बुजुर्गों के साथ युवा व बच्चे भी रख रहे रोजा

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:15 AM IST

Dhamtari News - कुरुद| रमजान के महीने में मस्जिदों को आकर्षक लाइटों से सजाया गया है। वहीं बुजुर्गों के साथ जवान और बच्चे भी रोजे रख...

Kurud News - chhattisgarh news roja keeping the youth and children along with the elderly
कुरुद| रमजान के महीने में मस्जिदों को आकर्षक लाइटों से सजाया गया है। वहीं बुजुर्गों के साथ जवान और बच्चे भी रोजे रख रहे हैं। रोजा इफ्तार के लिए शाम के समय मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में मस्जिदों का रूख करते देखा जा रहा है। लोग अल्लाह की इबादत में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।

मुस्लिम समाज के इमरान बेग ने बताया कि माहे रमजान वह मुबारक माह है, जिसमें एक मुसलमान पूरे तीस दिन भूखा प्यासा रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहता है। सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम रोजा नहीं है। आंखें, जुबान अपने सारे इन्द्रियों से यहां तक कि अपने ख्यालातों से भी ऐसा कोई काम न करना जो परवरदिगार को नापसंद हो उसका नाम रोजा है।

इमरान बेग ने कहा अगर हम बुराई करते हैं, गलत कामों में मशगूल रहते हैं तो खुदा को ऐसे भूख प्यासे रहने से कोई सरोकार नहीं है। जमाल रिजवी के मुताबिक मंजिल तक पहुंचना तब आसान हो जाता है जब राह सीधी हो जाती है। मजहब इस्लाम में रोजा रहमत और राहत का रहबर है। अय्यूब खान के मुताबिक वैसे तो रोजा सब्र और हौसले का प्याम है, लेकिन रोजा सीधी राह का भी हितमाम है।

रोजा इफ्तार भाईचारे का प्रतीक: अजय चंद्राकर

कुरूद|
क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर रमजान के मौके पर प्रतिवर्ष हिंदू, मुस्लिम एकता व सामाजिक सद्भाव के लिए हर साल रोजा इफ्तार आयोजित करते हैं। चन्द्राकर का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से काफी खुशी मिलती है और ऐसे कार्यक्रम वास्तव में एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

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