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बेटियों को पढ़ाने कोई आगे आना ही नहीं चाहता, यहां इस हालत में रहती हैं लड़कियां

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 06:22 AM IST

माता-पिता की मौत के बाद कुछ बेटियां नहीं जा पा रही स्कूल और सरकार राज्योत्सव मनाकर कह रही- सब कुछ ठीक चल रहा।
  • बेटियों को पढ़ाने कोई आगे आना ही नहीं चाहता, यहां इस हालत में रहती हैं लड़कियां
    बैकुंठपुर(बिलासपुर)।पूरा प्रदेश राज्योत्सव मनाने में व्यस्त है। पर कोरिया जिले में आज भी ऐसे हालात हैं जो हमें यह सोचने के लिए विवश कर रहे हैं कि ऐसे हालात में राज्योत्सव मनाना क्या सार्थक है।
    - दरअसल ग्राम परसगढ़ी में सामाजिक बहिष्कार का दंश भोग रही एक महिला को अपने पति के साथ 6 दिन गुजारने पड़े। जब कोई भी ग्रामीण मृतक के अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आया तब उसे खुद ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।
    - इसके अलावा ग्राम पंचायत लालपुर में माता-पिता की आकस्मिक मौत के बाद अब तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं। इन्हें सहारा देने वाला कोई नहीं है। अब तो यह स्थिति है कि ये तीनों भीख मांगकर अपना पेट भर रहे हैं।
    एसडीएम बोले जानकारी लेकर ही कुछ कह पाएंगे
    - एसडीएम मनेन्द्रगढ़ प्रदीप कुमार साहू का कहना है कि ग्राम परसगढ़ी में हुए घटनाक्रम में जांच की जा रही है। महिला को श्रद्धांजलि योजना के तहत पंचायत के द्वारा आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। वहीं लालपुर में यतीम बच्चों के मामले में मुझे आपके द्वारा जानकारी दी जा रही है। जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
    अब तक स्कूल नहीं गई
    मीनाक्षी अब 6 साल की हो गई हैै वह भी गांव के दूसरों बच्चों की तरह खेलना कूदना चाहती है, पढ़ना लिखना चाहती है। लेकिन परिवार की माली हालत ऐसी नहीं हैं कि दोनों बेटियों के सपनों को पूरा कर सकें। यही वजह है कि मीनाक्षी ने आज तक स्कूल का मुुंह तक नहीं देखा जबकि उसे पढ़ने की बड़ी इच्छा है।
    दिखा सामाजिक बहिष्कार
    जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत परसगढ़ी में रहने वाली मानमती ने लगभग 25 वर्ष पूर्व मनेन्द्रगढ़ निवासी शिवनाथ से प्रेम विवाह किया था। महिला द्वारा दूसरा विवाह करने से गांव के लोगों ने मानमती व शिवनाथ का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था।
    भूख मिटाने जद्दोजहद
    भूख क्या होती है यह इन बच्चों और उनके बूढे़ हो चले दादा के बयान से साफ-साफ बयां होता है। मीनाक्षी के दादा कहते हैं कि स्कूल भेजने से क्या होगा दो जोड़ी कपड़े मिल जाएंगे, एक टाईम का खाना मिल जाएगा। पर साहब छोटे छोटे बच्चों को जब तक तीन चार बार खाना नहीं मिले तो उनके पेट की आग कैसे ठंडी हो।
    दो छोटे बच्चे हुए अनाथ
    ग्राम पंचायत लालपुर में रहने वाले सोना प्रसाद उर्फ सिपाही लाल नामक ग्रामीण के युवा बेटे संत कुमार की पत्नि गुड्डी बाई ने पांच वर्ष पहले कनेर बीज खाकर जान दे दी थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद संतकुमार ने भी फांसी लगा ली। माता पिता की मौत के बाद 8 माह की बच्ची समेत एक बेटी व एक बेटा अनाथ हो गए।
    बेटी बचाओ अभियान फेल
    एक ओर कोरिया जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है। पर इस अभियान के पीछे की कड़वी हकीकत यह है कि लिंगानुपात के मामले में कोरिया जिला पूरे प्रदेश में 27 वें नंबर पर है। इससे आसानी से समझा जा सकता है कि कोरिया जिले में यह अभियान सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है।
    बूढ़े दादा-दादी थक चुके
    माता पिता की मौत के बाद 8 माह की बेटी अनंद कुमारी (दीमा) का लालन पालन उसकी दादी ने किया। वहीं 4 साल के विनीत व 2 साल की मीनाक्षी को पता ही नहीं चला कि अब उनके माता पिता इस दुनिया में नहीं रहे। दो लड़कियों व एक लड़के का लालन पालन बूढ़े दादा दादी अब तक करते आ रहे हैं। पर अब उनके कंधे भी जवाब देने लगे हैं।
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Web Title: Do Not Want To Come Forward To Teach Daughters
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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