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कार्रवाई के डर से एंबुलेंस कर्मी नहीं गए हड़ताल पर, सांकेतिक विरोध किया

6 मांगों को पूरा कराने के लिए 84 संजीवनी और महतारी एंबुलेंस कर्मियों ने शुक्रवार को सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर जाने...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:30 AM IST
6 मांगों को पूरा कराने के लिए 84 संजीवनी और महतारी एंबुलेंस कर्मियों ने शुक्रवार को सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर जाने की योजना बनाई थी, लेकिन जीवीके कंपनी के अल्टीमेटम के बाद हड़ताल पर नहीं गए। शुक्रवार को रात में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों ने गौशाला मैदान में धरना देकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। अन्य कर्मचारियों ने सेवाएं दी।

छत्तीसगढ़ संजीवनी 108, 102 कर्मचारी कल्याण संघ के आह्वान पर सभी कर्मचारी 11 जुलाई से काली पट्टी लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने सामूहिक अवकाश लेकर धरना प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। जीवीके कंपनी के उच्चाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद उन्होंने रात में ही रणनीति बदल दी। ऐसे में रात में सेवा देने वाले कर्मचारियों ने गौशाला मैदान में पंडाल लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया, जबकि अन्य कर्मचारियों ने ड्यूटी की।

16 जुलाई से बेमुद्दत हड़ताल: संघ के जिलाध्यक्ष मोहनीश सिन्हा ने बताया कि 13 जुलाई को सामूहिक छुट्टी लेकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। इसे बदल दिया। रात में सेवा देने वाले कर्मचारियों ने सांकेतिक धरना देकर विरोध किया। अन्य सभी कर्मचारी ड्यूटी पर रहे। 16 जुलाई से बेमुद्दत हड़ताल करेंगे। उन्होंने बताया कि बीते 5 से 11 अप्रैल तक 6 दिनों तक रायपुर में बेमुद्दत हड़ताल की थी।

तब स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने समझौते के दौरान मांगों को 1 माह में पूरा करने का आश्वासन दिया था, पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। मांगों की ओर ध्यान खींचने के लिए 11 और 12 जुलाई को काली पट्टी लगाकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि जीवीके कंपनी कर्मचारियों का शोषण कर रही है। 8 घंटे से अधिक कार्य का ओवर टाइम नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों से 12 से 14 घंटे कार्य कराया जा रहा है।

धमतरी। गौशाला मैदान में जिले के 108, 102 कर्मचारियों ने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया।

मरीजों को समस्या नहीं होगी

सीएमएचओ डा. डीके तुर्रे ने बताया कि संजीवनी और महतारी एंबुलेंस कर्मियों ने 16 जुलाई से बेमुद्दत हड़ताल पर जाने की सूचना दी है। मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए जिला प्रशासन की मदद से विभिन्न विभागों के ड्रायवरों की सूची बना चुके हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। प्रदेश स्तर से जो भी आदेश मिलेगा, उस आधार पर आंदोलनकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

ये हैं प्रमुख मांगें

ठेका प्रथा मुक्त कर कर्मचारियों को शासन के अधीन कार्य कराएं। बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी को अप्रैल 2017 से लागू कर एरियर्स का भुगतान किया जाए। श्रम अधिनियम के तहत कार्य अवधि 8 घंटे निर्धारित हो और अतिरिक्त काम लेने पर भत्ता दिया जाए। कर्मचारियों की समस्याओं के उचित निराकरण के लिए शासन स्तर पर विशेष कमेटी गठित की जाए। वेतन निश्चित समय पर दिया जाए। श्रम अधिनियम के तहत परिवर्तनशील महंगाई भत्ते में समय पर वृद्धि की जाए।