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जिन सफाईकर्मियों की बदौलत लिया मिशन क्लीन सिटी का पुरस्कार, उन्हें ही हटा दिया

नगर निगम ने उन सफाई ठेका कर्मियों को काम से हटा दिया है, जिनके काम की बदौलत उसे मिशन क्लीन सिटी का पुरस्कार मिला।...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:35 AM IST
जिन सफाईकर्मियों की बदौलत लिया मिशन क्लीन सिटी का पुरस्कार, उन्हें ही हटा दिया
नगर निगम ने उन सफाई ठेका कर्मियों को काम से हटा दिया है, जिनके काम की बदौलत उसे मिशन क्लीन सिटी का पुरस्कार मिला। खास बात यह है कि बुधवार को रायपुर में महापौर अर्चना चौबे और कमिश्नर अशोक द्विवेदी को नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल ने यह पुरस्कार प्रदान किया और इधर निगम अफसरों ने ठेका सफाई कर्मियों को काम करने से रोक दिया। शासन ने ठेका सफाई कर्मियों को हटाने या कमिश्नर, स्वास्थ्य अधिकारी और बाबू के वेतन से उनका भुगतान करने का आदेश दिया है। अचानक काम से हटाए जाने से बौखलाए ठेका सफाई कर्मियों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन भी किया।

बता दें कि 2015 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत धमतरी नगर निगम ने 50 ठेका सफाई कर्मियों को काम पर रखा था। इसके लिए हर साल शासन से करीब 41 लाख रुपए का फंड मिलता रहा। यह 2018 तक के लिए ही था। स्वच्छता सर्वेक्षण के नोडल अधिकारी हरिकिशन पावरिया ने बताया कि बीते 30 अप्रैल को राज्य सरकार से निगम को पत्र मिला, जिसमें ठेके पर रखे गए 50 कर्मियों को काम से हटाने या फिर उनका भुगतान कमिश्नर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और बाबू को खुद के वेतन से देने कहा गया, इसलिए कमिश्नर अशोक द्विवेदी ने ठेका कर्मियों को काम से हटाने का आदेश जारी किया है।

निगम की मनमानी, करेंगे उग्र आंदोलन : काम से निकाले गए सफाईकर्मी राजपाल रात्रे, धरम सोनी, विकास वाल्मिकी, अजय वाल्मिकी, आशीष नायक, राज सोनी, रामू चौहान, शीतल ने कहा कि नगर निगम के अफसरों ने बुधवार को काम करने से रोक दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि अब ठेका सफाई कर्मियों से काम नहीं लिया जाएगा। यदि निगम को ठेका कर्मियों से काम नहीं लेना था, तो 3 साल तक क्यों काम कराया गया। यदि काम पर नहीं रखते हैं, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

विरोध में किया प्रदर्शन, प्लेसमेंट कर्मियों ने आंदोलन को दिया समर्थन

बुधवार से 50 ठेका सफाई कर्मियों को काम से निकालने से नाराज होकर पुरानी अग्निशमन यंत्र के बाहर निगम के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया।

वर्कआर्डर खत्म हो गया, इसलिए काम खत्म

ठेका सफाई कर्मियों के प्रभारी गौरव ने बताया कि निगम से तीन साल के लिए वर्कआर्डर मिला था, इसलिए 50 कर्मियों को काम पर रखा गया था। वर्कआ़र्डर खत्म हो चुका है और निगम ने ठेका सफाई कर्मियों का आगे भुगतान करने से मना कर दिया है।

जिम्मेदारों ने नहीं उठाया फोन

इस मामले में स्थिति जानने महापौर अर्चना चौबे, कमिश्नर अशोक द्विवेदी और स्वास्थ्य अधिकारी सतीशचंद त्रिपाठी को बार-बार फोन किया गया, लेकिन किसी ने भी काल रिसीव नहीं किया। कमिश्नर ने एसएमएस कर रायपुर की बैठक में होने की जानकारी दी।

निगम प्रशासन ने शासन का आदेश आते ही आनन-फानन में ठेका कर्मियों को हटा तो दिया, लेकिन शहर की साफ सफाई कैसे होगी, इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। बचे हुए सफाई कर्मियों से पूरा काम कैसे लिया जाएगा, इसकी कार्य योजना भी नहीं बनाई। यही वजह है कि बुधवार को शहर में साफ सफाई नहीं हो पाई।

नहीं की कोई वैकल्पिक व्यवस्था

फैक्ट फाइल






75 प्लेसमेंट कर्मियों ने भी विरोध में नहीं किया काम

ठेका सफाई कर्मियों को हटाने के विरोध और उन्हें काम पर वापस लेेने की मांग को लेकर निगम के प्लेसमेंट सफाई कर्मियों ने बुधवार को काम बंद रखा। उनकी संख्या 75 के करीब है।

नहीं हो पाई सफाई

आधे से अधिक सफाई कर्मियों के काम नहीं करने के कारण बुधवार को शहर की आधी अधूरी सफाई हुई। कचरा नहीं उठा, नालियों की सफाई नहीं हुई। शहर की सफाई व्यवस्था 209 सफाई कर्मियों और 6 स्व सहायता समूहों की महिलाओं के बूते संचालित होती है। इनमें केवल 84 नियमित कर्मचारी हैं। बुधवार को सिर्फ नियमित कर्मचारियों ने ही साफ सफाई का थोड़ा बहुत काम किया। स्व सहायता समूह की महिलाएं घर-घर से केवल कचरा एकत्रित करने का काम करती हैं। नालियों को साफ करने औऱ एकत्रित कचरे को उठाने का काम ठेका सफाई कर्मी ही करते थे।

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