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प्रधानमंत्री का दावा और जमीनी हकीकत, छत्तीसगढ़ के 122 गांवों में अभी भी बिजली नहीं

प्रधानमंत्री का दावा और जमीनी हकीकत

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:30 PM IST
बामदई के एक घर में ढिबरी की रोश बामदई के एक घर में ढिबरी की रोश

बस्तर/जगदलपुर (छत्तीगसगढ़). 15 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था -1000 दिन में 18,452 गांवों में बिजली पहुंचाएंगे। ठीक 988 दिन बाद ( 29 अप्रैल 2018) को उन्होंने ट्वीट किया-हमने वादा पूरा किया, उन गांवों में बिजली पहुंच गई, जहां अब तक नहीं पहुंची थी। सरकारी आंकड़े ही गवाह हैं कि छत्तीसगढ़ में 122 गांवों का विद्युतीकरण नहीं हुआ। इन्हीं दावों की हकीकत बताती बस्तर, कांकेर व धमतरी जिले की रपट: बस्तर में अभी भी 32,000 कनेक्शन देना अभी बाकी हैं जबकि कांकेर जिले के 30 गांवों में अभी भी बिजली नहीं पहुंची है। धमतरी जिले के नगरी ब्लाक में पहाड़ी पर बसे 22 गांव में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। जानिए प्रधानमंत्री का दावा और जमीनी हकीकत...

ग्राउंड रिपोर्ट-1

जगदलपुर: यहां से 14 किमी दूर रायपुर रोड पर एनएच-30 से सटा है बामदई गांव। बकावंड ब्लॉक की भिरलिंगा पंचायत के इस गांव से सीएम डॉ. रमन सिंह ने 10 अक्टूबर 2017 को बिजली तिहार की शुरुआत की थी। उनका दावा था कि मार्च 2018 तक सभी ग्रामीण क्षेत्रो में बिजली की सुविधा मिल जाएगी। जबकि अब तक बामदई के ही एक भी परिवार को सरकार की सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन नहीं मिल सका है।

ग्रामीणों ने कहा कि कई बार सांसद दिनेश कश्यप, विधायक लखेश्रर बघेल, पूर्व विधायक सुभाऊ राम कश्यप से मिले पर फायदा नहीं मिला। बिजली विभाग के डिवीजनल इंजीनियर पीएन सिंह ने बताया कि सभी इलाकों में विद्युतीकरण किया जा रहा है। जल्द ही बामदई को भी रोशन किया जाएगा, अब तक क्यों नहीं हुआ वे इसका जवाब नहीं दे सके।

बस्तर के जिस गांव से सीएम ने शुरू किया था बिजली त्योहार, वहां पर अब भी अंधेरा

बस्तर जिले के सातों ब्लॉकों के 576 में से 81 गांव ही एैसे हैं जहां बिजली कंपनी 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर चुकी है। जिले में 55 हजार कनेक्शन दिए जाने का लक्ष्य तय हुआ था। जनवरी 2018 से इस पर काम शुरू हो चुका है। वहीं अभी तक 23 हजार कनेक्शन कंपनी दे चुकी है लेकिन लक्ष्य के आंकड़े देखे जाएं तो अभी 32 हजार कनेक्शन और दिए जाने हैं। कई गांवों में लाइन खींचने, खंभे गाड़ने का काम अधूरा है। दावा है कि जून तक ये लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

बामदई में आजादी से अब तक चल ही रही बिजली के लिए लड़ाई : पूर्व पंच

बामदई के रैयमती, सादू, नरसिंह, लखमूराम और राजू ने कहा कि बिजली तिहार में रमन सिंह आए थे। हर घर को रोशन करने के लिए कहा था लेकिन योजना का फायदा कैसे मिलेगा ये नहीं पता। इन लोगों ने बताया कि वे कई बार बिजली विभाग के दफ्तर भी गए लेकिन कभी अफसर के नहीं होने, कभी बाद में आने का जवाब ही मिला। पूर्व पंच बुल्लूराम ने कहा कि ये बात नई नहीं, वे आजादी से अब तक सड़क, बिजली, पानी के लिए जूझ रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट - 2

