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महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का पूर्वाभ्यास था कंडेल सत्याग्रह: चौबे

बीसीएस पीजी काॅलेज में अंचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:40 AM IST
बीसीएस पीजी काॅलेज में अंचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की जयंती बुधवार को मनाई गई। काॅलेज परिसर के उद्यान में स्थापित बाबू छोटेलाल की प्रतिमा पर प्राचार्य डाॅ. चंद्रशेखर चौबे ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित की।

इसके बाद उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताते हुए कहा कि महात्मा गांधी के देशव्यापी असहयोग आंदोलन का पूर्वाभ्यास बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव का कंडेल नहर सत्याग्रह था। इसी वजह से महात्मा गांधी को भी यहां आना पड़ा था। इस मौके पर रजिस्ट्रार केके ध्रुव एवं छात्रसंघ अध्यक्ष नीलम सिन्हा ने भी बाबू छोटेलाल को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में डाॅ. श्रीदेवी चौबे, डाॅ. चंद्रिका साहू, डाॅ. मनदीप खालसा, डाॅ. प्रभा वेरूलकर, डाॅ. एके सिंग, डाॅ. रोशन आरा, डाॅ. हेमवती ठाकुर, डाॅ. सपना ताम्रकार, डाॅ. सरला द्विवेदी, प्रो. दुर्गेश प्रसाद, प्रो. पंकज जैन, प्रो. ग्रेस कुजूर, प्रो. जयश्री पंचांगम समेत सभी स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

पानी चोरी के आरोप को गलत सिद्ध किया था

प्राचार्य डॉ. चौबे ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सन् 1920 में नहर सत्याग्रह के जरिए विदेशी हुकूमत को झुकने पर विवश करने वाले बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव कंडेल गांव के मालगुजार थे। उनके नेतृत्व में गांव के किसानों ने ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगाए गए पानी चोरी के आरोप को गलत सिद्ध कर बड़ी सफलता प्राप्त की थी, इस कारण 12 दिसंबर 1920 को महात्मा गांधी को धमतरी आने के लिए बाध्य होना पड़ा था, क्योंकि गांधी जी विदेशी हुकूमत के खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाने की तैयारी कर रहे थे। कंडेल के किसानों का नहर सत्याग्रह असहयोग आंदोलन का पूर्वाभ्यास था, जो स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है।