जेल में नहीं ईसीजी व लैब सुविधा, जांच कराने दो दर्जन बंदियों को एक साथ भेजा अस्पताल

Champa News - भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 02:25 AM IST
Janjgeer News - chhattisgarh news two dozen detainees were sent together to check the ecg and lab facilities in the jail
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वहां जांच की वह सुविधा नहीं है जो होनी चाहिए। यहां विभिन्न प्रकार की बीमारी से बंदी परेशान हैं। शनिवार को ऐसे दो दर्जन बंदियों को जांच कराने के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जिन्हें विभिन्न प्रकार की जांच करानी थी।

जेल में बंदियों की जांच के लिए वैसे तो एक डॉक्टर इकबाल हुसैन और एक फार्मासिस्ट पदस्थ किया गया है, लेकिन वहां बंदियों की जांच करने के लिए सुविधा नहीं होने से सभी बंदियों को जिला अस्पताल जांच के लिए ले जाया जाता है। बंदियों को इलाज के लिए ले जाने के लिए बल की आवश्यकता पड़ती है। पिछले कई दिनों से डॉक्टर ने वहां के बंदियों की जांच करते हुए उन्हें जिला अस्पताल से चेकअप कराने की सलाह दी थी। जिला जेल में ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट प्रॉब्लम, सर्दी, बुखार सहित विभिन्न प्रकार के नशे के आदी लोग बंद हैं। उनका रूटीन चेक अप भी जरूरी है। चेक अप नहीं होने पर अप्रत्याशित घटना की आशंका भी बनी रहती है।

एक साथ इतनी संख्या में बंदी अस्पताल पहुंचे तो जेल में बीमारी की अफवाह फैल गई

इन बंदियों को जांच के लिए ले जाया गया था. नीरज राठौर, भोलाराम, शत्रुहन प्रसाद, रामकृपाल, उत्तम प्रसाद, मनोज कुमार, राजकुमार, तुलेश्वर प्रसाद, अमरजीत, राम लाल, कुलमणि प्रसाद, शिव प्रसाद गुप्ता, प्यारे लाल, तेरस राम, सुनील गुप्ता, घासीराम, कमलदास, अनुराग , कृपाल सिंह, गोविंद प्रसाद, जीवन लाल।

हार्ट अटैक से हो चुकी है दो माह पहले एक बंदी की मौत

जिला अस्पताल में इलाज व नियमित जांच नहीं होने से एक विचाराधीन बंदी गौरव तंबोली की मौत हो चुकी है। गौरव ने नियमित चेक अप के दौरान सीने में दर्द होने की शिकायत की थी, पर वहां ईसीजी सहित अन्य जांच की सुविधा नहीं होने के कारण उसके हार्ट की जांच नहीं की जा सकी। उसने अपने बैरक सहित अन्य बंदियों से अपने सीने में दर्द की शिकायत कई बार की थी, लेकिन शाम तक उसके सीने के दर्द का इलाज नहीं हो सका। केवल गैस की समस्या समझी जाती रही। बाद में उसकी जेल में ही मौत हो गई थी। इससे पहले एक और युवक की मौत नवंबर में हो चुकी है।

बंदी पहुंचे तो लगा जेल में बीमारी फैल गई

शनिवार को एेसे दो दर्जन मरीजों को लेकर जिला जेल से स्टॉफ और पुलिस वाले जिला अस्पताल पहुंच गए। वहां बंदियों को इतनी अधिक संख्या में देखकर यह हल्ला होने लगा कि जिला जेल में बंदियों को उल्टी, दस्त व अन्य बीमारी फैल गई है। इस अफवाह से जेल प्रबंधन ने इनकार किया और कहा बंदियों के किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं हुई है।

डीजे की टीम ने खाना पर जताई थी नाराजगी

पिछले दिनों रिव्यू ट्रिब्यूनल की टीम डीजे राजेश श्रीवास्तव, एसपी पारुल माथुर और सीजेएम तथा जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव उदय लक्ष्मी सिंह परमार ने जिला जेल का निरीक्षण किया था। तब बंदियों को दिया जाने वाला खान सही नहीं मिला था। इस पर नाराजगी जताते हुए टीम ने व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए थे।

रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर ने लिखा था


बीपी, शुगर के अलावा कुछ नशा के भी आदी


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