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शबे बारात पर इबादत, गुनाहों की मांगी माफी, मरहूमों के लिए दुआ

इस्लामी कैलेंडर के 8वें माह में पड़ने वाले मरहूमों की ईद शब-ए-बारात मंगलवार को पूरे अकीदत के साथ मुस्लिम समाज द्वारा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:30 AM IST

इस्लामी कैलेंडर के 8वें माह में पड़ने वाले मरहूमों की ईद शब-ए-बारात मंगलवार को पूरे अकीदत के साथ मुस्लिम समाज द्वारा मनाया गया। इस मौके पर पूरी रात अल्लाह की इबादत कर गुजारी गई और गुनाहों की माफी मांगी गई। साथ ही लोगों ने अपने मरहूमों की कब्र पर जाकर उनकी बख्शीश की दुआ की।

1 मई को मुस्लिम समाज ने परंपरागत ढंग से शब-ए-बारात मनाई। इस अवसर पर जामा मस्जिद, हनफिया मस्जिद, मदीना मस्जिद और गरीब नवाज मस्जिद को आकर्षक ढंग से सजाया गया। सभी मजारों और कब्रिस्तान में भी रोशनी की गई। मगरीब की नमाज के बाद सभी मस्जिदों में 6 रकात नमाजें नफील पढ़ी गई। मुसलमानों ने अपने ईमान की सलामती के साथ रोजी-रोटी में बरकत, उम्र में बरकत और बुरी मौत तथा बलाओं से महफूज रखने की दुआ मांगी। जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद अनवर रजा ने बताया कि शब एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ रात है और बारात अरबी शब्द है, जिसका अर्थ निजात यानि छुटकारा पाना है। शब-ए-बारात की खास अहमियत इसलिए है कि यह हजारों रातों से अफजल है। इस रात की गई इबादत अल्लाहताला जरूर कबूल फरमाता है।

एक-दूसरे की इज्जत करें : मौलाना

तकरीरी प्रोग्राम में मदीना मस्जिद के पेश इमाम मौलाना तनवीर रजा ने कहा कि इस्लाम ऐसा समाज बनाना चाहता है, जिसमें मोहब्बत हो, इंसानियत और भाईचारगी के जज्बात हों, सुकून और अमन हो। एक-दूसरे की लोग इज्जत करें और जिंदगी के हर मोड़ पर खुशी व गम में बराबर के भागीदार हों। शब-ए-बारात के मौके पर ईशा की नमाज के बाद कब्रिस्तान में कुरानख्वानी हुई, जिसमें तमाम मरहुमिनों के लिए दुवाएं मगफिरत की गई। मदरसा गौसिया रजविया के कारी हाफिज मौलाना अल्ताफ रजा ने कहा कि जिंदगी की सच्चाई यही है, एक दिन हमें भी इस दुनिया से जुदा हो जाना है। सच्चे दिल से मांगी गई दुआ मरहुमिनों के निजात का जरिया बन जाती है।

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