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80 करोड़ में पीएचई ने किया घटिया काम, अब मेंटेनंेस करने मांगे 80 लाख

आशीष दुबे | बिलासपुर 99079-01010 शहर के भीतर जल आवर्धन योजना के तहत पीएचई का बनाया दूसरा प्रोजेक्ट भी फेल हो चुका है। 80...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:40 AM IST
80 करोड़ में पीएचई ने किया घटिया काम, अब मेंटेनंेस करने मांगे 80 लाख
आशीष दुबे | बिलासपुर 99079-01010

शहर के भीतर जल आवर्धन योजना के तहत पीएचई का बनाया दूसरा प्रोजेक्ट भी फेल हो चुका है। 80 करोड़ की योजना में अफसरों ने ठेकेदारों से मिलकर घटिया काम करवाया है। इसकी पीछे की वजह कमीशनखोरी बताई जा रही है। यही वजह है कि नौ जगह गलत डिजाइन की टंकियां बनी हैं। इसके अलावा कई जगह-जगह पाइप लाइन में छेद आने शुरू हो चुके हैं। इससे गंदे पानी सप्लाई हो रही है। इसी कंडीशन को देखकर निगम ने प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अब तक टंकियों का हैंडओवर नहीं लिया है।

अब हालात ये बन रहे हैं कि पीएचई के अफसर निगम से इसके मेंटेनेंस का काम पैसा मांग रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पीएचई के जिस अफसर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के अलावा अन्य कामों के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। वही कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इसके चलते ही शहर में पानी की समस्या सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि निगम अफसर यहां की समस्या सुनने को तैयार नहीं है। इसके चलते उन्हें बहुत तकलीफ झेलनी पड़ रही है। इससे पहले भी पीएचई की ओर से बनाई गई योजनाएं सवालों के घेेरे में है। आरोप है कि जिम्मेदार अफसरों ने ठेकेदारों से मिलकर गुणवत्ताहीन काम कराया है। इसमें इस्तेमाल पाइपलाइन और दूसरे सामान भी घटिया बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हो रहा। जबकि निगम मामले में मुखर है। कार्यपालन यंत्री राजकुमार मिश्रा का कहना है कि योजना के तहत पीएचई के अफसरों ने ऐसी गड़बड़ी की है, जिससे उन्हें आने वाले वक्त में समस्या के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। लंबे समय को देखकर बनाई इस योजना में पानी की टंकियों की डिजाइन गलत है। इसके अलावा कई दूसरी तकनीकी दिक्कत है। जिसे जांच के बाद सबकुछ कम्प्लीट कराकर हैंडओवर लिया जाना बेहतर होगा। इधर शहर के कई मोहल्लों में पानी की समस्या शुरू हो चुकी है। व्यापार विहार सहित कई क्षेत्रों पर दिक्कत बरकरार है।

आठ से दस घंटे में भर रहा पानी, खाली होने में लग रहे सिर्फ कुछ घंटे

निगम अफसर खुद कह रहे- बहुत ज्यादा है परेशानी

मंत्री का निर्देश भी बेअसर, अफसरों को फर्क नहीं पड़ा

जल आवर्धन योजना को पूरा करने के लिए पिछले दिनों नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने पीएचई और नगर निगम के अफसरों की संयुक्त बैठक बुलवाई थी। इस बैठक में पीएचई के ईई एसके पांडे ने नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल को बताया था कि परियोजना पूर्ण हो चुकी है किंतु इस परियोजना के लिए चार अलग-अलग पानी टंकियों तक पानी पहुंचाने जो बोरिंग कराई गई थी, उनमें से नौ ट्यूबवेल फेल हो गए हैं। उनके स्थान पर नए बोर ही कराए जाने हैं। ट्यूबवेल बंद होने के बावजूद उन टंकियों में पानी अभी भी भर रहा है इसलिए परियोजना हैंडओवर की जा सकती है। मंत्री ने उन्हें जल्द काम पूरा कराकर इसे निगम को हैंडओवर कराने की बात कही थी। इसके उलट अब खुद पांडेय मामले में कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं।

हालात ये कि चल रही लगातार चिटि्ठयां, पर सबकुछ यथावत

पीएचई के अधिकारियों ने निगम को पत्र लिखकर मेंटेनेंस का पैसा मांगा है। उन्होंने बताया है कि उन्हें टंकियों को सहेजने में दिक्कत आ रही है। निगम के अफसरों का कहना है कि अभी टंकियों के निर्माण को महज कुछ महीने ही गुजरे हैं। ऐसे में पीएचई को आखिर क्यों इसकी देखभाल में समस्या पैदा हो रही है यह सोच का विषय है। आरोप लग रहे हैं पीएचई के जिम्मेदार अधिकारियों सरकार की ओर से जनता के लिए बनाई गई इस महत्वाकांक्षी योजना पर पलीता लगा दिया है। बड़े अफसर भी मामले में ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पिछले साल पानी की इतनी बताई थी जरूरत

शहर में पानी टंकी 21। प्रतिदिन सप्लाई 42 लाख लीटर। प्रतिदिन प्रति परिवार 127 लीटर खपत। प्रतिदिन प्रति परिवार लक्ष्य 135 लीटर। पाइप लाइन लंबाई 416 किमी। हैंडपंप 170। पंप 545। चालू 463। सूखे बोर 82। औसत जलस्तर 160 फीट।

गलत टंकिया बनी हैं, इसलिए नहीं ले रहे हैंडओवर


सॉरी, मैं कुछ नहीं कह सकता


अब अमृत मिशन में फिर बदलेंगे पाइप लाइन, इसलिए निडर बैठे हैं अफसर

पीएचई और निगम के अफसर इस बात से खुश हैं कि अब शहर में पानी की पाइपलाइन फिर बदली जाएगी। इसके लिए नई योजना अमृत मिशन लाई जा चुकी है। इससे पीएचई के उन अफसरों की गड़बड़ी पर पर्दा डाला जा सकेगा, जिससे घटिया काम कराकर पानी की समस्या को बढ़ाया गया है। इसमें भी शहर के भीतर फिर से करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे पहले भी पीएचई के अधिकारियों ने पहले फेज में काम को लेकर लापरवाही बरती है। इसी कंडीशन को देखकर निगम के अफसर अब इस योजना को हैंडओवर लेने से तौबा कर रहे हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला

इस योजना को वर्ष 2013-14 में पूरा हो जाना था। पर पीएचई की लेटलतीफी से कार्य पिछड़ता गया। इसके अलावा पीएचई के 9 बोर फेल हो चुके हैं । विभाग ने नए बोर कराने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। नगर निगम नए बोर होने के बाद ही हैंड ओवर लेने की बात कहता रहा। जलावर्धन योजना के तहत शहर में अलग-अलग स्थानों पर 17 पानी की छोटी बड़ी टंकी बनाई गई है। इनके जरिए 170 किलोमीटर पाइप लाइन में पानी की सप्लाई की जा रही है। एक टंकी को छोड़ शेष 16 पानी टंकियों से पानी की सप्लाई की जा रही है। इनमें से 9 पानी की टंकियां नगर निगम को पीएचई ने पहले ही हैंड ओवर कर दी हैं। दूसरी टंकियों में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। इसके चलते ही निगम इसे हैंडओवर लेने को तैयार नहीं है।

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