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सिम्स: डेढ़ करोड़ की अवैध दवा खरीदी, कुर्सियों का 80 लाख का टेंडर भी गलत, 11 लाख रुपए का घोटाला फूटा

आशीष दुबे | बिलासपुर 99079-01010 छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान(सिम्स)में सालभर पहले हुई गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। यहां...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:25 AM IST

सिम्स: डेढ़ करोड़ की अवैध दवा खरीदी, कुर्सियों का 80 लाख का टेंडर भी गलत, 11 लाख रुपए का घोटाला फूटा
आशीष दुबे | बिलासपुर 99079-01010

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान(सिम्स)में सालभर पहले हुई गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। यहां के अफसरों ने सरकारी पेंशनरों के लिए एक निजी फर्म से डेढ़ करोड़ रुपए की अवैध दवा खरीदी है। इसके अलावा 80 लाख रुपए में दो संस्थानों से गलत तरीके से कुर्सियां खरीदने का आदेश जारी किया गया है। मरीजों के लिए एक्सरे पैकेट खरीदने के बाद 11 लाख रुपए कहां गए इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा और भी मामले हैं। संबंधित ऑडिट रिपोर्ट रायपुर में बैठे अफसरों को भेज दिया गया है। फिलहाल किसी के खिलाफ मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।

इससे पहले इससे ही मिलते जुलते मामले में तत्कालीन डीन को निलंबित कर दिया गया था। तब संविदा डॉक्टर्स की भर्ती में अनियमितता, दवा खरीदी में नियमों की अनदेखी और बगैर उच्च अधिकारियों को सूचित किए मुख्यालय छोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगे। इनके विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग में ही बीते 3 महीने से अपर सचिव स्तर के अधिकारी जांच कर रहे थे। इन सभी आरोपों को सही पाते हुए यह कार्रवाई आदेश जारी किया गया था। यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट भी उन्हीं के कार्यकाल की है। इसमें कई डॉक्टर भी आने वाले दिनों में फंसेंगे। हालांकि पूरी रिपोर्ट में किसने और क्यों गड़बड़ी की है, इसका उल्लेख नहीं है। ऑडिट को देखकर प्रतीत होता है कि इसे एक रिपोर्ट बनाने की मंशा से ही तैयार कराया गया है। इसमें किस अधिकारी ने किन दस्तावेजों पर दस्तखत किए हैं। किसने टेंडर नियमों की अनदेखी की है और कौन इसके लिए जिम्मेदार है, ऐसे किसी भी बात का जिक्र नहीं है। मामले में प्रभारी डीन डॉ. रमणेश मूर्ति का कहना है कि उन्होंने अभी रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया है। इसके बाद वे जवाबदेही तय कर मामले में कार्रवाई के लिए सरकार को लिखेंगे। उनके मुताबिक इसकी स्टडी के बाद ही दोषियों के नाम उजागर होंगे। उन्होंने दावा किया है कि मामले से जुड़ा कोई भी डॉक्टर या अफसर नहीं बचेगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

14 पन्नों की रिपोर्ट में कब, कहां पर कैसे हुई अनियमितता सब बताया गया

ऑडिटरों की इन पांच आपत्तियों ने मचाई खलबली

अापत्ति-1

बिना अनुबंध जैन मेडिकल से मेडिसिन खरीदे गए

ऑडिट टीम ने लिखा है कि लोकल पर्चेस के जरिए सिम्स के अफसरों ने सरकारी पेंशनर के लिए जो दवा खरीदी की है वह नियमों के विपरीत है। इसके लिए 6 जून 2016 को गोड़पारा स्थित जैन मेडिकल को दवा खरीदी के लिए हायर किया गया है। सिम्स ने इस अनुबंध के दौरान स्टांप में जो नियम मान्य या अमान्य है, उन बातों का कोई उल्लेख नहीं किया है। इसलिए दवा का स्तर कैसा है इस पर भी सवाल उठाए गए हंै। लिखा गया है यदि इस दौरान किसी दवा में गड़बड़ी मिलती है तो फर्म के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की जा सकती है। जाहिर तौर पर अफसरों ने फर्म को बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए हैं।

