जिले में हर 5वें दिन एक दुष्कर्म, 2018 में 73 मामले आए सामने, 38 अपहरण भी हुए

Dhamtari News - शासन, प्रशासन और सामाजिक संगठन भले ही महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर कितना भी दावा करें, लेकिन जिले में हर...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 02:25 AM IST
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शासन, प्रशासन और सामाजिक संगठन भले ही महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर कितना भी दावा करें, लेकिन जिले में हर 5वें दिन इन्हें दुष्कर्म, छेड़छाड़, छींटाकशी या फिर अपहरण का शिकार होना पड़ रहा है। ये बात हम नहीं कह रहे, बल्कि पिछले साल का क्राइम रिकार्ड कह रहा है। पिछले साल 365 दिन में 73 केस दुष्कर्म के दर्ज हुए। जबकि 2017 में 53 थे। वर्ष 2018 में दुष्कर्म के मामले लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गए। इस पर एसपी रजनेश सिंह कहते हैं कि दुष्कर्म जैसे अपराध को रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी आगे आना होगा।

महिलाओं से संबंधित अपराध में लगातार इजाफा: जिले की पुलिस रिकार्ड पर साल 2016 से 2018 तक बीते 3 साल पर नजर डाले, तो दुष्कर्म के 175 मामले दर्ज हुए है। इसी तरह छेड़छाड़ के 124, अपहरण के 74 मामले सामने आए हैं। 14 मामले यौन उत्पीड़न के भी हैं। साल दर साल यहां महिलाओं से संबंधित अपराधों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिले में सबसे ज्यादा मामले भखारा, मगरलोड और कुरुद थाने में दर्ज हुए है।

अपराध का मुख्य कारण नशा: जिला अस्पताल की मनो चिकित्सक एवं साइकोथेरेपिस्ट डॉ. सुचिता गोयल ने कहा कि महिलाओं और युवतियों पर बढ़ते अत्याचार का कारण नशा है। यदि लोग नशे करना छोड़ें, तो अपराधों में भी कमी आएगी। छात्र-छात्राओं को सही-गलत से अवगत कराना होगा। माता-पिता अपने-अपने बच्चों को अपराधों से अवगत कराएं।

हिमाचल, गोवा और जम्मू की महिलाएं हैं सुरक्षित

हमारे राज्य से बेहतर स्थिति कई राज्य हैं, जहां महिलाएं सुरक्षित हैं। गोवा, हिमाचल, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, उत्तराखंड, दादर-हवेली जैसे राज्य है, जहां महिलाओं के साथ अपराध नहीं के बराबर है। यहां की महिलाओं को कई मामलों में सुकून है। इंटरनेशनल सेंटर पर रिसर्च ऑन वूमन की रिपोर्ट के अनुसार यहां की महिलाएं सुरक्षित हैं।

पेट्रोलिंग भी कारगर नहीं हो पा रही

महिलाओं पर बढ़ते अपराध को रोकने के लिए शहर समेत आसपास गांव में एसपी रजनेश सिंह ने महिला सेल भी गठित किया है। हाल ही में शक्ति स्क्वाड का भी गठन किया गया है। इसके बावजूद महिलाओं से संबंधित अपराध बदस्तूर जारी है। स्कूल, कालेज के आसपास बदमाश युवा छात्राें को देखकर टिप्पणी भी करते है। बदनामी के डर से कई युवतियां और महिलाएं पुलिस तक पहुंचने से भी घबराते है।

पुलिस अपराध रोकने हरसंभव प्रयास करेगी

एसपी रजनेश सिंह ने कहा कि जिले में साल 2018 में दुष्कर्म के 73 केस दर्ज हुए। यह चिंता का विषय है, पुलिस इस गंभीर मामले की बारीकी से जांच कर दोषियों को सजा तक पहुंचा रही है, लेकिन अपराध पर रोक लगाने के लिए पालकों, समाज संगठनों को सामने आकर विचार करना होगा। सभी के प्रयास से महिलाओं और युवतियों पर हो रहे अत्याचार पर रोक लगाई जा सकती है।

तीन साल हुए अपराधों का विवरण

अपराध वर्ष 2016 2017 2018

बलात्कार 49 53 73

अपहरण 18 18 38

छेड़छाड़ 34 55 35

यौन उत्पीड़न 02 06 06

सही शिक्षा और दीक्षा की जरूरत

समाज सेविका और अधिवक्ता पार्वती वाधवानी ने कहा कि आज मोबाइल और फैशन अपराध का कारण बन रहा है। लड़कियां अज्ञात नंबर पर भी बातचीत कर धोखे का शिकार हो जाती हैं। छात्राओं को सही शिक्षा और दीक्षा नहीं मिल पा रही है। यदि युवतियां खुद के साथ होने वाली घटना की जानकारी सबसे पहले माता-पिता को देते है, तो गंभीर अपराध पर रोक लग जाएगी। सामाजिक संगठनों को भी जनजागरूकता अभियान चलाकर महिला और युवतियों पर बढ़ रही अत्याचार की रोकथाम करने आगे आना चाहिए।

पुलिस के प्रयास भी कारगर नहीं हो रहे



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