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आज शाम 7.52 बजे सूर्य मकर राशि में करेंगे प्रवेश

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 02:40 AM IST

Champa News - भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा परंपरा के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती है, लेकिन 2012 और 2016 के बाद इस बार भी 15...

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भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

परंपरा के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती है, लेकिन 2012 और 2016 के बाद इस बार भी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। वैदिक ज्योतिष में संक्रांति का अर्थ ही सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना है।

जब सूर्य चक्र के दौरान धनु राशि से मकर राशि या दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 52 मिनट से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस कारण कई श्रद्धालु 15 जनवरी को भी संक्रांति मनाएंगे

सूर्य ग्रह 14 की शाम करीब 7.52 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, उदयातिथि का विशेष महत्व 15 जनवरी तक

दोनों दिन दान-पुण्य स्नान का लाभ

ज्योतिषी राघवेंद्र पांडेय ने बताया कि मकर संक्रांति का इस बार पुण्यकाल 15 जनवरी को 11.52 बजे तक है। नवग्रहों में बलशाली सूर्य ग्रह 14 जनवरी की शाम को करीब 7.52 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ ही मकर संक्रांति आरंभ होगी। इसके कारण लोग दोनों दिन ही दान-पुण्य और स्नान कर सकेंगे। पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर 14 जनवरी से मकर संक्रांति शुरू होगी, लेकिन उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण स्नान और दान 15 जनवरी के ब्रह्ममुहूर्त से हो सकेंगे। चूंकि सूर्य धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस संक्रांति का विशेष महत्व है।

तिल लड्डू व तिलकुट की डिमांड

इस दिन तिल से बनी लड्ड् और तिलकुट खाने की परंपरा है। तिलकुट और तिल लड्डुओं की मिठास के बिना यह पर्व कुछ भी नहीं, पर इस वर्ष तिल और गुड़ के दामों में आई तेजी का असर पर्व पर भी पड़ सकता है। इन चीजों की कीमतों का असर उनसे बनने वाली मिठाइयों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि इस बार मकर संक्रांति की तिल वाली लड्डू की मिठास महंगी होगी।

धार्मिक मान्यता. पौष माह में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो सूर्य उत्तरायण होता है और सभी शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।
मकर संक्रांति में सिंह होगा वाहन

इस बार संक्रांति का वाहन सिंह होगा। जबकि उपवाहन गज यानी हाथी होगा। उत्तर दिशा में गमन, दक्षिण दिशा में आगमन बताया जाता है। इस दिन तिल, लड्‌डू, खिचड़ी, मुद्रा व धार्मिक पुस्तकों का दान करने से फल मिलेगा। गंगा, नर्मदा, गोदावरी नदियों में स्नान करने व सूर्य को अर्घ्य देने से शुभ फल मिलेंगे। संक्रांति का नाम ध्वांक्षी होगा, क्योंकि उत्तरायण की शुरुआत सोमवार से हो, तो यही नाम देते हैं।

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