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लोको पायलट का बेटा बनेगा नेशनल रेफरी

फुटबाल के नेशनल रेफरी परीक्षा के लिए राज्य से हुआ है आशीष का चयन, इंटर यूनिवर्सिटी खेल चुके हैं।

दीपेन्द्र शुक्ला। | Last Modified - Nov 06, 2017, 07:11 AM IST

  • लोको पायलट का बेटा बनेगा नेशनल रेफरी
    बिलासपुर।फुटबॉल का ऐसा जुनून कि घुटने का लिगामेंट टूटने और लंबे समय के संघर्ष के बाद आशीष एक बार फिर मैदान में लौटे। इस बार वे खेलने नहीं बल्कि दूसरों को खिलाने का उद्देश्य लेकर लौटे हैं। वे अभी राज्य के कैटेगरी- 3 रेफरी हैं, और नेशनल रेफरी परीक्षा के लिए राज्य से नामांकित हुए हैं। गांधीनगर में परीक्षा दिसंबर में होगी, इसकी तैयारी वे सेकरसा मैदान में कर रहे हैं।
    - इंटर स्कूल से फुटबॉल खेलने की शुरुआत करने वाले आशीष तिवारी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर में लोको पायलट के पद पर पदस्थ एसपी तिवारी के बेटे हैं। उनकी मां मंदाकनी तिवारी घरेलू महिला हैं।
    - केंद्रीय विद्यालय के नेशनल तक, कॉलेज के समय गुरु घासीदास और बिलासपुर यूनिवर्सिटी के तरफ से इंटर यूनिवर्सिटी खेला। इस दौरान 2013 में एनईआई में बिलासा कप खेल रहे थे, तभी घुटने का लिगामेंट टूट गया। इससे बाहर आना आसान नहीं था।
    - ऑपरेशन के लिए मुंबई जाना पड़ा, वहां जगजीवन राम हॉस्पिटल में डॉ. आनंद जोशी ने ऑपरेशन किया। एक महीने इलाज के लिए भर्ती रहे। 6 माह तक पैर में प्लास्टर चढ़ा रहा घर पर बेड रेस्ट किया। 2015 में चलना शुरू किया। फिजियोथेरेपी के बाद अब वह चलने लगे हैं।
    ऑल इंडिया मैच के रेफरी
    आशीष राज्य और जिले की चर्चित प्रतियोगिता में सफल रेफरीशिप कर चुके हैं। जनवरी 2017 में जशपुर ऑल इंडिया के फाइनल मैच, इससे पहले करंजी ऑल इंडिया मैच के सेमीफाइनल मैच में रेफरी रहे।
    मैन ऑफ द सीरीज रहे
    आशीष बताते हैं कि चोट से उबरना आसान नहीं होता। स्कूल के समय अक्सर मैन ऑफ द सीरीज रहा। एक स्कूल नेशनल सीरीज में 9 गोल कर यह खिताब पाया था। दिसंबर में होने वाली नेशनल रेफरी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा हूं।
    रेफरीशिप खेलने से ज्यादा मेहनत का काम
    रेफरीशिप करना फुटबॉल खेलने से ज्यादा मेहनत का काम है। वजह इसमें फीफा के बदलते नियम की जानकारी रेफरी को याद रखना होता है। ग्राउंड में मेहनत भी ज्यादा करनी होती है। टीवी पर मैच देखकर उसमें रेफरी के निर्णय और फीफा के लॉ बुक से मिलाना पड़ता है।
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