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15 प्रोफेसर का ट्रांसफर, 40 शोधार्थियों ने छोड़ दिया, एक की मौत, फिर भी शुरू नहीं हुई पीएचडी

एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर बिलासपुर यूनिवर्सिटी में पीएचडी शुरू होने का इंतजार लंब समय से शोधार्थी कर रहे हैं,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:20 AM IST

एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर

बिलासपुर यूनिवर्सिटी में पीएचडी शुरू होने का इंतजार लंब समय से शोधार्थी कर रहे हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी इसे शुरू नहीं कर पा रही। आयोग और हाईकोर्ट से आदेश आने के बाद भी अधिकारी इसकी फाइल दबाए बैठे हैं। पिछले एक महीने से पीएचडी शुरू करने की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण रुकी है। बीयू की पीएचडी के लिए 3 साल पहले 240 ने परीक्षा पास कर एडमिशन लिया था। जिन प्रोफेसरों के अंडर में शोधार्थी शोध कर रहे थे, उनमें से लगभग 15 से ज्यादा प्रोफेसरों का यूनिवर्सिटी के एरिया से बाहर तबादला हो गया है। वहीं 240 में से 40 शोधार्थी छोड़ चुके हैं। बीयू के एक शोधार्थी पीजीबीटी कॉलेज के अंग्रेजी के प्रोफेसर डॉ. शिवाजी कुशवाहा की मृत्यु भी हो चुकी है, लेकिन अभी भी यूनिवर्सिटी पीएचडी शुरू नहीं कर पाई है।

बिलासपुर यूनिवर्सिटी ने स्थापना के बाद पहली बार 19 विषयों में पीएचडी कराने डीईटी 2015 के लिए 14 जनवरी 2015 को विज्ञापन जारी किया था। प्रवेश परीक्षा के बाद पास शोधार्थियों का एडमिशन भी हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता संत कुमार नेताम ने 26 मई 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष आरक्षण नियमों का पालन नहीं करने शिकायत की थी। आयोग और हाईकोर्ट से पीएचडी शुरू करने का अादेश आ गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी के अधिकारी अब भी शुरू नहीं कर रहे। बिलासपुर यूनिवर्सिटी 3 साल से पीएचडी नहीं करा पा रही है। तीन साल पहले 240 शोधार्थियों ने यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास कर एडमिशन ले लिया था। शोधार्थियों ने एडमिशन के लिए प्रति शोधार्थी 15 हजार रुपए जमा किए हैं। इस तरह से लगभग 36 लाख रुपए यूनिवर्सिटी के पास शोधार्थियों के जमा हैं। इसके बाद से शोधार्थी 3 साल से पीएचडी करने यूनिवर्सिटी का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं इन शोधार्थियों में कुछ दूसरी यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे हैं, उनका पैसा भी यूनिवर्सिटी ने वापस नहीं किया। वहीं आयोग और हाईकोर्ट के अलावा यूनिवर्सिटी की 6 कार्यपरिषद ने पीएचडी शुरू कराने निर्णय लिया है, लेकिन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को 2 साल बाद याद आया है कि पीएचडी के नए नियम 2016 के आधार पर शुरू करना है। अब 3 महीने से नए नियम की फाइल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के पास घूम रही है। कुछ दिनों पहले शोधार्थियों ने कुलपति प्रो. जीडी शर्मा से मिलकर कहा कि अब पीएचडी शुरू करा दीजिए। कुलपति प्रो. शर्मा ने पीएचडी प्रभारी डॉ. एचएस होता से 10 जुलाई तक डीआरसी की बैठक कराने को कहा था, लेकिन अभी तक फाइल ही आगे नहीं बढ़ पाई है।

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