टेक्नीकल स्टाफ नहीं इसलिए ब्लड बैंक में खून देने पर तीसरे दिन मिलता है वापस, इमरजेंसी में दिक्कत

Champa News - भास्कर न्यूज । जांजगीर चांपा शुरू होने के तीन साल बाद भी जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक की व्यवस्था नहीं...

Jun 14, 2019, 07:00 AM IST
Janjgeer News - chhattisgarh news do not have technical staff blood donation gives blood on the third day trouble in emergency
भास्कर न्यूज । जांजगीर चांपा

शुरू होने के तीन साल बाद भी जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक की व्यवस्था नहीं सुधर पाई है। इतने सालाें में पर्याप्त स्टाफ की भर्ती हो पाई है। जिसके कारणा ब्लड डोनेट करने वालों का समय पर टेस्ट भी नहीं हो पाता।

ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टोरेज क्षमता होने के बाद भी मात्र 13 यूनिट ही ब्लड गुरुवार को बैंक में था। जबकि औसतन 20 से अधिक यूनिट ब्लड की आवश्यकता रोज जिला अस्पताल में ही पड़ती है। ऐसा नहीं है कि ब्लड देने वाले नहीं है, डोनर तैयार रहते हैं, लेकिन स्टोरेज की क्षमता नहीं होने के कारण ब्लड रखा नहीं जा सकता। अप्रैल 2016 से जिला अस्पताल में ब्लड बैंक संचालित हो रहा। ब्लड बैंक आपातकालीन सेवा है, 24x7 चलना चाहिए, किंतु इतने वर्षों बाद भी यहां न तो पर्याप्त टेक्नीशियन हैं और न ही दूसरे स्टॉफ। एक डॉक्टर हैं वह भी फर्स्ट हाफ में ही ब्लड बैंक में रहते हैं। लंच के बाद पूरी व्यवस्था अन्य स्टॉफ के भरोसे रहती है, इसलिए जो लोग ब्लड की जांच कराते हैं, उन्हें भी रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन का इंतजार करना पड़ता है। फिलहाल स्थिति ऐसी है कि ब्लड डोनेट करने के बाद बैंक से ब्लड लेने के लिए कम से कम दो दिन इंतजार करना पड़ता है, इसकी एक वजह एलाइजा टेस्ट को भी बताया जा रहा है। ब्लड बैंक में ब्लड टेस्ट से लेकर स्टोरेज के लिए आधुनिक मशीन तो है लेकिन उन्हें ऑपरेट करने के लिए टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हुई है। यहां जिला अस्पताल और नवागढ़ सीएचसी के साथ बीडीएम अस्पताल के टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ को अटैच किया गया है।

विपक्ष में आए तो याद आई- जब जिले में ब्लड बैंक खुला तब भाजपा की सरकार थी, करीब ढ़ाई साल उनकी सरकार रही। ब्लड बैंक में जाे समस्या अभी है वह समस्या तब भी थी, लेकिन तब न कांग्रेस के किसी संगठन ने इस ओर ध्यान दिया और न ही भाजपा के अनुषांगिक संगठन के पदाधिकारियों ने ही स्वास्थ्य मंत्री या मुख्यमंत्री को अवगत कराया। विपक्ष में आने के बाद अब भाजयुमो के पदाधिकारी विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। गुरुवार को भाजयुमो जिलाध्यक्ष राजू महंत के नेतृत्व में महामंत्री जितेंद्र देवांगन, शिवचमन सिंह, दिनेश राठौर, अमन प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में भाजयुमो नेता सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे। भाजयुमो नेताओं ने सीएमएचओ डॉ. वीके अग्रवाल को ब्लड बैंक की समस्या का समाधान करने के लिए चेतावनी दी।

भाजयुमो जिलाध्यक्ष राजू महंत ने बताया कि ब्लड देने वालों की कमी नहीं है, लेकिन अस्पताल के ब्लड बैंक में व्यवस्था नहीं होने के कारण ब्लड भी नहीं लिया जाता है।

