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भतीजे से कहा था- देखना कल तुम मिलने आओगे

सीआरपीएफ के असिस्टेंट प्लाटून कमांडर (एपीसी) पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने खुदकुशी करने का इरादा पहले से ही तय कर लिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:30 AM IST

भतीजे से कहा था- देखना कल तुम मिलने आओगे
सीआरपीएफ के असिस्टेंट प्लाटून कमांडर (एपीसी) पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने खुदकुशी करने का इरादा पहले से ही तय कर लिया था। इसका अंदाजा उसके बातों से चलता है। एक दिन पहले रविवार को उसके भतीजे देवेंद्र सिंह ने कॉल की थी। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान पुष्पेंद्र बहादुर ने उसे बातों-बातों में ही कह दिया था कि उसकी सोमवार को उससे मुलाकात होगी और वह मिलने आएगा। भतीजा कुछ समझ नहीं पाया था। उसे लगा शायद चाचा ने ऐसे ही कह दिया होगा पर सोमवार को जैसे ही उसके पास चाचा की खुदकुशी की सूचना गई वह एक दिन पहले अपने चाचा के कही बात का अर्थ समझ गया। संभवतया पुष्पेंद्र ने खुदकुशी करने के लिए पहले ही ठान लिया था। इसीलिए दावे के साथ उसने भतीजे को मिलने आने की बात कह दी थी। पुलिस को दिए बयान में देवेंद्र सिंह ने इस बात का खुलासा किया। देवेंद्र ने बताया चाचा को हार्ट की प्राब्लम थी और इलाज चल रहा था।

गुमसुम रहता था डिप्रेस था

पुष्पेंद्र का सीआरपीएफ कैंप में कोई साथी नहीं था। वह सभी से कम बातचीत करता था। इससे लगता है कि वह तनाव के चलते डिप्रेस था। घर में प|ी की मौत के बाद वह शराब भी पीने लगा था।

बड़ी बेटी की शादी कर 55 दिन की छुट्टी से लौटा था

पुष्पेंद्र कुछ दिन पहले ही घर से लौटा था। उसने बेटी की शादी करने के लिए उसने 55 दिन की छुट्टी ली थी।

एक दिन पहले ही परिजनों से पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने फोन पर की थी बात, सुबह गुड मार्निंग का भेजा था मैसेज

तीन साल पहले इसी कैंप में कर्नाटक के जवान ने भी खुद पर चला ली थी 10 गोलियां

2 नवंबर 2014 को सीआरपीएफ कैंप भरनी में कांस्टेबल शिवानंद डीके पिता दयामननाथ 43 वर्ष काे खुद को गोली मार ली थी। उसने एके 47 से अंधाधुंध फायरिंग की थी। गन शाॅट से उसकी मौत हुई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था। सभी गोलियां नजदीक से चलाई गई थीं। रिपोर्ट में जवान के शरीर पर 10 गोलियां मिलने का उल्लेख था पर जवान ने खुदकुशी की है या उसकी हत्या की गई है, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। जवान कर्नाटक का रहने वाला था। भरनी सीआरपीएफ कैंप में चार साल से पदस्थ था। उसे गंभीर हालत में अपोलो में भर्ती कराया गया था। यहां उसकी मौत हुई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर 7 गोलियां चलने का जिक्र था। जवान की मौत को लेकर परिजनों ने किसी तरह की शिकायत नहीं की।

मेघालय की घटना के बाद आरपीएफ ने दी थी समझाइश

मेघालय में चुनाव के दौरान आरपीएसएफ के एक जवान ने अपने कमांडेंट को गोली मार दी थी। खबरों के मुताबिक जवान अवकाश चाह रहा था और उसे नहीं मिल रहा था। इससे नाराज होकर उसने ऐसा कदम उठाया था। इस हादसे के बाद रेलवे पुलिस बल के बिलासपुर जोन के सीएससी ने सेमिनार आयोजित किया। इसमें उन्होंने समस्त हवालदार, एएसआई, एसआई व इंस्पेक्टरों को बुलवाकर समझाइश दी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें जब भी अवकाश पर जाना हो तो वह अपने संबंधित अधिकारी से बात करे। अगर वहां पर कोई समस्या सामने आती है तो फिर वे वरिष्ठ अफसरों से बात करें। अवकाश को लेकर तनाव में न आएं। हर समस्या का हल है उसे शांति से निबटाएं। आरपीएफ में भी बल की कमी है और अक्सर अवकाश को लेकर जवानों और इंस्पेक्टरों के मध्य कहा सुनी हो जाती है। शादियों का सीजन है इसलिए अवकाश पर जाने वालों की लंबी फेहरिस्त है। पर्याप्त बल नहीं होने से इस तरह की समस्या आती है।

कुछ सुलगते सवाल

जवान का साथी उससे मिलने गया तो वह बिल्कुल सामान्य था। मोबाइल भी चार्जिंग पर लगा रखा था। उसके मोर्चा से नीचे उतरते ही ऐसा क्या हुआ जिसके कारण जवान ने खुदकुशी कर ली?

