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उदंती-सीतानदी रिजर्व से मिट गया टाइगर का नामोनिशान! एक भी कैमरे में नहीं दिखे / उदंती-सीतानदी रिजर्व से मिट गया टाइगर का नामोनिशान! एक भी कैमरे में नहीं दिखे

Dhamtari News - वन्य जीव खासकर बाघ प्रेमियों के लिए बुरी खबर है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले साल तक देखे गए बाघ के जोड़े का...

Bhaskar News Network

Apr 23, 2018, 03:50 AM IST
उदंती-सीतानदी रिजर्व से मिट गया टाइगर का नामोनिशान! एक भी कैमरे में नहीं दिखे
वन्य जीव खासकर बाघ प्रेमियों के लिए बुरी खबर है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले साल तक देखे गए बाघ के जोड़े का शिकार होने का अंदेशा जताया जा रहा है। फरवरी में मैनपुर में तस्करों से बाघ की एक खाल मिली थी, माना जा रहा कि ये इन्हीं जोड़ों में से एक की थी। अगर ऐसा हुआ है तो फिलहाल इस रिजर्व से बाघाें की मौजूदगी शून्य हो गई है। गणना के लिए इस साल लगाए गए 200 कैमरों में से एक में भी यहां बाघ की मौजूदगी के सबूत नहीं मिले हैं।

राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देश पर देशभर में बाघों की गणना इस साल फरवरी महीने में शुरू हुई, जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है। इसके तहत जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व में भी वन विभाग ने बाघों की खोज खबर ली। इस वर्ष इनकी स्थिति जानने इनके आवागमन वाले संभावित स्थानों पर विभाग ने 200 कैमरे लगाए, साथ ही अन्य माध्यमों (पदचिह्न, मल, शिकार अवशेष आदि) के जरिए साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई। अब यहां से मिले सारे डाटा को कंपाइल करने का काम चल रहा है, जिसे उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा। वहां इसका परीक्षण करने के बाद प्रदेशभर से एकत्रित डाटा को अंतिम विश्लेषण के लिए देहरादून भेजा जाएगा।

एसडीओ बोले-संभव है कि हो गया शिकार : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के एसडीओ नगरी आरके रायस्त का कहना है कि पूर्व में यहां पाए गए बाघ के जोड़े का शिकार हो चुका है।

इस वर्ष गणना के लिए 200 कैमरे लगाए गए थे, पर किसी भी कैमरे में बाघ के ट्रैप होने की जानकारी नहीं है। एकत्रित डाटा को कंपाइल कर मुख्यालय भेजने की तैयारी की जा रही है।

ओडिशा से आकर ठिकाना बनाने वाले जोड़े का भी शिकार

उदंती और सीतानदी अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाए जाने से पहले सीतानदी अभयारण्य में 2005 तक 4 से 5 बाघ मौजूद थे। इसकी पुष्टि वन विभाग की वन्य प्राणी गणना में भी होती रही है। बाद में एक-एक कर सारे बाघों का शिकार हो गया। इसके बाद 2-3 साल पहले ही ओडिशा के सीमावर्ती जंगल से बाघ के एक जोड़े ने यहां आकर अपना ठिकाना बनाया था, पर यह जोड़ा भी शिकारियों की भेंट चढ़ गया। कुल्हाड़ीघाट रेंज के सोनाबेड़ा जंगल में पिछली गणना में जो बाघ मिले थे बीते वर्ष इनका शिकार हो गया। गरियाबंद पुलिस ने शेर की खाल बेचने की फिराक में घूम रहे ग्राम कुकरार निवासी मेघनाथ नेताम और जरंडी निवासी कंवल सिंह नेताम को बीते 14 फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में खाल के लिए सोनाबेड़ा जंगल में शेर का शिकार करने की बात कुबूल की थी।

इस वर्ष नहीं मिले मौजूदगी के सबूत

बाघों की गणना के काम से जुड़े एनटीसीए के लोगों का कहना है कि उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व में इस वर्ष एक भी बाघ कैमरे में ट्रैप नहीं हुआ है और न ही अन्य माध्यमों से इसकी मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तक देखे गए बाघ के जोड़े का शिकार हो चुका है और आरोपियों को गरियाबंद पुलिस जेल भेज चुकी है।

फैक्ट फाइल








रिजर्व में तमाम अनुकूलताएं पर नहीं कर पा रहे सुरक्षा

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में तमाम अनुकूल ताओं के कारण इसे बाघों के लिए मध्य भारत का सर्वोत्तम रहवास क्षेत्र माना जाता है, लेकिन दुर्भाग्य से विभागीय अमला यहां रहने वाले बाघों को सुरक्षा देने में नाकाम रहा है। आलम यह है कि 20 फरवरी 2009 को टाइगर रिजर्व का गठन हुआ, लेकिन विभाग आज तक यहां रहने वाले लोगों का रिजर्व से बाहर व्यवस्थापन नहीं करा पाया है। इसके चलते रिजर्व क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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