रमजान अउ पुरुषोत्तम के महीना / रमजान अउ पुरुषोत्तम के महीना

Bilaspur News - सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा ! अधिक मास के हमर जिनगी म भारी महत्तम हावय...

Bhaskar News Network

Jun 11, 2018, 03:10 AM IST
रमजान अउ पुरुषोत्तम के महीना
सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा ! अधिक मास के हमर जिनगी म भारी महत्तम हावय रे ! फेर संगवारी हो हमन उॅखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। हमन नानपन ले सुनत आवत हन-“हिन्दु मुस्लिम सिख इसाई, आपस में सब भाई-भाई।” हमर भारत देस के यही विशेषता हवय कि इंहा अनेकता में एकता के वास हावय। इंहा भंाति-भंाति के धर्म, रीति-रिवाज अउ संस्कृति के मेल हावय एखरे सेती हमर भारत जइसे देस पूरा विश्व मे अउ कोनो दूसर नई हे। इहां मंदिर हे ,मस्जिद हे, गुरूद्वारा हे अउ गिरिजाघर हे। इहां गंगा, यमुना, कृष्णा अउ कावेरी जइसे नदिया हावय त हिमालय जइसे पर्वत घलाव हावय जउन हर हमर भारत भुइंया के रक्षा करथे। इंहा के मनखे जतके नरम अउ सरल हृदय के हावय ,बैरी अउ दुश्मन मन बर ओतके कठोर घलाव हावय।

हमर भारत भुइंया में जनम लेहे बर देवता मन घलाव तरसथे अइसे पावन भुइयां के हम रहवासी आन। बेरा-बेरा में दुनिया के मनखे मन हमर एकता अउ अखंडता ला परखे के कोशिस करथें फेर हमन उमन ला देखा देथन के हमर एकता अउ अखंडता रूई के गोला नोहय जउन हर फंूके म उड़ा जाही। एकता अउ अखंडता तो हमर रग-रग म बसे हावय। चाहे दिन हो चाहे तिथि हो चाहे वार हो हमन वहू म एक हवन ए बात के सीख मिलथे हमर धरम ग्रंथ से। हमर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भले चंद्रमास अउ सौर मास के समायोजन करे बर अधिक मास के निर्माण करे गै हावय जउन कि हर तीन साल के बाद आथे फेर एखर हमर जिनगी में का महत्तम हावय एला जाने के अउ समझे के प्रयास जरूर करना चाही। वइसे तो मनखे ला अपन धरम करम के रद्दा म रोजे रेंगना चाही फेर अभी 16 मई से 13 जून तक के तिथि ला अधिक मास के संज्ञा दिये गै हावय जेला हिन्दू मन पुरूषोत्तम महिना के नाम से मनावत हावय त इस्लाम धर्म में एला रमजान के पवित्र महिना के नाम से मनाए जात हावय। ईस्लाम धर्म के 5 आधार स्तंभ कहे जाथे-ईमान, नमाज, रोजा, हज अउ जकात जेखर ये महीना में पालन करना अनिवार्य होथे वइसने हिन्दु धर्म म घलाव ईश्वर के उपर पूर्ण विश्वास, धर्म ग्रन्थ के पाठ, उपवास, तीर्थ यात्रा अउ दान के ये महिना म विशेष महत्तम हावय। ईमान के बिना धरम अउ धरम के बिना ईमान के कल्पना घलाव नई करे जा सकय। ईमान अउ धरम दूनो एक दूसर के बिना अधूरा हावय। चाहे गीता होय चाहे कुरान चाहे गुरूगं्रथ साहिब होय कि बाईबिल, हर धर्मग्रंथ जीव के उपर दया करे के ही पाठ सिखाथे जेखर पठन-पाठन अउ सही जानकारी होय ले आदमी सोझ रद्दा म रेंगथे अउ अगर कोनो कारनवश रद्दा भटक भी जाथे तउन हर सोझ रद्दा म आ जाथे। रोजा अउ उपवास दूनों हमनला आत्मसंयम के संगे-संग यही सिखाथे कि कुछ दिन तो कुछ समय के लिये भूख अउ प्यास के अनुभव करे जाय जेखर से हमनला दूसर के भूख अउ प्यास के पीरा के अहसास हो सकय अउ हमन ओखर अंतस के दुख अउ पीरा ला पहिचान के दुरिहा कर सकन। तीर्थयात्रा अउ हज दूनो अपन-अपन आराध्य से मिले के ही रद्दा देखाथे। जकात अउ दान दूनो यही सिखाथे कि पात्र व्यक्ति ला ही यथाशक्ति दान दिये जाय। हमर भारत भुइंया में जब तक बिहनिया अउ संझा मंदिर, मस्जिद गुरूद्वारा अउ गिरिजाघर के घंटी, घंटा, मंत्रोच्चार अउ अजान के सुर नई सुनावय तब तक हमन ला नई लागय कि हमन भारत देस के रहवासी हरन। हमर एकता अउ अखंडता ला जउन भी खंडित करे के कोशिस करही वो हर खुदे खंडित हो जाही हमर भारत भुइंया ला अइसे वरदान मिले हावय। सियान बिना धियान नई होवय तभे तो उॅखर सीख ला गठिया के धरे म ही भलाई हावय। सियान मन के सीख ला माने म ही भलाई हावय।

रश्मि रामेश्वर गुप्ता बिलासपुर

सियान मन के सीख

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