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फसल को कीटों से बचाने खेतों में गड़ाई टहनी

नगर सहित आसपास के कोटागांव, कुमुड़कट्टा, नलकसा, महामाया, आड़ेझर, खैरवाही, कुसुमकसा, गैंजी, गुजरा, गिधाली, धुरूवाटोला,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 12, 2018, 02:11 AM IST

फसल को कीटों से बचाने खेतों में गड़ाई टहनी
नगर सहित आसपास के कोटागांव, कुमुड़कट्टा, नलकसा, महामाया, आड़ेझर, खैरवाही, कुसुमकसा, गैंजी, गुजरा, गिधाली, धुरूवाटोला, धोबनी, कुरूभाठ, पुत्तरवही, चिखलाकसा व बकरीटोला में त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। किसान खेती का काम बंद कर त्योहार का आनंद लिया।

चिखलाकसा के किसान प्रदीप गंगबोईर ने बताया कि हरेली अमावस्या के दिन गांव का राउत अथवा नाई घर-घर जाकर नीम की टहनियां लगाई। कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर पूजा की और अच्छी फसल की कामना की। खेतों में कर्रा व भेलवा टहनी भी गड़ाई गई है। इसके पीछे मान्यता है कि इन टहनियों को हरेली के दिन गड़ाने से खेतों में धान के फसल पर कीट, पतंगों का प्रकोप नहीं होता।

रात में घरों के सामने अंडा के पत्ते लगाए जाते हैं व दरवाजे सामने टोटका के रूप में राखड़ की लकीर खींची जाती है। वहीं घरों में गुलगुला भजिया, मीठा चीला बनाकर इसका भोग लगाया गया है। पशुओं को गेंहू आटे के बनी लोई खिलाया गया। हरेली पर गांवों में बच्चों ने गेंड़ी चलाया। कई गांवों में गेड़ी दौड़ व नारियल फेंक प्रतियोगिता भी हुई। हरेली त्योहार के दिन राउत समाज के लोगों द्वारा सवेरे से ही घर-घर जाकर घर के दरवाजे के सामने नीम की टहनियां लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दी। साथ ही इसके बदले उन्हें दक्षिणा के तौर पर चावल ,दाल, आलू-प्याज इत्यादि सामान को एक सुपा में रख दिया गया। प्रचार प्रसार प्रमुख सोनऊ राम बेलेन्द्र ने बताया कि आज ही हरियाली सप्ताह का समापन किया गया।

दल्लीराजहरा. चिखलाकसा के बच्चे गेड़ी का आनंद लेते हुए किसान।

स्कूल में लगाए पौधे

सरस्वती शिशु मंदिर दल्लीराजहरा में हरेली पर शिक्षकों ने एक-एक पौधा लगाया। शिक्षिका खेमीन साहू ने बताया कि सावन में हरियाली की चादर ओढ़े हमारी धरती किसी दुल्हन से कम नजर नहीं आती। इस हरियाली से धरती का श्रृंगार देखते ही बनता है। जिसे हमेश के लिए बरकरार रखना है। हमें इनका ख्याल हमेशा रखना चाहिए।

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