दल्लीराजहारा

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जामकुंआ तालाब में गंदगी, सफाई पर ध्यान नहीं, निस्तारी की समस्या

तीन दशक पहले झरनों की नगरी कहलाने वाली लौह नगरी अब सिर्फ दल्लीराजहरा के नाम से जाना जाने लगा है। किसी समय में नगर के...

Danik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:30 AM IST
तीन दशक पहले झरनों की नगरी कहलाने वाली लौह नगरी अब सिर्फ दल्लीराजहरा के नाम से जाना जाने लगा है। किसी समय में नगर के लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले जामकुंआ अनदेखी और बदहाली पर आंसू बहा रहा हैं। यही गर्मी में पानी की जरूरतों को पूरा करता था। लेकिन अब इनकी ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है। नगर के पुराना बाजार, शिकारी बाबा, झरन मंदिर स्थित विभिन्न झरने अब माइंस के पहाड़ियों से बहकर आने वाली लाल मिट्टी से दबकर अपने अस्तित्व खो रहे हैं।

नगर के वार्ड 5 शिकारी बाबा तालाब से 50 मीटर की दूरी पर शीतला मंदिर के पास जामकुंआ तालाब गंदगी से पटता जा रहा है। तालाब के पटने की मुख्य वजह सफाई नहीं किया जाना है। वार्ड 2 निवासी जीधन निर्मलकर, वार्ड के 5 रंजन महार, जीवन साहू, शिव, जनार्दन, अलकहीन बाई, अगस्ता, गायत्री, देवली बाई एवं चंपा बाई ने बताया कि जामकुंआ तालाब प्राकृतिक जल स्रोत है।

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