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अचानकमार टाइगर रिजर्व : हाईकोर्ट ने कहा, जब 2020 तक ग्रामों का विस्थापन करना है तो नए मकानों का निर्माण क्यों, लगाया स्टे

टाइगर रिजर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 621 आवास निर्माणाधीन, अब 17 अगस्त को सुनवाई

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:28 PM IST

  • अचानकमार टाइगर रिजर्व : हाईकोर्ट ने कहा, जब 2020 तक ग्रामों का विस्थापन करना है तो नए मकानों का निर्माण क्यों, लगाया स्टे
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    बिलासपुर हाईकोर्ट

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख टाइगर रिजर्व अचानकमार में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत बनाए जा रहे आवासों के निर्माण पर बिलासपुर हाइकोर्ट ने बुधवार को रोक लगा दी। कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अजय त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रितिंकर दिवाकर की युगलपीठ ने इस पर स्टे दे दिया। अब इस मामले में 17 अगस्त को सुनवाई होगी।

    - मुंगेली में स्थित टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पीएमएवाई-जी के तहत 7.45 करोड़ की लागत से 621 आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। इसको लेकर नितिन ने सिंघवी ने जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ का वह प्रमुख टाइगर रिजर्व है।

    - यहां रह रहे परिवारों का विस्थापित किया जाना पहले से प्रस्तावित है। ऐसे में मकानों का निर्माण कराना रुपयों के साथ-साथ वन्य जीवों और जंगल के लिए भी ठीक नहीं है। इसी वन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के आधे बाघों के रहने का दावा भी वन विभाग करता है।

    - याचिकाकर्ता नितिन ने बताया कि पिछली बार हुई गणना में अचानकमार में 27 बाघों का दावा किया गया था। इसके कोर क्षेत्र के 19 गावों में पीएमवाई-जी के तहत बनने वाले प्रत्येक मकान पर 1.20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

    - इनकी आयु 30 वर्ष तक होगी, जबकि इन्हीं 19 गावों की विस्थापन वर्ष 2019-20 तक किया जाना प्रस्तावित है। जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। वन विभाग ने बताया था कि 19 गावों के सभी ग्रामीण विस्थापन हेतु सहमत हैं और योजना भी तैयार है।

    - कुल 25 गांवों में से 6 गांवों के 249 परिवारों का सफलतापूर्वक विस्थापन पहले ही हो चुका है और शेष 19 गांवों का विस्थापन तीन चरणों में किया जाएगा। जिसके तहत 3394 परिवारों का विस्थापन वर्ष 2019-20 तक किया जाएगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, विस्थापन उपरांत ग्रामीणों को अन्य सुविधायें जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, आवागमन, दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति प्राप्त होगी।

    ये कहा कोर्ट ने

    -जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्माणों से वन्यप्राणी और जंगल तो प्रभावित होगें ही, पैसों की भी बर्बादी होगी। कोर्ट ने कहा कि जब वर्ष 2020 तक कोर क्षेत्र के गावों का अचानकमार टाइगर रिजर्व से बाहर विस्थापन करना है तो नये मकान बनाने का मतलब नहीं है।

    रिपोर्ट/फोटो : संदीप राजवाड़े

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    अचानकमार टाइगर रिजर्व में पीएमएवाईजी के तहत निर्माणाधीन आवास
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