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जवानों ने 3 साल में 29 नक्सलियों को मार गिराया, 67 ईनामी को किया अरेस्ट; 31 ईनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर मगर अफसोस सवा 3 करोड़ की ईनामी राशि में एक रु. भी नहीं मिला

याद है ना यह तस्वीर जब तिमेनार मुठभेड़ के बाद जवान ऐसे नक्सलियों के शव लाए थे

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 02:38 PM IST
Soldiers didnt get their Prize Money even after Huge achivement in Dantewada Chhattisgarh

अंबु शर्मा-दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़). पुलिस ने बीते तीन साल में एनकाउंटर में 29 नक्सलियों को मार गिराया, 67 ईनामी नक्सलियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया और छत्तीसगढ़ सरकार की ईनामी पॉलिसी से प्रभावित होकर 31 ईनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। लेकिन विडंबना यह है कि 3 साल की इस बड़ी उपलब्धि की सवा तीन करोड़ की ईनामी राशि अब तक जवानों व सरेंडर नक्सलियों को नहीं मिल पाई है। इनमें गिरफ्तार ईनामी नक्सलियों के 1 करोड़ 05 लाख रु., मारे गए नक्सलियों के 1 करोड़ 06 लाख रु. और सरेंडर नक्सलियों के 1 करोड़ 14 लाख रु. अब तक अटके पड़े हैं।

नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन पर जाकर कामयाब होने वाले जवानों को इस राशि का इंतजार है। लेकिन इसके बाद भी जवानों का जज्बा कायम है और जान की बाजी लगाकर वे नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन पर निकल पड़ते हैं। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि 2015 तक की ईनामी राशि मिल चुकी है। इसके बाद की ईनाम राशि मिलते ही जवानों को दे दी जाएगी।

ऐसे बंटती है ईनाम की राशि

एनकाउंटर में मारे गए हों या पुलिस ने गिरफ्तार किया हो। इसमें शामिल जवानों से लेकर अफसरों के हिस्से में ईनाम की राशि बंटती है। जबकि कोई ईनामी नक्सली सरेंडर करता है तो उसे ईनाम की पूरी राशि मिलती है।

साल 2016: 5 बड़े एनकाउंटर में 14 नक्सलियों को मार गिराया था। इन पर कुल 49 लाख का ईनाम घोषित है। वहीं 27 ईनामी नक्सलियों की गिरफ्तार की थी। जिन पर 55 लाख का ईनाम है।

साल 2017: 5 नक्सलियों को ढेर किया था। इन पर 24 लाख का ईनाम घोषित है। वहीं 24 ईनामी नक्सलियों की गिरफ्तार की। जिन पर 32 लाख का ईनाम घोषित है।

साल 2018: अब तक चार बड़े एनकाउंटर में 33 लाख रुपए के ईनामी 10 नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराया। इस साल का सबसे बड़ा एनकाउंटर 19 जुलाई को तिमेनार के जंगल में हुआ। जहां 7 नक्सलियों को मार गिराया गया।

जानिए, बीते तीन सालों में इन बड़े ईनामी नक्सलियों ने किया था पुलिस के सामने आत्मसमर्पण...

नंदू उर्फ कोरसा: मिलिट्री कंपनी नंबर 2 का सेक्शन डिप्टी कमांडर- 8 लाख।

कड़ती मुन्ना उर्फ चैतू उर्फ डेगा: भैरमगढ़ एरिया कमेटी अंतर्गत कमालूर एलओएस कमांडर- 5 लाख।

कोसी माड़वी उर्फ सजंती: कांगेर घाटी एरिया कमेटी सदस्य- 5 लाख।

पोदिया तेलाम उर्फ रामलाल: मैरपुर नुआपाड़ा संयुक्त डिविजनल कमेटी सदस्य- 8 लाख।

कामा उर्फ जोगा सोढ़ी: माचकोट एलओएस कमांडर, कागेर घाटी एरिया कमेटी सचिव- 8 लाख।

नंदा मंडावी: गणेश उइके का गनमेन- 5 लाख रुपए।

सुक्क मड़काम: बटालियन नंबर 1 के कंपनी नंबर दो प्लाटून नं 2 सदस्य- 8 लाख रुपए।

भीमा: डीव्हीसी टीम नंबर 1 सदस्य- 8 लाख।

श्यामला सोढ़ी उर्फ पोज्जे: महुपदर कमांडर - 5 लाख।

मंजू उर्फ मंजूला: मिलिट्री कंपनी नं 6 सदस्या- 8 लाख।

सुंदर कोर्राम उर्फ विकास उर्फ मोहन: मिलिट्री कंपनी नं 6 सदस्य- 8 लाख।

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