चहेतों के लिए तोड़े गए नियम निजी फर्म को पहुंचाया लाभ

सिम्स में दवा सहित दूसरे सामान की खरीदी पर एक बात स्पष्ट हो चुकी है यहां चहेतों को लाभ पहुंचाने का बड़ा खेल चल रहा है। मेडिकल एजेंसियों के फायदे के लिए सिम्स के अफसरों ने उन सरकारी नियमों को ताक पर रख दिया है, जिसे सरकार ने पालन करने की बात कही है। पूरे दस्तावेजों के अध्ययन पर पता चला है कि तीन निजी फर्म को आर्थिक फायदा पहुंचाकर सरकार को नुकसान पहुंचाया है।

अापत्ति-2

1126 प्रसुताओं को नहीं किया पैसों का भुगतान

जननी सुरक्षा योजना के तहत सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अथवा मान्यता प्राप्त अस्पताल में डिलेवरी कराने पर एक हजार और चौदह सौ राशि देने की घोषणा की है। इसके लिए कुछ कैटिगीरी तय है। इस योजना में भी सिम्स फेल है। ऑडिट रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि यहां माह अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2017 तक कुल प्रसव की संख्या 6513 है। इसमें 2711 लोगों ने पैसों के लिए आवेदन किया है। अफसरों ने सिर्फ 1585 हितग्राहियों को इन पैसों का भुगतान किया है। इसके अलावा 1126 को अब तक इसकी राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अापत्ति-3

जानबूझकर 11 लाख 71 हजार का नुकसान

सिम्स में मेडिसिन खरीदने की बात पर संचालानालय चिकित्सा, शिक्षा रायपुर द्वारा बजट आवंटन में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि खर्च करते समय शासन के मितव्ययता संबंधी आदेश का पालन कराना अफसरों की जिम्मेदारी में शुमार है। यहां 2015-16 के दौरान दाे दवाइयों को निर्धारित दर से अधिक दाम पर खरीदा गया है। इसके अलावा रिंगर लेक्टेट 500 एमएल का अनुमोदित दर पर उपलब्ध होने बाद इसे जन औषधि केंद्र से अधिक दामों पर खरीदा गया है। इस बात को लेकर ऑडिटर ने आपत्ति जताई है।

अापत्ति-4

पंजी का संधारण ही नहीं 269 एक्सरे पैकेट गायब

छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम 121 के तहत जब भंडार सामाग्री प्राप्त होती है, तब उसकी जांच करनी चाहिए। पर सिम्स में अभिलेखाें में ऐसा नहीं पाया गया। यहां के केंद्रीय भंडार द्वारा डेंटल सर्जिकल रायपुर को निविदा संपादित की गई थी। वर्ष 2015 से 2017 तक मेसर्स श्यामा मेडिकल एंड डेंटल सर्जिकल रायपुर द्वारा यहां ऑपरेशन के लिए उपयोगी आपूर्ति हुई है। सिम्स के केंद्रीय भंडार शाखा ने याहंा रेडियोडायग्नोसिस विभाग को समय समय पर कुछ चीजें उपलब्ध करवाई है। इन्हीं में 269 एक्सरे पैकेट का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे 11 लाख 27 हजार रुपए की गड़बड़ी मिली है।

ऑडिट रिपोर्ट का अध्ययन फिर कार्रवाई के लिए भेजेंगे

हमें वर्ष 2016-17 की ऑडिट की रिपोर्ट मिली है। इसमें कई तरह की गड़बड़ी करने की बात है। अभी हमने इसकी स्टडी नहीं की है। जैसे ही अध्ययन कर लेंगे। गड़बड़ी करने वालों की जवाबदेही तय होगी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए आगे फाइल बढ़ाई जाएगी। कुछ जगह पर बड़ी आर्थिक अनियमितता की बात कही जा रही है। डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी डीन, सिम्स, बिलासपुर

अापत्ति-5

पांच की गलत भर्तियां, पांच लाख का नुकसान

सिम्स में तत्कालीन अफसरों ने कलेक्टर दर पर भर्ती के लिए तीन कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव बनाया था। और भर्ती पांच लोगों की कर दी। इससे पांच लाख रुपए का नुकसान बताया गया है। इन पांचों की भर्ती के दौरान कई तरह की गड़बड़ी देखी गई है। किसी ने आवेदन ही प्रस्ताव बनाने से पहले किया तो किसी को पिछले दरवाजे से लाने की कोशिश हुई है। इनमें तत्कालीन मेंबर सफल भी हो चुके हैं। इसकी शिकायत भी अभी के अफसरों ने हुई है। उन्होंने मामले में जल्द एक्शन लेने की बात कही है।

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