सरकार रहते कभी नहीं दिया ध्यान, गुरुवार को भाजयुमो ने किया घेराव

सीएमएचओ से चर्चा करते भाजयुमो पदाधिकारी।

सीएमएचओ ने स्वीकार किया अव्यवस्था है

दो माह तक जनरेटर खराब अब शुरू भी हुआ तो भी समस्या

ब्लड बैंक का जनरेटर दो माह से बंद था, जिसे हाल में सुधारा गया है। फिर भी जनरेटर में ऑटोकट की सुविधा नहीं होने के कारण बिजली बंद होते ही ब्लड बैंक में अंधेरा छा जाता है, क्योंकि ब्लड बैंक की बिजली का कनेक्शन नीच फ्लोर में है। बिजली बंद होने पर फिर से चालू करने के लिए नीचे जाना पड़ता है। बुधवार की शाम को ब्लड बैंक का बंद होने पर परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि उस समय ब्लड बैंक में केवल एक महिला स्टॉफ थी। डोनर्स रिफ्रेशमेंट के लिए बने कक्ष का एसी साल भर से बंद है जिसे सुधारने के लिए भी विभागीय अधिकारियों का मुंह ताकना पड़ रहा है।

सीएमएचओ डॉ. व्हीके अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ब्लड बैंक के साथ जिले के अस्पताल मे स्टाफ की कमी और मूलभूत सुविधाओं की कमी है। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक में स्टाफ की कमी और टेक्निशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर के साथ अन्य कमियों को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।

टेस्ट में लग रहा समय इसलिए समय पर नहीं मिलता ब्लड

पांच तरह की टेस्टिंग में सही पाए जाने पर ही खून काम में आता है। ब्लड बैंक से रिप्लेसमेंट में ही ब्लड मिलता है, इसलिए कोई खून देना भी चाहे तो सीधा नहीं लिया जा सकता। इसके लिए डोनर का काउंसलिंग करना जिसमे उसकी मनोदशा, किसी बीमारी से ग्रसित तो नहीं उसका परीक्षण, नशे का आदी तो नही उसकी जानकारी और उसके अंदर खून देने की क्षमता है या नही उसका परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद इलेक्ट्रानिक मशीन से ब्लड लेकर एलाईजा टेस्ट किया जाता है जिसमे एचबीएसएजी, एचसीव्ही, व्हीडीआरएल, मलेरिया जैसे टेस्ट किया जाता है।

एलाइजा टेस्ट में लगभग 6 घंटे से अधिक समय लग जाता है और एक टेक्नीशियन होने के कारण बहुत समस्या होती है। इसलिए उसी दिन खून नहीं मिल पाता है।

ब्लड बैंक कक्ष की एसी खराब

काम तीन शिफ्ट में करना है, स्टॉफ नहीं इसलिए रात में नहीं मिलता ब्लड

ब्लड बैक में 24 घंटे काम करने के लिए 3 शिफ्ट में स्टॉफ की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए, इसके लिए 6 टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टॉफ की जरूरत है। वहीं डोनर की काउंसिलिंग के लिए डॉक्टर की अनिवार्यता के बाद भी किसी डाॅक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है। ब्लड निकालते समय मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए डाॅक्टर की उपस्थिति अनिवार्य होने के बावजूद डाॅक्टर या नर्स उपस्थित नहीं रहते। इन परिस्थितियों की जानकारी अधिकारियों को है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।

आज लगेगा ब्लड डोनेट कैम्प

ब्ल़़ड डोनेट दिवस पर शुक्रवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक मे कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। सीएमएचओ के निर्देश पर ब्लड बैंक के टेक्नीशियन ब्लड डोनेट कैम्प लगाने की तैयारी पूरी कर ली है और इसमें स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागों से ब्लड डोनेट में हिस्सा लेने काे कहा है।

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