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निर्विरोध सरपंच की छिनी कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े वोट

नगरी ब्लाक के ग्राम पंचायत बनबगौद की निर्विरोध निर्वाचित सरपंच मदालसा ध्रुव को अंतत: पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:30 AM IST

नगरी ब्लाक के ग्राम पंचायत बनबगौद की निर्विरोध निर्वाचित सरपंच मदालसा ध्रुव को अंतत: पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटा दिया। सभी 10 पंचों ने उनके खिलाफ मतदान किया और स्थिति यह रही कि रद्द हो जाने के कारण सरपंच को स्वयं उनका भी वोट नहीं मिल पाया।

उप सरपंच देवराम साहू, पंच दिनेश मानिकपुरी, सगरूराम सोरी, मुकेश ध्रुव, उषाबाई ध्रुव, दीपाबाई साहू, ज्ञान बाई ध्रुव आदि ने बीती 2 जुलाई को नगरी जाकर एसडीएम को सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन सौंपा था। इस आवेदन में उन्होंने सरपंच मदालसा ध्रुव पर पंचायत के निर्माण कार्यों में हमेशा मनमानी करने, पंचों की कोई भी बात न सुनने, ग्रामसभा और पंचायत की बैठकों में न आने, पंचायत के निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता बरतने समेत कई अन्य अारोप लगाए थे।

इसके बाद इनके आवेदन के सत्यापन के लिए जनपद पंचायत नगरी के वरिष्ठ करारोपण अधिकारी 15 दिन पहले ग्राम पंचायत में पहुंचे, इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसडीएम जितेन्द्र कुमार कुर्रे को सौंपी। इस पर एसडीएम ने नगरी तहसीलदार को पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर अविश्वास प्रस्ताव पर सम्मेलन की तारीख 13 जुलाई निर्धारित कर दी। तहसीलदार संजय ध्रुव ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत बनबगौद पहुंचकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की कार्रवाई शुरू कराई। इस दौरान सभी पंच सरपंच को हटाने की मांग पर अडिग रहे और सभी ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव के खिलाफ एकमात्र वोट सरपंच ने डाला, पर वह भी उन्हें नहीं मिल सका। त्रुटि की वजह से उनका वोट रद्द कर दिया गया।

गांव वालों ने सर्वसम्मति से चुना था, अंत तक हुआ समझौते का प्रयास

बीते पंचायत चुनाव के दौरान ग्राम बनबगौद में मदालसा ध्रुव को गांव वालों ने आम बैठक कर सर्वसम्मति से सरपंच प्रत्याशी चुना था। गांव के इस फैसले में सभी पंच भी शामिल थे। इसके बाद बाजे-गाजे के साथ सरपंच पद के लिए एकमात्र उनका ही नाम निर्देशन पत्र गांव वालों ने दाखिल कराया। कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं रहने के कारण मदालसा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया था। अब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए, तब कुछ ग्रामीणों ने अंतिम समय तक प्रयास किया कि सरपंच किसी तरह नाराज पंचों से समझौता कर लें। खुद पंचायत सचिव रोहित साहू व तहसीलदार ने भी कार्रवाई शुरू होने से पहले सरपंच से कहा कि कार्यकाल पूरा होने में साल-डेढ़ साल ही बचे हैं। ऐसे में वे पंचों के साथ समझौते के लिए राजी हो जाए, लेकिन सरपंच नहीं मानी। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई शुरू हुई और उन्हें पद से हाथ धोना पड़ा।

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