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पिता के पहुंचने पर तीनों भाई-बहनों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार, मां अस्पताल से लौटी

गुमगरा में सिगड़ी जलाकर कमरे में सोने से जिन तीन बच्चों को मौत हुई थी, उनका शुक्रवार को पिता के डोेंगरगढ़ से लौटने के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

गुमगरा में सिगड़ी जलाकर कमरे में सोने से जिन तीन बच्चों को मौत हुई थी, उनका शुक्रवार को पिता के डोेंगरगढ़ से लौटने के बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार हो गया। स्वास्थ्य में सुधार होने से डाक्टरों ने बच्चों की मां को भी अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। तीनों बच्चों का शव अस्पताल से सीधे गांव के शमशान घाट ले जाया गया। एक साथ जब तीनों शव वहां उतारे गए तो रिश्तेदारों में कोहराम मच गया है। यहां पंरपरा के अनुसार कब्र खोदकर रिश्तेदारों ने तीनों शव दफना दिए।

गुमगरा में बुधवार की रात कमरे में कोयले की सिगड़ी जलाकर मां के साथ सो रहे तीन बच्चे प्रेमंचद 13 वर्ष, प्रीतम 11 वर्ष व पुत्री आरती की जहरीली गैस के कारण मौत हो गई थी। मां हीरा बाई भी बेहोश हो गई थी जिसे सुबह पड़ोसियों ने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चों का पिता मोहर साय आदिवासी सम्मेलन में डोंगरगढ़ गया था। उसे रिश्तेदारों ने यह कहकर बुलाया था कि उसके बेटे की तबीयत खराब हो गई। वह सुबह पहंुचा तब उसे पता चला कि बेटा बीमार नहीं है बल्कि हादसे में उसके तीनों बच्चों की मौत हो गई है और प|ी अस्पताल में भर्ती है। वह सीधे अस्पताल पहुंचा। मरच्यूरी रूम में एक साथ बच्चों का शव देखकर वह फफक पड़ा। लोगों ने उसे ढांढ़स देकर संभाला।



इलाज के बाद मां के स्वास्थ्य में सुधार, पिता के डोंगरगढ़ से लौटने पर हुआ अंतिम संस्कार

तीनों बच्चों के शव को कब्र दफन करते हुए परिजन।

आदिवासी सम्मेलन में लोकनृत्य की प्रस्तुति देने गया था:मोहर साय लोकनृत्य कलाकार है। वह डंडा नृत्य करता है। गांव में उसका एक दल है। डांेगरगढ़ में चल रहे आदिवासी सम्मेलन में वह लोकनृत्य कार्यक्रम की प्रस्तुति देने के लिए अपने साथियों के साथ गया था। वहां कार्यक्रम अभी नहीं हुआ था। इसी बीच हादसे की खबर उसे वापस लौटना पड़ा।

भास्कर संवाददाता|लखनपुर

गुमगरा में सिगड़ी जलाकर कमरे में सोने से जिन तीन बच्चों को मौत हुई थी, उनका शुक्रवार को पिता के डोेंगरगढ़ से लौटने के बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार हो गया। स्वास्थ्य में सुधार होने से डाक्टरों ने बच्चों की मां को भी अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। तीनों बच्चों का शव अस्पताल से सीधे गांव के शमशान घाट ले जाया गया। एक साथ जब तीनों शव वहां उतारे गए तो रिश्तेदारों में कोहराम मच गया है। यहां पंरपरा के अनुसार कब्र खोदकर रिश्तेदारों ने तीनों शव दफना दिए।

गुमगरा में बुधवार की रात कमरे में कोयले की सिगड़ी जलाकर मां के साथ सो रहे तीन बच्चे प्रेमंचद 13 वर्ष, प्रीतम 11 वर्ष व पुत्री आरती की जहरीली गैस के कारण मौत हो गई थी। मां हीरा बाई भी बेहोश हो गई थी जिसे सुबह पड़ोसियों ने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चों का पिता मोहर साय आदिवासी सम्मेलन में डोंगरगढ़ गया था। उसे रिश्तेदारों ने यह कहकर बुलाया था कि उसके बेटे की तबीयत खराब हो गई। वह सुबह पहंुचा तब उसे पता चला कि बेटा बीमार नहीं है बल्कि हादसे में उसके तीनों बच्चों की मौत हो गई है और प|ी अस्पताल में भर्ती है। वह सीधे अस्पताल पहुंचा। मरच्यूरी रूम में एक साथ बच्चों का शव देखकर वह फफक पड़ा। लोगों ने उसे ढांढ़स देकर संभाला।

दो साल पहले भी कमरे में ढिबरी जलने से तीनों बच्चे हो गए थे बेहोश

मोहर साय के घर में तीन साल पहले भी इसी तरह का हादसा होते-होते टल गया था। तब मोहर साय भी घर में था। उसने बताया कि जिस कमरे में बुधवार को हादसा हुआ है, उसी कमरे में दो साल पहले ठंड के सीजन में तीनों बच्चों व प|ी के साथ वह सोया था। तब कमरे में ढिबरी जल रही थी। देर रात में सांस लेने में मुझे दिक्कत हुई तो मेरी नींद खुली। देखा तो तीनों बच्चे बेसुध हो गए थे। प|ी की तबीयत खराब हो गई थी। तब तीनों बच्चों को तुरंत बाहर निकाला। इसके बाद उनकी हालत सुधरी और सभी सामान्य हो गए। उसने बताया कि इसके बाद से कभी भी कमरे में आग जलाकर नहीं सोते थे। प|ी को भी कमरे में सोने के समय आग जलाने से मना किया था लेकिन थोड़ी से चूक से बड़ा हादसा हो गया।

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