अधिक तनाव तो नक्सली क्षेत्र में होता है। नारायणपुर में पदस्थापना के दौरान उसने खुदकुशी नहीं की।

खुदकुशी करने की वजह पारिवारिक होता तो वह बेटी की शादी के बाद कैंप क्यों लौटता,घर पर ही खुदकुशी कर लेता।

घटना के बाद फोरेंसिक की टीम ने मौके की जांच की। अधिकारियों ने बयान दर्ज किए।

असिस्टेंट प्लाटून कमांडर पुष्पेंद्र ने इसी कमरे में खुदकुशी की।

जमीन पर उल्टा रखकर पैर से दबाया ट्रिगर

फोरेंसिक एक्सपर्ट के अनुसार एके-47 को जमीन पर उल्टा रखकर गोलियां चलाई गई थीं और जवान ने ट्रिगर दबाने के लिए पैर का इस्तेमाल किया था। एके-47 आटोमैटिक मोड पर नहीं थी। इस कारण जितनी बार ट्रिगर दबा उतनी ही गोलियां चल पाईं। यदि ऑटोमेटिक मोड में होता तो वेपन खाली होते तक गोलियां चली होतीं।

तनाव में कर रहे जवान आत्महत्या

7 सितंबर 2017-दंतेवाड़ा में अर्धसैनिक बल के शिविर में अपने सर्विस हथियार से गोली मारकर 111 बटालियन के कांस्टेबल सतीश कुमार ने आत्महत्या कर ली।

2 नवंबर 2017- सकरी स्थित दूसरी बटालियन के जवान शिवजी 35 वर्ष ने लोखंडी फाटक के पास ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह काफी समय से पटरी पर बैठा हुआ था।

23 मार्च 2015- कांकेर के जंगलवार फेयर कॉलेज में प्रशिक्षण के लिए पहुंचे बीजापुर के कांस्टेबल सखाराम नायक ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

25 फरवरी 2014- ड्यूटी के दौरान आत्महत्या करने वालों में जगदलपुर में तैनात सीएसपी देवनारायण पटेल हैं। देवनारायण का कथित रूप से जज से विवाद हो गया था, जिसके बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ खुद को गोली मार ली थी।

12 अगस्त 2014- सकरी बटालियन में सीएएफ के जवान ओंकार बरेठ ने बैरक में फांसी लगा ली थी। मरने से पहले उसने अपनी हथेली पर लिखा था कि सब लोग मुझे पागल कहते हैं, इस कारण वह परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है। उसने सवा साल पहले की ज्वॉइनिंग दी थी।

14 सितंबर 2014- बीजापुर में सीआरपीएफ के कांस्टेबल हरिनारायण द्विवेदी 29वर्ष ने सर्विस राइफल से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। वह 168वीं बटालियन व सतना का रहने वाला था।

अगस्त 2013 -राजनांदगांव के सीतानदी के आईटीबीपी जवान कपिल शर्मा 24वर्ष ने हैंड ग्रेनेड विस्फोट कर आत्महत्या कर ली। उसने 2012 में ज्वॉइनिंग की थी। वह मूलतः हरियाणा का रहने वाला था।

एसपी राहुल शर्मा ने भी की थी खुदकुशी

14 मार्च 2012
को बिलासपुर के तत्कालीन एसपी राहुल शर्मा 37 वर्ष ने अधिकारियों की प्रताड़ना के चलते पुलिस मेस में अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। राहुल काम की वजह से तनाव में थे। वे 2002 बैच के आईपीएस अफसर थे। नक्सल क्षेत्र दंतेवाड़ा में भी राहुल शर्मा की तैनाती रही।

सिर को भेदते छत से जाकर टकराई गोलियां, छेद हुआ

दोनों गोलियां तेजी से निकली थी। ठुड्डी से यह जवान के सिर की ओर होकर बाहर निकली और सीधे मोर्चा की छत से टकराई। इसके कारण छत पर छेद हो गया। मौके पर पुलिस ने दोनों गोलियाें का खोखा भी बरामद किया।

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