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भर्ती घोटाला: सिम्स पहुंची एसआईटी शिकायतकर्ता ने दिए थैलाभर सबूत

Bilaspur News - सिम्स में करीब छह साल पहले वर्ष 2012-13 में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी भर्ती मामले की जांच के लिए सोमवार को स्पेशल...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:40 AM IST
भर्ती घोटाला: सिम्स पहुंची एसआईटी शिकायतकर्ता ने दिए थैलाभर सबूत
सिम्स में करीब छह साल पहले वर्ष 2012-13 में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी भर्ती मामले की जांच के लिए सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम अस्पताल पहुंची। लोकायुक्त के निर्देश पर बनी इस टीम के मेंबरों ने सोमवार को सुबह साढ़े 11 बजे शिकायतकर्ता संजीव कुमार पांडल को बुलवाया। डीन दफ्तर के किनारे बने एक चैंबर में चार सदस्यीय टीम ने मामले से जुड़ी जानकारी ली। शिकायतकर्ता संजीव से पूछा गया कि उनके पास यहां हुई गड़बड़ी के क्या सबूत हैं? संजीव ने उन्हें थैला भर दस्तावेजों के सबूत दिखाए। और पूछा कि क्या यह सब देखने के बाद भर्ती घोटाले के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। तब एसआईटी ने कहा कि यदि गलत हुआ है तो इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। वहां से कार्रवाई तय होगी।

इसके अलावा टीम के मेंबरों ने कुछ डॉक्टर और दूसरे कर्मचारियों से पूछताछ की। कुछ लोगों को रायपुर आने की बात भी कही गई है। बताया जा रहा है कि एसआईटी मेंबरों को गड़बड़ी के कुछ अहम् सबूत मिले हैं। वे इसकी जांच करने ही बिलासपुर पहुंचे थे। सिम्स के डॉक्टरों से बंद कमरे में हुई पूछताछ कोई बताने को तैयार नहीं है। प्रभारी डीन डॉक्टर रमणेश मूर्ति इसे सामान्य जांच बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पहले भी भर्ती से संबंधित मामले में पूछताछ हो चुकी है। लोकायोग के निर्देश पर कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने मामले में जांच के बाद किसी भी तरह से अभिमत देने से इनकार कर दिया है। इसलिए किसी गड़बड़ी जैसी कोई बात नहीं है। प्रभारी डीन ने ये भी कहा कि एसआईटी को उनके मांगे गए सारे साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

शिकायतकर्ता ने कहा- दोषियों पर एफआईआर कराइए

सबूत का थैला

सभी दस्तावेज दिखाए

शिकायतकर्ता ने सबूत के तौर पर बताया है कि अस्पताल में बाबू के साले को फार्मासिस्ट की नौकरी मिली है। चयन समिति के पदाधिकारी के रिश्तेदार ने गणित लेकर 12 वीं पढ़ाई की है और वह युवक दवा विशेषज्ञ बन गया है। उसने बताया कि जो आवेदक परीक्षा में बैठने के योग्य तक नहीं थे उन्हें भी आंखें मूंदकर सरकारी नौकरी बांटी गई गई। सबूत के तौर पर उसने इन सारी चीजों के दस्तावेज दिखाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यहां आपत्तिजनक नियम अनुमोदन करवाए हैं। इसलिए इसका तर्क भी समझ से परे है। ये किसी भी भर्ती नियम से अलग हैं। यही वजह है कि वे लगातार शिकायतें कर रहे हैं।

ऐसे बनाए नियम, कहा- अंक सूची को नष्ट कर दीजिए

शिकायतकर्ता ने मुख्य बिंदु का जिक्र करते हुए बताया कि भर्ती कमेटी कैसे लापरवाही बरती है। इसकी उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन समिति से संबंधित हैं। समिति द्वारा प्रश्नपत्रों का मूल्यांकन कर प्राप्त अंकों की सूची बनाई जानी थी। इसमें समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर होने थे। इसे कॉलेज प्रशासन को जमा करना था। कॉलेज प्रशासन ने इस सूची के अंकों को कंप्यूटर में फीड कर मूल्यांकन समिति द्वारा दी गई मूल सूची को नष्ट कर देगी, इस आशय का नियम बना डाला। तत्कालीन अफसरों ने उसका अनुमोदन भी कर दिया।

ये रहे टीम के मेंबर

एसआईटी की टीम में अपर सचिव अारके टंडन, दीपक अग्रवाल, डॉ बसंत माहेश्वरी और महेश धीवर यहां पहुंचे थे। सिम्स की तरफ से डॉ बीपी सिंह ने दस्तावेज प्रस्तुतकर्ता के रुप में टीम को दस्तावेज उपलब्ध कराए। इस दौरान सिम्स के डीन डॉ. प्रवीण पात्रा के स्थान पर डॉ. रमणेश मूर्ति प्रभारी डीन के रूप में मौजूद रहे। इसके बाद टीम ने मुख्य शिकायतकर्ता संजीव कुमार पांडल को सिम्स बुलाकर पूछताछ शुरू की।


भास्कर में प्रकाशित खबर।

जानिए, कब क्या और कैसे?

सिम्स में वर्ष 2012-13 में 400 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया का आवेदन निकाला गया। इसी में चयन समिति के पदाधिकरियों पर रिश्तेदारों और अपात्र लोगों को नौकरी देने के आरोप हैं। इसकी दो जांच पहले भी कराई जा चुकी है। कलेक्टर की जांच बेनतीजा रही है।

इसलिए उठ रहे सवाल

सिम्स में चार साल पहले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति में फर्जीवाड़े की जांच जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पूरी कर ली थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सरकार के पास भेजी है। इसमें लिखा गया कि इससे संबंधित दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं। साक्ष्यों में अभाव में अभिमत देना संभव नहीं है। जबकि इसी मामले में लोेकायोग के निर्देश पर गठित डॉक्टरों की टीम ने पूरी रिपोर्ट में कहां और किस स्तर पर चूक हुई है, बता दिया है।

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