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एमबीबीएस में एडमिशन के लिए दिव्यांग छात्रा को हाईकोर्ट में लगानी पड़ी याचिका

मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) पास करने के बाद भी छात्रा को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:20 AM IST

मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) पास करने के बाद भी छात्रा को दिव्यांगता की वजह से एमबीबीएस में एडमिशन देने से इनकार कर दिया गया। कहीं, कोई उम्मीद न दिखी तो थक-हारकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने छात्रा की जांच के लिए एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमेटी बनाई। कमेटी ने कहा कि वह 79 फीसदी दिव्यांग है। चीफ जस्टिस की बेंच ने दिव्यांगता को दरकिनार करते हुए कहा है कि छात्रा कोर्ट में आई थी। उसकी शारीरिक गतिविधियों के आधार पर कहा जा सकता है कि वह पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ डॉक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा सकती है। छात्रा को एमबीबीएस में दाखिला देने के लिए 15 जुलाई तक काउंसिलिंग करें।

बिलासपुर के राधिका विहार में रहने वाले सुमेधा सिंह के शरीर कर निचला हिस्सा दिव्यांगता से प्रभावित है। जिला मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद उसे 50 फीसदी दिव्यांग बताया था, लेकिन छात्रा के साथ ही उसके पिता कमलेश सिंह इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने राज्य मेडिकल बोर्ड से जांच कराई। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एमके चंद्राकर की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जांच के बाद रिपोर्ट दी कि वह 84.31 फीसदी दिव्यांग है। पिता कमलेश इसके बाद छात्रा को दिल्ली के सफदरगंज हॉस्पिटल लेकर गए। वहां हुई जांच के बाद दी गई रिपोर्ट में उसे 60 फीसदी दिव्यांग बताया गया। इस बीच छात्रा ने 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट पास कर लिया, लेकिन उसे फिजिकल हैंडीकैप्ड कोर्ट से उसकी अधिक दिव्यांगता के कारण एडमिशन देने से इनकार कर दिया गया। छात्रा ने एडवोकेट एनके मालवीय के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने एक्सपर्ट डॉक्टरों की नई टीम बनाकर जांच के निर्देश दिए। इसके बाद संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एके चंद्राकर सहित पांच एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम ने 2 जुलाई 2017 को दोबारा जांच की। रिपोर्ट में छात्रा के घुटने की मांसपेशियों की क्षमता शून्य बताते हुए उसके 79 फीसदी विकलांग होने की जानकारी दी गई। लेकिन रिपोर्ट में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का हवाला देते हुए मेडिकल की पढ़ाई के लिए उपयुक्त बताया गया।

नीट पासआउट 79% दिव्यांग छात्रा को नहीं दिया मेडिकल में दाखिला, हाईकोर्ट ने कहा- वह कोर्ट आई थी, बेशक पूरी कर सकती है जिम्मेदारी, 15 तक करें काउंसिलिंग

80 फीसदी तक दिव्यांग को

दिया जा सकता है एडमिशन

चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की बेंच में बुधवार को मामले पर सुनवाई के दौरान एमसीआई यानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के एडवोकेट ने बताया कि पूर्व में गठित कमेटी ने 80 फीसदी तक दिव्यांगों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए एडमिशन देने का निर्णय लिया है। फिलहाल अधिसूचना जारी नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जाहिर है 80 फीसदी तक दिव्यांगों को मेडिकल में प्रवेश देने के निर्णय से उनके भविष्य की राह खुलेगी।

15 जुलाई तक काउंसिलिंग कर देना होगा एडमिशन

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छात्रा के अन्य योग्यताएं पूरी करने पर 15 जुलाई तक काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी कर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रा की 79 फीसदी दिव्यांगता के आधार पर उसे एडमिशन देने से इनकार नहीं किया जाए।

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