8 महीने बाद हुई टंकियों की सफाई, जमी थी काई की 3 इंच मोटी परत, गंदगी भी निकली

Dhamtari News - आठ महीने बाद निगम ने पानी टंकियों की सफाई शुरू की है। शनिवार को जालमपुर वार्ड का ओवरहेड टैंक साफ करने कर्मचारी...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 02:16 AM IST
Dhamtari News - chhattisgarh news after 8 months the cleaning of the tanks was stored 3 mm thick layer of moss and dirt also came out
आठ महीने बाद निगम ने पानी टंकियों की सफाई शुरू की है। शनिवार को जालमपुर वार्ड का ओवरहेड टैंक साफ करने कर्मचारी अंदर घुसे तो देखा कि टंकी के फर्श और दीवार पर तीन इंच मोटी काई की परत जमा है। कंकड़ पत्थर, गिट्टी, रेत, मुरुम व ईंट के टुकड़े भी थे। शहर की सभी 9 ओवरहेड टंकियों की सफाई की भिलाई की एजेंसी मास्टर क्लीनिंग सर्विसेज से कराई जा रही है। जालमपुर और कांटा तालाब स्थित पानी टंकी जर्जर है, सीढ़ियां टूट गईं हैं। दोनों टंकी की सफाई करना जोखिमभरा काम था।

नगर निगम मानता है कि 6 माह से अधिक अवधि हो जाए, तो टंकियों में काई व गंदगी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। रोगों के फैलने के सबसे बड़े कारण यही सूक्ष्म जीव हैं। पेयजल के कारण पिछले वर्षों शहर में उल्टी-दस्त, पीलिया का प्रकोप भी हुआ था। जल अधीक्षक कामता नागेंद्र ने भी माना कि इस बार टंकियों की सफाई कराने में देर हुई।

9 ओवरहेड टंकियों की सफाई में खर्च होंगे 4 लाख

धमतरी. जालमपुर ओवरहेड टैंक के अंदर उतरकर सफाई करता कर्मचारी।

सही तरीके से की सफाई

कंपनी के संचालक दीपक शर्मा ने बताया कि सफाई की शुरुआत जेट मशीन से प्रेशर मारकर की जाती है, टंकी में जमी काई एवं अन्य गंदगी साफ होकर एक जगह आ जाती है। गंदगी को बाहर निकाला जाता है। इसके बाद पहले ब्लीचिंग पाउडर और बाद में हाइड्रोजन पेराक्साइड (बैक्टीरिया नाशक) से सफाई की गई।

54 किमी लाइन 35 साल पुरानी

शहर में करीब 134 किमी पाइपलाइन बिछी है। इनमें 54 किमी पाइपलाइन 35 साल पुरानी है। वहीं भागीरथी योजना के तहत 80 किमी पाइपलाइन बिछाई गई है। निगम इंजीनियरों का मानना है कि फिल्टर प्लांट से मेन राइजिंग लाइन होते हुए इन टंकियों तक पानी पहुंचता है। फिर टंकियों से सप्लाई लाइन के जरिए पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है। कई बार मेन राइजिंग लाइन फूटने से पाइप में मिट्टी भर जाती है। यह मिट्टी पाइपलाइन के जरिए टंकी में और यहां से मटमैला पानी घरों तक पहुंचकर बीमारियों का कारण बनता है, इसलिए साल में 2 बार टंकी की सफाई होनी चाहिए।

संक्रमित रोग के कारण

जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संजय वानखेड़े का कहना है कि शुद्ध पेयजल के लिए ओवरहेड टंकियों की सफाई हर 6 माह में होनी चाहिए। लंबे समय तक सफाई नहीं होने से काई, गंदगी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टिरिया व कीड़े पनपते हैं। यही विभिन्न संक्रामक रोगों के फैलने का सबसे बड़ा कारण हैं।

नहीं मिलेगी शिकायत

नगर निगम जल अधीक्षक कामता नागेंद्र ने बताया कि शहर में 9 ओवरहेड टंकी है। 4 पैसे पर लीटर के हिसाब से करीब 4 लाख की लागत से सफाई करवाई गई। गंदा पानी पहुंचने की शिकायत किसी वार्ड से मिलती है, तो तत्काल सुधार कराया जा रहा है। पुराने पाइप लाइन को बदलने का फिलहाल कोई प्लान नहीं है।

शहर के जुड़े आंकड़े







1 एमएलडी=10 लाख लीटर

नवागांव में पानी नहीं नाराज लोगों का प्रदर्शन

नवागांव में पानी नहीं पहुंचने से नाराज लोगों ने वार्ड में प्रदर्शन किया। कमिश्नर एके हालदार मौके पर पहुंचे। पार्षद हबीबुन्निशा हाशमी ने पेयजल किल्लत की शिकायत की, तब कमिश्नर ने जल अधीक्षक कामता नागेंद्र को व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

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