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मनुष्य परमात्मा को छोड़ अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में लगा है : मुनि श्री पंथक

आत्मा-परमात्मा हैं, लेकिन मनुष्य अपने आपको परमात्मा बनाने की कोशिश ही नहीं करता। वह अपनी इच्छाओं को ही पूरा करने...

Danik Bhaskar | May 03, 2018, 02:30 AM IST
आत्मा-परमात्मा हैं, लेकिन मनुष्य अपने आपको परमात्मा बनाने की कोशिश ही नहीं करता। वह अपनी इच्छाओं को ही पूरा करने में लगा रहता है। एक इच्छा पूरी हुई कि दूसरी खड़ी हो जाती है। ऐसे ही असंख्य इच्छाओं को पूरा करने में पूरा जीवन लगा देता है और अपनी आत्म दया को भूलता ही गया है। लेकिन जब किसी आत्मा को यह ख्याल आ जाता है, तो वह समझता है कि इच्छा जो है आत्मा की बात नहीं है। इच्छा तो मन की बात है। उक्त बातें प्रवचन देते हुए मुनि श्री पंथक महाराज ने बुधवार को कही।

टिकरापारा गुजराती भवन में प्रवचन चल रहा है। बुधवार को प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने कहा कि श्री उत्तरायण ध्यान सूत्र के आठवें अध्याय में लोगों की खौफनाक परिस्थिति का उल्लेख है। मुनि श्री पंथक महाराज ने समझाया कि आज कोई भी मनुष्य अपने मन की बात दूसरों को बताता ही नहीं। ऐसा नहीं कि कोई अपना दुख दर्द को किसी और को बताना नहीं चाहता, लेकिन उसके पास भी सामने वाले के भी किसी दर्द व दुख भरी बातें सुनने का समय भी नहीं है और ना ही कोई रस है। मन और आत्मा दोनों अलग-अलग हैं।

भौतिक सुख संपत्ति अलग है और आत्म धन अलग। सांसारिक प्रवृत्ति और भौतिक संपत्ति का भोग उपयोग करते-करते जो पैदा होता है, उसको सुख कहा जाता है। ऐसे सांसारिक सुख के पीछे दुख भी जुड़ा होता है। सुख को सुपरफास्ट ट्रेन कहते हैं, जोकि आती है और पल भर में ही चली जाती है। दुख को पैसेंजर ट्रेन कहा है, जो आती है तो लंबे समय तक एक ही स्थान पर खड़ी रहती है। आनंद एक आत्मिक दशा व आत्मिक भाव है। जो सुख और आनंद के बीच के भेद को समझ गया, उसे ही वेद ज्ञान कहते हैं। वेद ज्ञान प्राप्त मनुष्य भौतिक संपत्ति को प्राप्त करने की दौड़ में अपनी आरंभिक संपत्ति को लुटाने नहीं देगा। आत्मा को मुक्ति रूप से ख्याल में रखकर अपने मन और शरीर की डिमांड को पूरा करने की जो चेष्टा करता है उसे ही भेदज्ञान कहा जाता है।

टिकरापारा स्थित गुजराती भवन में प्रवचन करते मुनि श्री पंथक महाराज व सुनते श्रावक-श्राविकाएं।

ये रहे उपस्थित

समाज के अमरेश जैन ने बताया कि मुनि श्री की गोचरी सुबह लता किशोर देसाई परिवार और दोपहर की आहारचर्या दीपा कीर्ति सुतारिया परिवार के द्वारा लाभ लिया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष भगवान दास सुतारिया, गोपाल वेलाणी, किशोर देसाई, हेमंत सेठ, नरेंद्र तेजाणी, कल्पा तेजाणी, वत्सला कोठारी, लता देसाई, उषा शाह, योगेंद्र तेजाणी सहित समाज के लोग उपस्थित थे।