Hindi News »Chhatisgarh »Bilaspur» तीन साल में 21 लोगों की गई जान, एल आकर के मोड़ पर न ब्रेकर न ही सांकेतिक चिन्ह

तीन साल में 21 लोगों की गई जान, एल आकर के मोड़ पर न ब्रेकर न ही सांकेतिक चिन्ह

रतनपुर रोड पर मोहतराई मोड़ जिले का सबसे बड़ा ब्लैक स्पाॅट बन गया है। पिछले तीन सालों में 21 लोगों की यहां पर सड़क हादसों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:25 AM IST

तीन साल में 21 लोगों की गई जान, एल आकर के मोड़ पर न ब्रेकर न ही सांकेतिक चिन्ह
रतनपुर रोड पर मोहतराई मोड़ जिले का सबसे बड़ा ब्लैक स्पाॅट बन गया है। पिछले तीन सालों में 21 लोगों की यहां पर सड़क हादसों में जान जा चुकी है। बड़े चारपहिया गाड़ी के अलावा बाइक सवार व पैदल चलने वाले लोग इस मोड़ पर वाहनों की चपेट में आ चुके हैं। इसके बाद भी यहां दुर्घटनाएं रोकने के लिए कोई प्लान नहीं बना है। एक साल पहले ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए थे। यदि यहां पर दुर्घटनाएं रोकने कोई व्यवस्था कर ली गई होती तो कम से कम 6 लोगों की जान बच सकती थी।

बिलासपुर से कोरबा मार्ग को हैवी ट्रैफिक के लिए जाना जाता है। कोरबा में कोयले की खदान होने से इस मार्ग पर दिनभर हजारों की संख्या में गाड़ियां चलती हैं। इनमें भारी वाहनों की संख्या सबसे अधिक है। सड़क भी काफी पुरानी है। अंबिकापुर, कोरबा जाने वाले लोग भी इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। वाहनों की गति तेज होती है। चालक को अचानक मोड़ नजर आने पर वह नियंत्रण खो बैठता है। इसी कारण यहां पर लगातार हादसे हो रहे हैं। पिछले तीन साल में यहां पर 21 लोगों की जान चली गई। अधिकारियों ने इंतजाम की बात की, पर अब तक ब्लैक स्पाट के दोनों अोर स्पीड ब्रेकर तक नहीं बनाए जा सके। यहां पर रेलिंग तो पहले से ही नहीं है।

इस मार्ग पर दिनभर हजारों की संख्या में गाड़ियां चलती हैं

रतनपुर रोड पर मोहतराई मोड़ पर हर रोज हो रहीं दुर्घटनाएं।

पड़ताल में सामने आए दुर्घटना के प्रमुख तीन कारण

दोनों ओर स्पीड ब्रेकर नहीं

सड़क पर 90 डिग्री का मोड़ होने के बाद इसके दोनों ओर स्पीड ब्रेकर नहीं है। खासकर जब कोई वाहन यहां से पहली बार निकलता है तो चालक को मोड़ की जानकारी नहीं होने पर वह गति पर कंट्रोल नहीं कर पाता। खतरनाक मोड़ पर स्पीड ब्रेकर या सांकेतिक चिन्ह नहीं लगा है।

लगातार हो रहीं दुर्घटनाएं

सड़क बनने के बाद से मोड़ पर रेलिंग नहीं लगाई गई है। इस वजह से यहां पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। यदि रेलिंग होती तो इसमें रेडियम की पट्टी लगी होती और वाहन चालक को यह मोड़ पहले से ही नजर आ जाता। दिन में मोड़ दूर से ही नजर आ जाता।

सड़क की चौड़ाई कम

मोड़ के एक ओर तालाब है और इसकी ऊंची व चौड़ी मेड़ है। दूसरी ओर रोड से काफी नीचे गहराई में खेत है। इस वजह से दोनों साइड काफी खतरनाक हैं। सड़क के यहां पर 90 अंश होने के बाद भी इसकी चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई है। 7 मीटर चौड़ी सड़क है और यह मोड़ पर भी उतनी ही चौड़ी है। चौड़ाई बढ़ाई गई होती तो दुर्घटनाएं कम होतीं।

अभी ध्यान दें तो इस तरह से रोक सकते हैं दुर्घटनाएं

सड़क पर रेडियम नहीं है, करीब 400 मीटर दूर से रेडियम लगा दें तो मोड़ पर दुर्घटनाएं कम हो सकती है।

इस काम की स्वीकृति में देरी हो सकती है इसलिए फिलहाल सड़क के दोनों तरह स्पीड ब्रेकर बनाए जा सकते हैं।

एक या दो नहीं बल्कि दोनों ओर 4-6 साइन बोर्ड लगाकर मोड़ की जानकारी दे सकते हैं।

मोड़ के एक ओर रेलिंग लगाई जा सकती है।

100 मीटर पहले भी स्पीड ब्रेकर बनाकर, मोड़ की चेतावनी का बाेर्ड लगाया जा सकता है।

सड़क की ओर की तालाब की ऊंची मेढ़ को कम करने से दूसरी ओर से आने वाली गाड़ियां नजर आएंगी, इससे दुर्घटनाएं कम होंगी।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Bilaspur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×