारी करना होगा।

जमानत के लिए पेश दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने पर संबंधित कोर्ट को दस्तावेज पेश करने वाले पर एफआईआर करवानी होगी।

संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जमानतदार की संपत्ति आदि का विवरण रजिस्टर बनाकर दर्ज करना होगा।

एक ही संपत्ति के दस्तावेजों को एक से अधिक मामलों में जमानत के लिए पेश करने पर अर्जी रद्द की जाएगी।

दस्तावेजों के सत्यापन के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी और पुलिस अधिकारी को सहयोग करना होगा।

सभी ट्रायल कोर्ट को दस्तावेजों के सत्यापन के बाद हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए प्रमाणित करना होगा।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।

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Web Title: जमानत के लिए आधार की अनिवार्यता, फैसला सुरक्षित
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