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बीमारी ठीक होने बाद धीरे-धीरे चलना शुरू करें, शरीर से सुस्ती दूर होगी: पुजारी गोविंद

पूर्णिमा के दिन 108 कलश जल से स्नान करने के बाद भगवान बीमार हुए थे। 15 दिन बाद शुक्रवार को स्वस्थ हुए। महाप्रभु ने...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:25 AM IST
पूर्णिमा के दिन 108 कलश जल से स्नान करने के बाद भगवान बीमार हुए थे। 15 दिन बाद शुक्रवार को स्वस्थ हुए। महाप्रभु ने नेत्र खोले पूजा हुई। नेत्रोत्सव के रूप में मनाया गया। सुबह से महाप्रभु को दर्पण स्नान कराया गया। उनका साज-श्रृंगार हुआ। पूजा-अर्चना के बाद पट खोला गया। भक्तों ने दर्शन किए। मंदिर के पुजारी गोविंद पाढ़ी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ का संदेश है कि बीमारी ठीक होने बाद धीरे-धीरे चलना शुरू करें, शरीर से सुस्ती दूर होगी। इसके साथ तीन पहर भोजन करना चाहिए।

भगवान जगन्नाथ ने शुक्रवार को भक्तों को नवयौवन रूप के दर्शन दिए। पंडितों ने सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा का साज-शृंगार करने के बाद मंदिर के पट खोले। पट खुलने का इंतजार भक्तों को 15 दिनों से था। मंदिर के पट खुलते ही भगवान के जयकारे लगने लगे। भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन किए। सुबह से मंदिर में केके बेहरा, नंदिता, बसंत कुमार, स्मृति बोले, चंद्रभूषण बोले, किशोर कुमार श्रीवास्तव, सुशांत सिंह राजपूत, मनोहर टिगनू, वी काले, पी लक्ष्मी ने प्रथम दर्शन किए। शनिवार को आयोजन समिति के तत्वावधान में उत्साह से गुंडिचा रथयात्रा निकाली जाएगी। भगवान का रथ तैयार कर लिया गया है। पूजा की शुरुआत सुबह 5:30 बजे मंगला आरती के साथ होगी। 6:30 बजे सूर्य पूजा, 7 बजे द्वारपाल पूजा, 10:45 से बड़ा श्रंगार और दोपहर 12:5 बजे पहंडी विजय होगी। दोपहर 1:30 बजे पीसीसीएम पीके जेना के छेरापहरा करने के साथ ही रथयात्रा की शुरुआत होगी। दोपहर 2 बजे महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ रथ पर निकलेंगे। रथयात्रा मंदिर से निकलकर तितली चौक, गिरजा चौक, तारबाहर चौक, गांधी चौक, दयालबंद चौक, पोस्ट ऑफिस, रेलवे जोन आफिस, तोरवा थाना होते हुए उड़िया स्कूल हॉल शाम को मौसी मां मंदिर पहुंचेगी।

भगवान जगन्नाथ हुए स्वस्थ, मंदिर में खुशी का माहौल, भक्तों को बांटा गया महाप्रसाद

भगवान जगन्नाथ का रथ तैयार। मंदिर में परंपरा के अनुसार नए ध्वज लगाए गए।

मंदिर में ध्वजारोहण किया गया

भगवान के स्वस्थ होने के बाद मंदिर में खुशी का माहौल बन गया। खुशी से मंदिर में ध्वजारोहण किया गया। मंदिर के पुजारी के पूजा करने के बाद 40 फीट ऊंचे मंदिर पर चढ़कर ध्वज फहराया गया। भगवान के प्रमुख मंदिर का झंडा 2 मीटर, दूसरा झंडा डेढ़ मीटर और तीसरा 1 मीटर का है। मंदिर में हर साल रथयात्रा के एक दिन पहले नया ध्वज चढ़ाने की परंपरा है। शुक्रवार को सुबह से इस परंपरा का निर्वहन किया गया।