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नकल प्रकरण: छात्रा फिर पहुंची कलेक्टोरेट बोली- प्रताड़ित हूं, निष्पक्ष जांच कराई जाए

धमतरी | गर्ल्स कालेज में हुए नकल प्रकरण की जांच 23 दिन बाद भी पूरी नहीं होने से नाराज शिकायतकर्ता सोनम साहू ने पुन:...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:45 AM IST
धमतरी | गर्ल्स कालेज में हुए नकल प्रकरण की जांच 23 दिन बाद भी पूरी नहीं होने से नाराज शिकायतकर्ता सोनम साहू ने पुन: कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। छात्रा ने अपर कलेक्टर लीना कोसम को ज्ञापन सौंपकर कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने प्रशासन के समक्ष मानसिक रुप से प्रताड़ित होने का हवाला भी दिया। इधर इस मामले को लेकर जनता कांग्रेस भी जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है।

शासकीय नारायणराव कन्या महाविद्यालय में वार्षिक परीक्षा के दौरान 27 मार्च को बीएससी द्वितीय वर्ष हिंदी भाषा की परीक्षा के दौरान केन्द्राध्यक्ष जेएल पाटले और सहायक केन्द्राध्यक्ष आेपी चंदे पर एक छात्रा को बुलाकर नकल कराने का आरोप छात्रा सोनम साहू द्वारा लगाया गया था। कॉलेज की इस हरकत से छात्राओं में काफी नाराजगी है। इस मामले को करीब 23 दिन पूरे हो गए, लेकिन अब तक मामले की गंभीरता से कालेज प्रबंधन और प्रशाासन ने जांच नहीं कराई है।

मामले की जांच गंभीरता से हो रही

अपर कलेक्टर लीना कोसम ने कहा कि कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना द्वारा गठित जांच टीम गंभीरता से मामले की जांच कर रही है। जल्द ही जांच टीम कलेक्टर को रिपोर्ट भी सौपे देगी। दोषी पर कार्रवाई होगी।

आरोप बेबुनियाद :प्राचार्य

गर्ल्स कालेज के प्राचार्य डॉ. एसके चटर्जी ने कहा कि मेरे द्वारा गठित टीम ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसे आगे की कार्रवाई के लिए पं. रविशंकर यूनिवर्सिटी को भेजा जा चुका है। छात्रा ने केन्द्राध्यक्ष और सहायक केन्द्राध्यक्ष को बचाने का जो आरोप लगाया है, वह बेबुनियाद है। नकल प्रकरण की कार्रवाई निष्पक्ष हो रही है।

जनता कांग्रेस इसी मामले को लेकर करेगी धरना

दोषियों को बचाने की कोशिश : सोनम

छात्रा सोनम साहू ने कहा कि प्राचार्य डॉ. एसके चटर्जी नकल प्रकरण की तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कर सकते थे, लेकिन वे केन्द्राध्यक्ष और सहायक केन्द्राध्यक्ष को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। उसके द्वारा गठित जांच टीम ने भी कछुआ चाल से मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपी। प्राचार्य को पता है कि केन्द्राध्यक्ष और सहायक केन्द्राध्यक्ष दोषी हैं, इसलिए वे खुद इस मामले में हाथ न डालकर रिपोर्ट को उच्च शिक्षा विभाग और पं. रविशंकर यूनिवर्सिटी को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि कछुआ चाल से चल रही जांच प्रक्रिया से वे मानसिक रुप से प्रताड़ित हैं।