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सीयू को पेपरलेस करने तीन करोड़ की योजना 6 साल से पेपर में

इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम में एडमिशन, अटेंडेंस, रिपोर्ट कार्ड, स्टडी मटेरियल, शिक्षकों, कर्मचारियों के वेतन।

रामप्रताप सिंह। | Last Modified - Nov 11, 2017, 06:29 AM IST

सीयू को पेपरलेस करने तीन करोड़ की योजना 6 साल से पेपर में
बिलासपुर।सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 3 करोड़ की लागत से पेपरलेस करने के लिए इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई थी। जो 6 साल बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। आईयूएमएस में एडमिशन, अटेंडेंस, रिपोर्ट कार्ड, स्टडी मटेरियल, फीस जमा, रिजल्ट निकालने, शिक्षकों, कर्मचारियों के वेतन, छुट्टी का कार्य होना था, जो नहीं हो रहा है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने सीबीसीएस सिस्टम लागू कर दिया है। इस सिस्टम के तहत यूनिवर्सिटी आईयूएमएस को अपडेट नहीं कर पाई है। सीबीसीएस सिस्टम की मार्कशीट सीयू भोपाल की कंपनी से प्रिंट करवा रही है।
- गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कार्यालयीन कार्यों को पेपरलेस बनाने के लिए 2012 में 3 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया था। तब यूनिवर्सिटी के हर काम को ऑनलाइन करने की बात प्रशासन द्वारा कही गई थी, लेकिन 6 साल हो जाने के बाद भी आईयूएमएस सिस्टम को पूरी तरह से इम्प्लीमेंट नहीं किया जा सका है।
- जिस काम के लिए करोड़ों रुपए लगाए गए थे, वो काम आज भी मैनुअली ही हो रहेे हैं। यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक फाइलों, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारियों के छुट्‌टी, वेतन, डिपार्टमेंट लेवल के काम, छात्रों के प्रवेश से लेकर उनके फीस, सबजेक्ट रजिस्ट्रेशन, अटेंडेंस रिपोर्ट, उपाधि के लिए रजिस्ट्रेशन आदि के लिए इसका उपयोग हाेना था।
- छात्रों के परीक्षा परिणाम, उनके मार्कशीट का काम भी आईयूएमएस के माध्यम से हाेना था। वहीं जब सीबीसीएस पैटर्न लागू किया गया, तब प्रशासन आईयूएमएस को अपडेट नहीं कर पाया। इसके कारण यूनिवर्सिटी भोपाल की कंपनी से मार्कशीट छपवा रही है। इससे यूनिवर्सिटी के छात्रों का रिजल्ट निकालने में साल भर से अधिक समय लग जाता है।
- रिजल्ट समय से नहीं निकालने के कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा विगत वर्ष सुपर एटीकेटी नाम से सेमेस्टर परीक्षा में फेल फर्स्ट ईयर के छात्रों का दो बार पूरक परीक्षा लिया गया था। जब आईयूएमएस को यूनिवर्सिटी में लगाया गया, तब प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा था कि अब कोई फाइल गुम नहीं होगी।
- कोई भी अपनी फाइल का ऑनलाइन ट्रैकिंग आईयूएमएस के माध्यम से कर सकता है। वहीं फिलहाल स्थिति यह है कि फाइल ढूंढने के लिए शिक्षक अपने विभाग को छोड़ प्रशासनिक भवन में इस टेबल से उस टेबल चक्कर लगाते नजर आते हैं।
- यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि फाइल के पहुंचने से पहले उस टेबल के पास खुद उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती है। तभी फाइल आगे बढ़ेगी और काम आसान होगा।
सीबीएस सिस्टम के लिए नहीं हुआ अपडेट
सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मीडिया सेल प्रभारी डॉ. प्रतिभा जे मिश्रा ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अब सीबीएस सिस्टम लागू किया है, लेकिन अभी तक आईएमएस का साफ्टवेयर अपडेट नहीं हुए हैं, इसलिए भोपाल से मार्कशीट छपवाया जाता है। इसके अलावा सारे कार्य आईयूएमएस से ही होते हैं।
पूरी तरह से इम्प्लीमेंट होता तो ये होते फायदे
- एडमिशन लेने वाले छात्र का उसके द्वारा प्रवेश परीक्षा के लिए भरे गए डाटा के आधार पर उसे आगे की कार्यवाही के लिए भेजा जाता है इसी आधार पर उसका नामांकन क्रमांक, सब्जेक्ट का पंजीयन इत्यादि कार्य होते हैं। दोबारा उसकी एंट्री नहीं करनी पड़ती।
- इससे समय और कागज की बचत होती, लेकिन सिस्टम ठीक से काम नहीं करने के कारण छात्रों से दोबारा फार्म भरवाया जाता है। इसके अलावा शिक्षक और कर्मचारियों का सैलरी स्लिप, पीएफ की जानकारी, छुट्टी, फार्म-16 आदि की जानकारी इस पर मिल जाती।
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