कांकेर के 30 गांवों में नहीं पहुंची बिजली 3 गांवों में व्यवस्था कर पाना आसान नहीं

कांकेर: कांकेर में बिजली की सबसे अधिक समस्या नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा और अंतागढ़ ब्लॉक में है। फिलहाल जिले में 30 गांव ऐसे हैं जहां बिजली नहीं पहुंच पाई है। इन 30 में से 3 गांव तो ऐसे हैं जहां भौगोलिक परिस्थिति के कारण बिजली पहुंचाना लगभग असंभव है।

पखांजूर का टेकामेटा ऐसा ही एक गांव है, इस गांव तक पहुंचने के लिए महाराष्ट्र की सीमा पारकर जाना होता है और जंगल भी बेहद घना है। ऐसे ही परलकोट डैम के डुबान क्षेत्र का गांव है हानफर्सी, यहां बिजली पहुंचाने के लिए 7 मीटर की जगह 11 मीटर वाले पोल लगाए जाएं तभी बिजली पहुंच सकती है। तीसरा गांव कोयलीबेड़ा की पहाड़ी पर बसा केहलाबेड़ा है। यहां न बिजली है, न क्रेडा विभाग सौर ऊर्जा की यूनिट लगा सका है। कांकेर ब्लॉक में ही पहाड़ी पर बसा है जीवलामारी जहां अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है।

अंतागढ़ में आज 14 गांवों में बिजली नहीं है। कोयलीबेड़ा में ऐसे 8 गांव हैं। वहीं पखांजूर के सितरम और राजामंडा ऐसे इलाके हैं जहां बिजली तो नहीं पहुंच पाई है लेकिन तार बिछाने, खंभे लगाने का काम शुरू हो चुका है।



ग्राउंड रिपोर्ट-3
नगरी (धमतरी). धमतरी के नगरी ब्लॉक के अंतिम छोर पर घने जंगल और पहाड़ी पर बसे 22 गांवों में अभी बिजली नहीं पहुंच सकी है। हालांकि यहां सोलर ऊर्जा से बिजली पहुंचाने की कोशिश जरूर की जा रही है। अभी जहां सोलर पैनल लग गए हैं उन घरों में एलईडी बल्ब तो जलते हैं, कई ग्रामीण पंखे-टीवी का उपयोग भी कर रहे मगर बिजली का अन्य उपयोग नहीं हो सकता। जैसे मोटर पंप नहीं चलने से अब भी गांव के लोग पास की नदी से पानी लाते हैं। अभी गर्मी में गांव के कुएं सूखने से समस्या और बढ़ गई है।

बड़पदर में नदी से लाते हैं लोग पानी

बिजली विभाग ने जिले के 4 ब्लॉक में 280 गांवों को आंशिक विद्युतीकृत का दर्जा दिया है। इसका फॉर्मूला ये है कि बिजली नहीं होने के बाद भी जिन गांवों में क्रेडा सौर ऊर्जा यूनिट लगा देता है या गांव से बिजली सप्लाई की मेन लाइन गुजरी है तो उन गांवों को आंशिक विद्युतीकृत मान लिया जाता है। हकीकत में यहां बिजली रहती नहीं है। ये जरूर है कि इन गांवों में अधिकतर ऐसे हैं जहां बिजली पहुंचाने का काम चल रहा या प्रोजेक्ट शुरू होने की गुंजाइश है। आंशिक विद्युतीकृत गांव अंतागढ़ में 139, कोयलीबेड़ा में 95, भानुप्रतापपुर में 28 और चारामा में 18 हैं। बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता एसटीआरए लोकेश कांगे के अनुसार इनमें से आधे गांवों में खंभे और ट्रांसफार्मर लग चुके हैं। बाकी में काम शुरू है। 30 जून तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।

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