--Advertisement--

गार्डन में झूला झूलकर बचपन की याद ताजा की

Dallirajhara News - एक समय था जब सावन शुरू होते ही घर के आंगन में लगे पेड़ पर झूले पड़ जाते थे और महिलाएं गीतों के साथ उसका आनंद लेती थीं।...

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2018, 02:11 AM IST
गार्डन में झूला झूलकर बचपन की याद ताजा की
एक समय था जब सावन शुरू होते ही घर के आंगन में लगे पेड़ पर झूले पड़ जाते थे और महिलाएं गीतों के साथ उसका आनंद लेती थीं। समय के साथ पेड़ गायब होते गए और आंगन का अस्तित्व कम होता गया। ऐसे में सावन के झूले की परम्परा भी सिमट गई है। इसी परंपरा को जिंदा रखने सर्वसमाज समरसता महिला समिति ने बुधवार दोपहर 3 बजे गायत्री मंदिर उद्यान में सावन मिलन समारोह मनाया।

सावन गीत, लोकगीत, अंताक्षरी, झूला, चेहरा बनाओ, लकी डायस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। साथ ही सावन से जुड़ी लोक मान्यताआें पर चर्चा की। प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाली 6 महिलाएं आशा साहू, साक्षी खटवानी, रेणुका, रेखा साहू, पुरोबी वर्मा, कुसुम ध्रुव को सर्वसमाज महिला समरसता समिति सदस्‍य गीतांज‍ली धंडाले व नंदा पशीने ने पुर‍स्कार दिया। पूर्व नपा अध्यक्ष पुरोबी वर्मा ने कहा कि सावन में नविवाहित बहू-बेटियों की टोलियां अब कही भी झूलती नजर नहीं आती है। अब तो तीज-त्योहार में ही औपचारिकता निभाते हैं। तीज-त्योहार हमें जोड़े रखते हैं। हमारे जीवन में उत्साह, उल्लास, प्रसन्नता, भाईचारे को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि यदि हमारी समृद्धि संस्कृति के प्रतीक ये तीज-त्योहार और लोकगीत लुप्त हो गए तो हम अपनी भावी पीढ़ी को क्या सौपेंगे।

सर्वसमाज समरसता समिति की महिलाओं ने गायत्री गार्डन में परंपरा को जिंदा रखने के लिए किया आयोजन

दल्लीराजहरा. झूले का आनंद लेती समरसता समिति की महिलाएं।

अब झूला लगाने जगह की तलाश करनी पड़ती है

भाजपा जिला उपाध्यक्ष सत्या साहू व वीना साहू ने कहा कि शहरों में जगह की कमी ने परंपरा के निर्वाह में बाधा खड़ी कर दी है। अब झूले लगाने के लिए जगह की तलाश करनी पड़ती है। पहले संयुक्त परिवार में बड़े-बूढ़ों के साथ जुड़ते थे। एकल परिवार में आपसी स्नेह को खत्म कर दिया है। भौतिकवाद ने एक-दूसरे के प्रति लगाव भी खत्म कर दिया है। लॉन में लोहे व बांस के झूले लगा लिए और हो गया परंपरा का निर्वाह। अब तो पहनावा भी आधुनिकीकरण की भेंट चढ़ गया है। जिसे देखते हुए सप्‍तगिरी पार्क में सामूहिक रूप से सावन झूला झूलने के लिए महिलाएं पहुंची हैं।

हरियाली को बनाए रखने की मिलती है प्रेरणा

वासंती नारडे व द्रोपती साहू ने कहा कि सावन प्रकृति श्रृंगार करती है जो मन को मोहने वाला होता है। यह मौसम ऐसा होता है कि मन भी झूमने लगता है। गीतांजली धंडाले ने कहा कि संस्कृति व परंपरा की ही देन है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के गांव और कस्बों में लोग झूला झूलते हैं। विशेषकर महिलाएं और युवतियां झूला झूलना पंसद करती है। इस दौरान भारती भगत साक्षी खटवानी, सविता वर्मा, रेणुका गंजीर, नन्दा पशीने, रीतू चंद्राकर, गीतांजली धनडाले, संगीता देवांगन, नविता देवांगन, सीमा गुप्ता, शीला वर्मा, कुसुम ध्रुव, देवलीन पारकर, रामेश्वरी कैवर्थ उपस्थित थी।

X
गार्डन में झूला झूलकर बचपन की याद ताजा की
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..