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98 करोड़ खर्च, पर जिला नाम का ओडीएफ हकीकत : शौचालयों में कहीं छत नहीं तो कहीं दरवाजे गायब , कई शौचालयों में सैप्टिक टैंक तक नहीं

धमतरी पहला जिला है जिसके ग्रामीण क्षेत्र को प्रदेश में सबसे पहले ओडीएफ घोषित किया गया। करीब 98 करोड़ रुपए खर्च कर आधे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 02:30 AM IST

98 करोड़ खर्च, पर जिला नाम का ओडीएफ 
हकीकत : शौचालयों में कहीं छत नहीं तो कहीं दरवाजे गायब , कई शौचालयों में सैप्टिक टैंक तक नहीं
धमतरी पहला जिला है जिसके ग्रामीण क्षेत्र को प्रदेश में सबसे पहले ओडीएफ घोषित किया गया। करीब 98 करोड़ रुपए खर्च कर आधे अधूरे शौचालय बनाए गए और ओडीएफ घोषित कर दिया गया। 1 नवंबर 2016 को प्रशासन ने इसकी घोषणा करते हुए वाहवाही लूटी लेकिन सच्चाई यह है कि नगरी सहित कई ब्लाक ऐसे हैं जहां अभी भी शौचालयों का निर्माण.या तो नहीं हुआ है या वे अधूरे हैं। कई केवल सीट बनाकर छोड़ दिए गए। किसी शौचालय में छत और दरवाजे ही नहीं, तो किसी में सैप्टिक टैंक भी नहीं। इसका खुलासा भास्कर की पड़ताल में हुआ है।

आप खुद देखिए, ओडीएफ पर कैसे हुआ काम

नगरी ब्लाक के ग्राम बरपदर में 25 मकान हैं। 11 मकानों में शौचालय निर्माण अभी भी अधूरा है। यहां तक कि ग्राम पटेल हेमंत ध्रुवा के घर का शौचालय भी अधूरा ही है। इसके अलावा मोहेर साय सहित अन्य ग्रामीणों का शौचालय अधूरा है। न छत ढाली गई न ही दरवाजे लगे। केवल सीट बिठाकर छोड़ दिया गया है। यहां कुछ शौचालय में सैप्टिक टंकी भी नहीं बनी है। स्थिति ये है कि ओडीएफ जिले में यहां के लोग खुले में शौच जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसकी राशि पंचायत से निकाल ली गई है। यह हम नहीं बल्कि वे ग्रामीणों कह रहे हैं जिनके घरों में ये अधूरे शौचालय हैं। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण की राशि पंचायत ने निकाल ली गई है।

कागजों पर ही बना दिए शौचालय :जब धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्र को ओडीएफ घोषित किया जा रहा था तो नगरी में स्थिति ये थी कि अधिकारी दफ्तर में ही बैठकर कागजों पर शौचालयों का निर्माण करवा रहे थे। नतीजा, आज भी शौचालय नहीं बने हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि कागजों पर इन गावों में शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है।

नक्सली डर के कारण उच्च अधिकारियों ने नहीं की मॉनीटरिंग : नगरी ब्लाक में कागजी शौचालयों का एक कारण यह भी है कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं, जहां अधिकारी जाने से डरते हैं। नीचे का अमला उन्हें जो बताता है, वे मान लेते हैं। यही वजह है कि अभी तक शौचालय नहीं बन पाए।

ओडीएफ का सच

धमतरी। ग्राम पटेल हेमंत ध्रुवा अपने अधूरे शौचालय को दिखाते हुए।

ये है नियम

ओडीएफ गांव घोषित करने के पूर्व सरपंच, सचिव प्रस्ताव कर जनपदों में सूची भेजते हैं। ब्लाक, जिला स्तर के अधिकारी यहां जाकर जांच करते हैं। यदि सचिव पूरे गांव में शौचालय निर्माण हो जाने की बात लिखकर दे, तो औपचारिक घोषणा कर दी जाती है। स्टेट लेवल में जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए रैंडम देखा जाता है। इसके तहत 90 फीसदी शौचालय का उपयोग हो रहा हो, तो ओडीएफ घोषित किया जाता है।

फैक्ट फाइल

जिले में 652 गांव, 1 नवंबर 2016 को ओडीएफ घोषित किया गया

74460 नए शौचालयों का निर्माण हुआ

16702 शौचालयों की मरम्मत हुई

शौचालय निर्माण पर 98 करोड़ खर्च हुए

धमतरी. बरपदर में इस तरह सैप्टिक टंकी भी अधूरी बनाकर छोड़ दी गई है।

ब़ड़ा सवाल

जब शौचालय निर्माण की राशि पंचायत से निकाल ली गई है तो निर्माण अधूरा क्यों है?

आशंका

कहीं ऐसा तो नहीं कि इसकी राशि निकालकर खर्च कर दी गई हो और ग्रामीणों को घुमाया जा रहा हो।

इन गांवों में शौचालयों का अधूरा निर्माण

ग्राम बरपदर में 11 शौचालय अधूरे।

मादागिरी में 10 शौचालय अधूरे।

नवागांव में 8 शौचालय अधूरे।

सीधी बात

रविन्द्र वर्मा , स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक

जांच होगी और कार्रवाई भी

धमतरी जिला ओडीएफ घोषित है, फिर भी कई गांवों में शौचालय निर्माण अधूरा है?

- ऐसी शिकायत नहीं आई है। सारे गांव में शौचालय बन गए हैं।

नगरी ब्लाक के बरपदर सहित जंगल क्षेत्र के गांवों में अभी भी शौचालय निर्माण अधूरा है?

- बरपदर में 21 घर में निर्माण हुआ है। हमारे पास रिपोर्ट है। यदि शौचालय अभी भी अधूरा है, तो जांच के लिए टीम भेजेंगे।

इस पर क्या कार्रवाई करेंगे?

- बरपदर मैं स्वयं जाऊंगा। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई भी होगी।

अधूरा शौचालय निर्माण होने के बाद भी ऐसे गांव कैसे ओडीएफ हो गए?

- नियम के तहत 90 प्रतिशत शौचालय का उपयोग किया जाता है, तो उस गांव को ओडीएफ घोषित कर सकते हैं। हमारे पास आई रिपोर्ट में तो सभी घर में शौचालय निर्माण होना लिखा है, फिर भी हम वहां जाएंगे।

जांच करवाएंगे

कलेक्टर डाॅ. सीआर प्रसन्ना कहते हैं कि जिले को ओडीएफ घोषित करने के पूर्व स्टेट लेवल, अन्य जिले के अधिकारी जांच में पहुंचे थे। इसके बाद धमतरी ओडीएफ घोषित हुआ था। ओडीएफ घोषित हुए डेढ़ वर्ष हो गए। हो सकता है कोई परिवार छूट गया हो और नया मकान बना हो। इसकी जांच कराएंगे।

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Web Title: 98 करोड़ खर्च, पर जिला नाम का ओडीएफ हकीकत : शौचालयों में कहीं छत नहीं तो कहीं दरवाजे गायब , कई शौचालयों में सैप्टिक टैंक तक नहीं
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