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पानी तलाशते गोरेगांव पहुंचे चीतल को कुत्तों ने नोचा, सवा साल में 20 वन्यप्राणी ऐसे ही मारे गए

इस साल सूखे और गर्मी का असर जंगली-जानवरों पर अभी से दिखने लगा है। वन्य प्राणी पानी के लिए भटक रहे हैं। जंगल के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:40 AM IST

पानी तलाशते गोरेगांव पहुंचे चीतल को कुत्तों ने नोचा, सवा साल में 20 वन्यप्राणी ऐसे ही मारे गए
इस साल सूखे और गर्मी का असर जंगली-जानवरों पर अभी से दिखने लगा है। वन्य प्राणी पानी के लिए भटक रहे हैं। जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत और वन्यप्राणियों के लिए वन विभाग द्वारा बनाए गए पोखर, डबरी सब सूख चुके हैं। मंगलवार शाम एक चीतल पानी के लिए भटकता हुआ सांकरा रेंज के ग्राम गोरेगांव में पहुंच गया, जिस पर आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इससे वह लहूलुहान हो गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग ने उसे अपनी सुरक्षा में ले लिया। उसका इलाज जारी है। पिछले सवा साल में जिले के जंगलों से भटककर रिहायशी इलाकों में आए करीब 20 जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है।

जिले का वन क्षेत्र 2125.54 वर्ग किमी में : जिले का वनक्षेत्र 2125.54 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां हिरण, तेंदुआ, कोटरी, भालू, नीलगाय, खरगोश, लकड़बग्घा, जंगली सुअर, सियार जैसे कई जंगली जानवर रहते हैं। जिला पंचायत मनरेगा शाखा के धरम सिंह ने बताया कि जिले में 355 पंचायतों में 623 गांव हैं। इनमें 88 वन ग्राम शामिल हैं।

पोखर तो बना रहे, पर भरने की व्यवस्था नहीं : वन विभाग जंगली-जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करने के लिए पोखर बना रहा है, लेकिन उसे भरने की कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। 2016-17 में 3 तालाबों की खुदाई की गई थी। बिरगुड़ी रेंज में ही 10-10 लाख के 2 तालाब खोदे जा रहे हैं। बरसात में इन पोखरों में जमा पानी गर्मी आने के पहले ही सूख जाता है। उसके बाद गिनती के ही पोखरों को वन विभाग जैसे तैसे भरता है। बाकी सूखे रह जाते हैं। यही वजह है कि जानवर वनग्रामों के तालाबों की ओर रूख करते हैं।

कुत्तों के काटने से जख्मी हुए चीतल का उपचार सांकरा रेंज में चल रहा है।

सवा साल में इन जानवरों की मौत

2017 -चीतल 9, तेंदुआ 2, सांभर 1, बंदर 4, भालू 1

2018 - चीतल 2, जंगली सुअर 1

8 रेंज, हर रेंज में औसतन चार पोखर, सभी सूखे

जिले में वन विभाग के 8 रेंज हैं। औसतन सभी रेंज में 4 पोखर जंगली जानवरों के पानी की व्यवस्था के लिए खोदे गए हैं। ये सभी लगभग सूख चुके हैं। हालांकि कुछ प्राकृतिक जलस्रोतों में अभी भी थोड़ी मात्रा में पानी है। कुछ वनग्रामों के निस्तारी तालाबों में भी पानी है, जंगली जानवर यहीं पानी के लिए भटकते हुए आते हैं और आवारा कुत्तों या अन्य हादसों का शिकार हो जाते हैं।

वन अमला नहीं कर पा रहा पानी की व्यवस्था

उच्च अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि जंगली जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था की जाए। इसके लिए टैंकर से पोखरों को भरने, डबरी या जल कुंड खोदने, इन अस्थायी जलस्रोतों की नियमित निगरानी करने के लिए कहा गया है लेकिन वन अमला यह काम नहीं कर पा रहा है।

सीधी बात

अमिताभ बाजपेयी, डीएफओ धमतरी

वन्य प्राणियों के पानी के लिए जंगल में खोदे गए तालाब सूख चुके हैं, उनके लिए क्या व्यवस्था है?

- वन्य क्षेत्रों में पानी का पर्याप्त इंतजाम किया जा रहा है, पानी की किल्लत नहीं होगी।

जिले में अल्पवर्षा हुई है, राजस्व ग्रामों के तालाब सूखे चुके हैं, तो वन ग्रामों और जंगलों के कैसे नहीं सूखेंगे, फिर पानी की किल्लत तो होगी?

-विभाग वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है, जिले के सभी 8 रेंज अधिकारियों को पानी का पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

पानी की किल्लत नहीं, तो फिर वन्य प्राणी अभी से रिहायशी इलाके की ओर किस वजह से रुख कर रहे हैं?

हां मैं मानता हूं, पानी की थोड़ी किल्लत होगी, पर वन्य प्राणी जंगल से भटककर रिहायशी इलाके में आ जाते हैं।

किसलिए, वो भी गर्मी के दिनों में?

- हां, अक्सर पानी के लिए आ जाते हैं।

विभाग ने पानी की क्या-क्या व्यवस्था वन्य प्राणियों के लिए जंगल में कर रखी है?

-फिलहाल तो कोई व्यवस्था नहीं की है, जो पहले से है, वही है। अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि जंगलों की मॉनीटरिंग कर पेयजल की व्यवस्था पर ध्यान दें।

पिछले सवा साल में 20 वन्यप्राणियों की मौत की क्या वजह है?

- वन्य प्राणियों की मौत के विभिन्न कारण हैं, संभवतः 2-3 जानवरों की ही पानी के कारण मौत हुई होगी।

होती है हिंसक वारदात

जंगली जानवरों के रिहायशी इलाके में भटकने के दौरान कई बार हिंसक वारदात भी हो चुकी है। तेंदुआ जैसे जानवर वन ग्रामों के गायों और बकरियों को शिकार बनाते हैं। कभी कभी वे लोगों पर भी हमला करते हैं। पिछले साल जंगली जानवरों के हमले की कई घटनाएं हुई थी।

शिकारियों और तस्करों का भी खतरा

वन्य प्राणियों के जंगल से बाहर निकलते ही उन पर शिकारियों और तस्करों का खतरा मंडराने लगता है। गंगरेल क्षेत्र में बीते साल दो लकड़बग्घे की सड़ी लाश भी मिली थी। तस्कर हिरण का शिकार उसके चमड़े और सिंग के लिए करते हैं।

ये सच है कि पानी के लिए ही भटकते हैं वन्यप्राणी

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