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जंगल में लगी आग से लोगों में रही दहशत, बुझाने नहीं पहुंचे वन कर्मी

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:15 AM IST

Chirmiri News - पोड़ी हल्दीबाड़ी मार्ग के जंगल में शनिवार दोपहर 1.30 बजे आग लग गई। जंगल में लगी आग सड़क के किनारे तक फैल गई। आग की लपटों का...

जंगल में लगी आग से लोगों में रही दहशत, बुझाने नहीं पहुंचे वन कर्मी
पोड़ी हल्दीबाड़ी मार्ग के जंगल में शनिवार दोपहर 1.30 बजे आग लग गई। जंगल में लगी आग सड़क के किनारे तक फैल गई। आग की लपटों का एहसास सड़क से निकलने वाले लोगों को भी हो रहा था, तेज हवा चलने से आग और धुंआ काफी बढ़ गया था, धुंए को देखकर कई बाइक सवार तो वापस घुम गए, लगभग आधे घंटे बाद घुंआ कुछ कम हुआ, तब इस सड़क से लोगों का आना जाना शुरु हुआ।

आसपास के लोगों ने बताया कि ऐसी आशंका है कि महुआ चुनने वालो के द्वारा जंगल के कचरे और पत्तांे को साफ करने के लिए आग लगाई गई, जो हवा से बढ़ गई। धुंए की तेज लपटे दूर-दूर तक दिखाई पड़ रही थी। कई एकड़ भूमि में आगजनी हुई। आग लगने से वन संपदा को काफी नुकसान हुआ। इससे जंगल के बंदरो में हड़कंप मच गया, जंगल के पक्षी कौवें, मैना, गौरैया इधर-उधर उड़ कर चिखने लगे। इससे जंगली घास व पौधे भी जल गए। बड़ी संख्या में पेड़-पौधो को भी नुकसान हुआ। शाम तक यहां आग की तपन बनी रही, लेकिन इसे बुझाने कोई नहीं पहंुचा। गौरतलब है कि चिरमिरी के जंगलो में कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं हो रही है। लेकिन इनकी सुरक्षा जिनके जिम्मे है, वही इससे बेखबर रहते है। जंगल में सबसे अधिक सरई, सागौन, महुआ, तेंदू, यूकेलिप्टस के पेड़ है जिन्हेें नुकसान होता है।

आग लगे तो इन्हंे दे सूचना - राय सिंह मार्को, रेंजर चिरमिरी, मो.9669534411

हल्दीवाड़ी के जंगल में फैली आग के कारण छोटे पौधे पूरी तरह से नष्ट हो गए, वहीं बड़े पेड़ों के तने और पत्ते भी झु़लस गए।

विभाग के अफसरों के नंबर भी नहीं लिखे

लोगों ने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों का नंबर भी कही नहीं लिखा गया है, जिससे वह इसकी जानकारी उन तक पहंुचा सकें। विभाग की लापरवाही के चलते आए दिन महुआ चुनने वाले स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा जंगलो में आगजनी की जाती है।

आग से घर की बाड़ी भी जली

वार्ड नंबर 6, 96 कालोनी के पास पहाड़ों के तराई में लगाई गई आग फैलने से एक घर की बाड़ी भी जल गई। ग्रामीण आग बुझाने की कोशिशे करते रहंे, लेकिन मौके पर कोई भी अधिकारी या वन कर्मी नहीं पहंुचे। साजाडोल के पास जंगलांे में लगाई गई आग के भी बस्ती तक पहंुचने की जानकारी मिली। जगह-जगह जंगलो में हो रही आगजनी से वन प्राणियों के सामने मुश्बित आन पड़ी है। जिस कारण वह भी जंगलो को छोड़ पलायन कर रहें। वन संपदा को नुकसान करने के कारण ही खाने की तलाश में वन प्राणी शहरों का रुख ले रहें है।

महुआ बीनने वाले लगाते देते हैं आग

वन विभााग का कहना है कि महुआ चुनने वालो के साथ तेंदू पत्ता तोड़ने वाले लोग जंगल में आग लगा देते हैं ताकि गर्मी के कारण तेंदू पत्ता अच्छा पके। कुछ बरसात में अच्छी मशरुम मिले इसलिए भी आगजनी करते है। सूचना मिलने पर कार्रवाई होती है।

जंगल की आग से बंदरों पर भी संकट

जंगल में वन्य प्राणी हैं। इसके साथ ही चिरमिरी के जंगलों में सर्वाधिक संख्या बंदरों की है। आग और धंुए से बचने इधर-उधर भागने लगते है। जिससे रहवासी इलाको में जाकर वे आतंक मचाते है। धुंए और आग की तपन से फल फूलों को भी नुकसान होता है।



कर्मचारी भी नहीं रहते जंगल में तैनात

जंगल में अाग लगने की सूचना समय पर वन विभाग के जिम्मेदारों के पास नहीं पहुंच पाती है। इसका कारण वन विभाग के कर्मचारी भी जंगलों में नहीं रहते हैं। वे भी शहर में घूमते रहते हैं। जिसके चलते आग विकराल रूप ले लेती है और पेड़ जल जाते हैं।

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