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गर्मी के दिनों में एसी में बैठने की इच्छा हो फिर भी उसे न चालू करें तो यह भी तप है

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:41 AM IST

Dhamtari News - पीयूष सागर सुरेश्वर श्रीजी मासा का शुक्रवार को धमतरी प्रवास होने पर जैन समाज ने उनका स्वागत किया। उनके साथ तीन जैन...

Dhamtari News - chhattisgarh news in the summer if there is a desire to sit in ac then even if it does not turn on then it is also tenacity
पीयूष सागर सुरेश्वर श्रीजी मासा का शुक्रवार को धमतरी प्रवास होने पर जैन समाज ने उनका स्वागत किया। उनके साथ तीन जैन मुनि भी पहुंचे हैं। सभी का आगमन कैवल्य धाम कुम्हारी से पैदल धमतरी हुआ है। आचार्य पीयूष सागर के शिष्य सम्यक र| ने तप के साथ-साथ आज की भौतिकता पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि तपस्वियों को तप तक पहुंचने के लिए प्रारंभ से ही जप-तप शुरू करना होता है।

सबसे बड़ा तप इच्छा का विरोध करना है। जो हमारी इच्छा है और उसका विरोध कर हम संघर्ष करते हैं, तो वह तप माना जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि आपकी इच्छा गर्मी के दिनों में एसी में बैठने की है, लेकिन आप इस इच्छा का विरोध कर एसी चालू नहीं करते हैं, तो यह भी एक प्रकार का तप है। सम्यक र| ने कहा रोजाना की जिंदगी में मनुष्य के अंदर कई इच्छाएं जागृत होती है, जिनका दमन कर देना तप होता है। इसी तप से आगे बढ़ते हुए योग्यतानुसार कोई भी व्यक्ति तपस्वी बनता है। वातावरण से व्यक्ति के अंदर विचार आता है और विचार से ही आचरण का निर्माण होता है। यदि भौतिकता के युग में जो दूषित वातावरण में रहता है, तो उसका मन दूषित होगा। हम पूरे वातावरण को तो नहीं बदल सकते, बेहतर यही होता है कि हम स्वयं उस वातावरण से ही दूर हो जाएं।

राजिम में जन्में पीयूष सागर, 1985 में दीक्षा ली: पीयूष सागर मासा का जन्म 1963 में राजिम के पारस परिवार में हुआ था। उनकी बड़ी बहन प्रियंकरा श्रीजी ने 1973 में दीक्षा ले ली थी। इसके बाद पीयूष सागर ने 1985 में दीक्षा ली। अब तक वे हजारों लोगों को दीक्षा दे चुके हैं। उनकी प्रेरणा से मध्यप्रदेश सिवनी में नवउन पार्श्वनाथ, बाड़मेड राजस्थान चौहटन में और कोलकाता के जीजी पहाड़ी में तीर्थ का निर्माण प्रगति पर है।

जैन मुनी समाज के लोगों के साथ अर्जुनी मोड़ से सदर मार्ग होते हुए इतवारी बाजार जैन मंदिर में पहुंचे।

आज राजिम होते हुए रायपुर के लिए करेंगे प्रस्थान

आचार्य पीयूष सागर, उनके शिष्य सम्यक र| सागर, समयर्ति र| सागर और संकल्प र| सागर के धमतरी प्रवेश करते ही जैन समाज के लोग स्वागत के लिए उमड़ पड़े। अर्जुनी मोड़ से वे आमापारा स्थित मंगल भवन पहुंचे। वहां से इतवारी बाजार जैन मंदिर में शुक्रवार को आगमन हुआ। शनिवार की शाम नवापारा राजिम होते हुए रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां छत्तीसगढ़ का प्रथम दादाबाड़ी का शिलान्यास किया जाएगा। वहां से वे कोलकाता के लिए पैदल प्रस्थान करेंगे, जहां 7 जुलाई को प्रवेश के बाद 25 जुलाई को चौमासा प्रारंभ होगा। स्वागत के दौरान विजयलाल बरड़िया, गजराज लुंकड़, पारसमल गोलछा, संतोष पारख, भंवरलाल छाजेड़, निर्मल बरड़िया, संजय संकलेचा, महेश सेठिया, धरमचंद पारख, रमन लोढ़ा, लक्ष्मीलाल लुनिया आदि उपस्थित थे।

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