25 गांवों के देव विग्रह लाए गए, प्रदर्शनी से दी जा रही कोसा उत्पादन और वस्त्र बनाने की जानकारी / 25 गांवों के देव विग्रह लाए गए, प्रदर्शनी से दी जा रही कोसा उत्पादन और वस्त्र बनाने की जानकारी

Dhamtari News - धमतरी-कांकेर मार्ग पर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर राजाराव पठार में 3 दिवसीय वीर मेला महोत्सव का शनिवार को आगाज हुआ।...

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 02:22 AM IST
Dhamtari News - dev vivalas of 25 villages were brought information about producing kosa production and textiles made from exhibition
धमतरी-कांकेर मार्ग पर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर राजाराव पठार में 3 दिवसीय वीर मेला महोत्सव का शनिवार को आगाज हुआ। यहां प्रदेशभर के आदिवासी पहुंच रहे हैं, जो 3 दिन तक आदिवासी संस्कृति की छटा बिखेरेंगे। खास बात यह कि मेला धमतरी, बालोद और कांकेर जिले के सीमा में लगता है। पहले दिन देव स्थापना, देव पूजा के बाद आदिवासी लोक कला महोत्सव की धूम रही।

समिति प्रमुख आरएन ध्रुव ने बताया कि यहां बीते 4 सालों से वीर मेला महोत्सव मनाया जा रहा है। हर वर्ष आदिवासियों का रुझान वीर मेला महोत्सव को लेकर बढ़ रहा है। यहां नई पीढी़ को बस्तर की संस्कृति से अवगत कराने बस्तरिया आर्ट, बांस से निर्मित टोकरी, लकड़ी से बनाए गए आकर्षक देवी-देवता की मूर्ति, मछली, गुलदस्ते आदि की प्रदर्शनी लगाई गई है। हाथ करघा बुनाई कार्य, कोसा उत्पादन से लेकर वस्त्र बनाने तक की पूरी जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से दी जा रही है।

वीर मेला का गेट बना आकर्षक : राजाराव पठार स्थित मेला स्थल का प्रवेश द्वार लोगों को आकर्षण का केंद्र बना है। बस्तरिया संस्कृति का रुप उकेरा गया है। गेट के दोनों तरफ के कालम को सल्फी पेड़ की आकृति दी गई है। इसमें सल्फी उतारने के लिए एक व्यक्ति चढ़ रहा है और उसके ऊपर में रस्सी से एक मटका लटकता दिखाया गया है। बीच के कालम में बड़ा वाद्ययंत्र बना है। उसमें एक महिला बस्तरिया पोशाक में सिर पर मटकी लेकर खड़ी है। उसके साथ एक व्यक्ति एक हाथ में कटारी लिए और एक हाथ में सल्फी का मटका लिए दिखाया गया है।

25 से अधिक गांव के देवी-देवता पहुंचे : वीर मेला महोत्सव में 25 से अधिक गांव के आंगा देवता और डांग लाए गए हैं। पुरुर से देवी-देवताओं को पारंपरिक बाजे के साथ वीर मेला महोत्सव में लाया गया। रास्तेभर युवा शहीद वीर नारायण सिंह अमर रहे, एक तीर-एक कमान आदिवासी भाई एक समान जैसे नारे लगाए गए। महोत्सव में अंचल के सांस्कृतिक लोक गीत बस्तरिया गीत, रिलो आदि की धूम मची हुई है। धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर समेत बस्तर क्षेत्र के विभिन्न बस्तरिया टोली यहां शामिल होकर बस्तर की संस्कृति से अवगत करा रही है।

जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर राजाराव पठार में शनिवार को 3 दिवसीय वीर मेला महोत्सव शुरु हुआ। पहले दिन शनिवार को अंगा देवता पहुंचे।

10 दिसंबर को मनाया जाएगा शहीद दिवस

वीर मेला आयोजन समिति द्वारा 10 दिसंबर को शहीद वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 9 दिसंबर को सुबह 11 बजे से आदिवासी हाट एवं लोक कला महोत्सव, रात में सांस्कृतिक महोत्सव की धूम मचेगी। कार्यक्रम में आयोजित समिति के अध्यक्ष शिशुपाल सोरी, उपाध्यक्ष आर राणा, पूर्व सांसद सोहन पोटई, यूआर गंगराले, विनोद नागवंशी समेत प्रदेशभर के आदिवासी समाजजन जुटे हैं।

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