बिलासपुर

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सिम्स को जांच में नहीं मिले गड़बड़ी वाले छात्र

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में मेडिकल प्रवेश के लिए गड़बड़ी करने वाले छात्र नहीं मिले। इसकी रिपोर्ट...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 03:15 AM IST
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में मेडिकल प्रवेश के लिए गड़बड़ी करने वाले छात्र नहीं मिले। इसकी रिपोर्ट बनाकर डीएमई को भेज दी गई है। डीएमई ए चंद्राकर का कहना है कि उन्होंने रिपोर्ट पढ़ ली है। बिलासपुर से उन्हें कोई गफलत नहीं मिली।

दैनिक भास्कर ने खबर में बताया था कि मेडिकल में प्रवेश के लिए छात्र गलत रास्ता अपना रहे हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ के छह डीन को नोटिस भेजा गया है। उन्होंने हर उन संदिग्ध छात्रों की जानकारी मांगी है, जिन्होंने गलत तरीके से खुद को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का निवासी बताकर एडमिशन लिया है। उनके मुताबिक नोटिस में साफ तौर लिखा गया है कि इसके लिए वे स्थानीय एसडीएम से छात्रों की नागरिकता का वेरीफिकेशन करें ताकि गलत रास्ता अपनाकर एडमिशन लेने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। मामले में 17 छात्रों के रोल नंबर सहित एमपी और सीजी रैंक खुलासा किया है। खबर में बताया गया कि मध्यप्रदेश के याचिकाकर्ता ने ये सूची हाईकोर्ट में लगाई। इसी आधार पर कोर्ट ने वहां के मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को काउंसिलिंग दोबारा कर एडमिशन कराने के निर्देश दिए। जबकि यहां कॉलेज प्रबंधन, राज्यपाल सहित दूसरे स्थानों पर शिकायत के बाद इसकी गतिविधि शून्य है। हालांकि मामले में खुलासे के बाद डीएमई डॉ एके चंद्राकर ने रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़ सहित अन्य स्थानों पर डोमिसाइल छात्रों की जानकारी इकट्‌ठा करने की बात कही है। उनका कहना है कि ये सरासर गलत और ऐसे लोगों को तत्काल मेडिकल कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखाकर विधिवत कार्रवाई करवाएंगे। इधर, प्रबंधन के अफसरों ने फिलहाल की जांच की कोशिशें शुरू नहीं की है। इसलिए उन लोगों के हौसले बुलंद हैं, जिन्होंने गड़बड़ी की है। मध्यप्रदेश में भी इसके कुछ मामले पकड़ाए हैं। दावा किया जा रहा है कि वहां भी छत्तीसगढ़ के छह छात्रों ने गलत तरीके से एडमिशन लिया है। वहां इसकी जांच शुरू हो चुकी है। बिलासपुर से सिम्स ने इसकी रिपोर्ट भेज दी है। यहां ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले भी दूसरे राज्यों में ऐसी गड़बड़ी का खुलासा हो चुका है। वहीं से बिलासपुर में ये मामला सामने आया था। तब से अफसरों की भूमिका संदेह में थी।

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