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सरकारी खिलौने की सप्लाई नहीं हो रही, टूटे व पुराने से खेल रहे बच्चे

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 02:27 AM IST

Dhamtari News - जिले के 1103 आंगनबाड़ी केन्द्रों में करीब 50 हजार बच्चों की संख्या दर्ज है। बीते 2 साल से सरकार ने खिलौनों की सप्लाई पर...

Dhamtari News - chhattisgarh news government toys are not being supplied children playing from broken and old
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जिले के 1103 आंगनबाड़ी केन्द्रों में करीब 50 हजार बच्चों की संख्या दर्ज है। बीते 2 साल से सरकार ने खिलौनों की सप्लाई पर रोक लगा दी थी। आंगनबाड़ियों में खिलौने नहीं होने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पा रहा है। वे केवल पढ़ाई तक सीमित होकर रहे गए है।

इधर मनोवैज्ञानिक ने टूटे खिलौनों का बच्चों में नकारात्मक असर पड़ने की भी बात कही है। वहीं महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सरकार से इस साल खिलौने खरीदी के लिए 33 लाख का फंड मिलने की बात कहीं है। भास्कर टीम ने बुधवार को शहर के दर्जनभर आंगनबाड़ियों की पड़ताल की। सभी केंद्रों में बच्चे टूटे खिलौनों से ही खेलते नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बताया कि जिलेभर में ऐसी ही स्थिति है। खिलौनों की सप्लाई 2 साल से नहीं हो रही है, जबकि बच्चों के सामने प्लास्टिक के खिलौने ज्यादा दिन टिक नहीं पाते। आंगनबाड़ी नयापारा और टिकरापारा वार्ड क्रं. 2 में एक भी खिलाैने नहीं है। बनियापारा वार्ड क्रं. 1 में एक बच्ची टूटे और चपटे बॉल से खेलते-खेलते केंद्र में ही सो गई। महंत घासीदास केन्द्र क्रमांक 2 में एक बच्ची टूटे हाथ वाली गुड़िया से खेल रही थी।

धमतरी. बनियापारा वार्ड के अांगनबाड़ी केंद्र क्रं. 1 की दर्ज संख्या 15 है। यहां के बच्चे टूटे-फूटे खिलौनें खेलते नजर आए।

इन आंगनबाड़ियाें में टूटे खिलौने : शहर के कोष्टापारा, गोकुलपुर, आमापारा, बनियापारा, साल्हेवारवारा, कोष्टापारा, टिकरापारा, नयापारा, अंबेडकर वार्ड, औद्योगिक वार्ड, मराठापारा, पोस्ट आफिस वार्ड, सदर उत्तर, सदर दक्षिण, रामपुर वार्ड में कहीं पुराने और टूटे-फूटे खिलौनों से बच्चे मन बहला मिले, तो कहीं खिलौने ही गायब हो गए है। वे केंद्र के बाहर उछल-कूद करते मिले।

33 लाख से होगी खिलौने की खरीदी

महिला बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणुप्रकाश ने कहा कि शासन से 2 साल से खिलौने खरीदने फंड नहीं मिल रही थी। इस साल स्वीकृति मिली है। जिले के 1103 आंगनबाड़ियों के लिए करीब 33 लाख 9 हजार के खिलौने खरीदा जाएगा। प्रत्येक आंगनबाड़ी के लिए 3 हजार स्वीकृत हुआ है। खिलौने खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया के साथ समिति भी बनाई गई है। इस साल मार्च तक खिलौने खरीदकर बांट देंगे।

2 साल से वितरण नहीं, पर इस साल जरुरी मिलेगा

बीते 2 वर्ष तक बच्चों को खिलौने नहीं मिल पाए। शासन से हर वर्ष खिलौना खरीदी के लिए स्वीकृति आती है। 2015 में वितरण नहीं हो पाया। 2016 में खिलाैने बांटे गया। इसके बाद से अब तक खिलौना वितरण नहीं हुआ है। अफसरों की मानें, तो सरकार ने खिलौना खरीदी पर पाबंदी लगा दी थी। पर कांग्रेस की नई सरकार ने पुन: इसकी स्वीकृति दी है। अब महिला बाल विकास विभाग खिलौने खरीदने तैयारी भी शुरु कर दी है।

टूटे खिलौनों से बच्चों के दिमाग पर पड़ेगा असर

जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक सुचिता गोयल ने बताया कि बचपन में बच्चों की प्रवृत्ति भी ज्यादातर सीखने की ही होती है। ऐसे में यदि आंगनबाड़ी के छोटे-छोटे बच्चों को हाथ-पैर टूटे गुड्डे, गुड़िया, चपटे बॉल, बिना चक्के की कार या अन्य खिलौने आदि खेलने को मिल जाएं तो बच्चे अपने लर्निंग लाइन (सीखने की प्रक्रिया) से भटक जाएंगे। यही नहीं, बच्चों के मन मस्तिष्क पर भी गलत असर पड़ेगा। नकारात्मक सोच भी सामने आ सकती है।

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