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आंदोलनरत 4 महिलाएं बेहोश, डॉक्टर ने कहा- बीपी लो होने से बिगड़ी तबीयत

Dhamtari News - धमतरी | 6 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले में बीते 28 दिनों से आंगनबाड़ियों की सहायिका-कार्यकर्ता गांधी मैदान में डटी हुई...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:20 AM IST
आंदोलनरत 4 महिलाएं बेहोश, डॉक्टर ने कहा- बीपी लो होने से बिगड़ी तबीयत
धमतरी | 6 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले में बीते 28 दिनों से आंगनबाड़ियों की सहायिका-कार्यकर्ता गांधी मैदान में डटी हुई हैं। हड़ताल से जिले के आंगनबाड़ियों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बच्चों को समय पर पोषण आहार उपलब्ध नहीं होने के कारण कुपोषण स्तर भी बढ़ रहा है। विभाग ने अब तक 326 प्रदर्शनकारियों को बर्खास्त कर दिया है। शनिवार को आंदोलन पर डटी शहर ग्रामीण ब्लाक अध्यक्ष मीना विश्वकर्मा, रेखा ध्रुव, शारदा ध्रुव और तुल्या ध्रुव बेहोश हो गई। इन्हें 108 संजीवनी एंबुलेंस से उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इधर नौकरी जाने के डर से अब तक 11 महिलाएं धरना स्थल पर बेहोश हो चुकी हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर एमए नसीम ने बताया कि अस्पताल में भर्ती आंदाेलनकारी महिलाओं की तबीयत बीपी लो होने से बिगड़ी है। सभी का बेहतर उपचार कर उन्हें छुट्टी दे दी गई है।

आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं: रेवती : जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ की अध्यक्ष रेवती वत्सल ने कहा कि वर्ष 2013 में सरकार द्वारा 1 हजार रुपए देने की घोषणा की गई थी, जो अभी तक नहीं दी गई। 2016 अक्टूबर से दिसंबर तक का मानदेय आज तक नहीं दिया गया। इससे पहले कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका को बर्खास्त कर दिया गया था और समय पर मानदेय नहीं दिया जाता। शासकीय कर्मचारी घोषित कर 18 हजार रुपए मासिक वेतन, रिटायर होने पर पेंशन की पात्रता, पदोन्नति में राहत सहित 6 सूत्रीय मांगों को लेकर 5 मार्च से हड़ताल पर हैं। मांगें जब तक पूरी नहीं होंगी, हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे। आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

गांधी मैदान में बेहोश हुई महिला को जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया।

जिले में 11 हजार कुपोषित बच्चे

महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ें पर नजर डालें, तो जिले में लगभग 11 हजार बच्चे कुपोषित हैं। 28 दिनों से इन बच्चों को समय पर पोषण आहार भी नहीं मिल पा रहा, ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। जिले में संचालित 1050 आंगनबाड़ियों में 49 हजार बच्चे दर्ज हैं। विभाग इन बच्चों को पोषण आहार देने के नाम पर प्रत्येक माह 50 हजार रुपए खर्च करता है।

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