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चूल्हा चौका के बाद अब कपड़ा बुनकर कमाएंगी मुनाफा

Dallirajhara News - भास्कर न्यूज | बालोद/ दल्लीराजहरा आज हम महिलाओं में सामूहिकता की भावना के बारे में बताएंगे। जो अपने परिवार की...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:25 AM IST
चूल्हा चौका के बाद अब कपड़ा बुनकर कमाएंगी मुनाफा
भास्कर न्यूज | बालोद/ दल्लीराजहरा

आज हम महिलाओं में सामूहिकता की भावना के बारे में बताएंगे। जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक होकर कपड़ा बुनाई का काम कर रही हैं।

बात हो रही है दल्लीराजहरा की महिला हाथकरघा सहकारी समिति की। जिनके सदस्यों ने स्वयं के खर्च से 11800 रुपए प्रति मशीन की लागत से 20 मशीने डोंगरगांव ब्लाक के ग्राम रामाटोला से खरीदी है। दो माह पहले सभी बेरोजगार थीं। सभी की सोच थी कि वे अपने पति या पिता को खुद काम कर परिवार चलाने में आर्थिक मदद करे। उनके पति रोजी मजदूरी, कुली मिस्त्री, ड्राइवरी के काम करते हैं। शहीद अस्पताल के डॉ शैवाल जाना ने बताया कि दो माह पहले सुदामा नगर की 10 महिलाएं खाना बनाने काम की तलाश में उनके पास आई थी।

कीर्ति साहू

प्रिया निर्मलकर

परिवार चलाने पति की करेगी मदद, महिलाओं ने अपने खर्चे से खरीदी 20 हथकरघा मशीन, दो महीने पहले ढूंढ रही थी खाना बनाने का काम

खुद के खर्च से खरीदी मशीनों से कपड़ा बुनाई की ट्रेनिंग लेती महिलाएं।

राज्य शासन से अनुदान लिए बगैर खरीदी मशीन

सहकारी संघ के अध्यक्ष झुनमुन गुप्ता ने बताया कि राजहरा की यह समिति राज्य में एक मिसाल हैं। अनुदान योजना का लाभ लेने के लिए शासन का रास्ता नहीं देखा। बल्कि अपने दम पर मशीन खरीदकर काम कर रही हैं। ऐसा करने वाली राज्य में यह पहली समिति हैं। शासन से राज्य हथकरघा विभाग के जरिए 6.80 लाख रुपए से नवीन बुनाई प्रशिक्षण योजना का लाभ दिया जाता है। जिसमें समिति में जुड़े 20 सदस्यों को हथकरघा मशीन, 1500 रुपए प्रति माह भत्ता के साथ भवन दिलाकर चार महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। पर शासन से स्वीकृति कब मिलेगी, गारंटी नहीं रहती।

महिलाएं तैयार हुई तो संस्था भी आई मदद के लिए

महिलाएं स्वरोजगार स्थापित करने बुनकर काम करने तैयार हुई तो कई लोग उनकी नि:शुल्क मदद के लिए आगे आ गए। जिला सहकारी संघ ने दो प्रशिक्षक दिया। जन मुक्ति मोर्चा ने ट्रेनिंग के लिए भवन दिया है। हथकरघा विभाग ने धागा दिया है। समिति में 20 सदस्य हैं, पर वे अन्य 32 महिलाओं को भी साथ में बुनाई सीखा रहीं हैं। जो ट्रेनिंग के बाद मशीन खरीदेंगी।

एक मीटर कपड़ा बुनाई पर मिलेगा 27.50 रुपए

ट्रेनिंग के बाद महिलाएं अपने घर पर मशीन से कपड़ा बुनेगी। हथकरघा विभाग धागा देगा। बदले में उनसे बुने हुए कपड़े को राज्य हथकरघा विकास विपणन संघ खरीदेगा। प्रति मीटर कपड़ा बुनाई पर 27.50 रुपए मिलेगा। दिनभर में आठ घंटे भी बुनाई करती हैं तो 400 से 500 रुपए का कपड़ा बना सकती है।

अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी, बनीं मैनेजर

समिति की मैनेजर (सचिव) कीर्ति साहू ने कहा मैं अभी बीए फाइनल की छात्रा हूं। माता पिता पर बोझ नहीं बनू, अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं। ये सोचकर समिति में जुड़ी। मशीन खरीदने पैसे माता पिता ने ही दिए। अध्यक्ष प्रिया निर्मलकर ने कहा पति ड्राइवर हैं। अकेले की कमाई से परिवार चल रहा था। अब मैं भी काम करूंगी।

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