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बेसहारा बुजुर्ग की अर्थी को महिलाओं ने दिया कंधा

भुरवाटोला वार्ड नं. 20 अटल आवास निवासी 70 वर्षीय हरिराम धोबी की मंगलवार को मौत हो गई। मौत के बाद मृतक के शरीर को कंधा...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:35 AM IST
बेसहारा बुजुर्ग की अर्थी को महिलाओं ने दिया कंधा
भुरवाटोला वार्ड नं. 20 अटल आवास निवासी 70 वर्षीय हरिराम धोबी की मंगलवार को मौत हो गई। मौत के बाद मृतक के शरीर को कंधा देने कोई भी सामने नहीं आया। लेकिन भुरवाटोला की महिलाओं ने साबित कर दिया कि आज भी मानवता जिंदा है। भीख मांगकर जीवन-यापन कर रहे हरिराम की तबीयत मंगलवार को सुबह 6 बजे अचानक बिगड़ गई। उसकी प|ी बबिता धोबी ने वार्ड के युवाओं को मदद मांगी।

108 संजीवनी एंबुलेंस बुलाकर हरिराम को हॉस्पिटल लाया गया। लेकिन सुबह 9 बजे उपचार के दौरान हरिराम ने दम तोड़ दिया। उसकी प|ी जैसे-तैसे ऑटो में मृतक के बॉडी को घर तक लेकर पहुंची। लेकिन बॉडी को उतारने वाला कोई भी सामने नहीं आया। वार्ड की प्रगति महिला संगठन की सदस्य पहुंची और ऑटो से बॉडी को उतारा। हरिराम का एक बेटा भी है, लेकिन वह सालों से बाहर रहता है। महिलाओं ने ही मौके पर चंदा किया और अंतिम संस्कार किया।

भुरवाटोला की महिलाओं ने साबित कर दिया कि आज भी मानवता जिंदा है, अंतिम संस्कार करने के लिए आगे आईं

डोंगरगढ़. वार्ड 20 से मृतक का शव लेकर मुक्तिधाम पहुंची महिलाएं।

किसी ने मदद नहीं की तो खुद होकर आगे आईं

अंतिम संस्कार करने कोई भी पुरुष या युवक सामने नहीं आया। अर्थी उठाने के समय दो लड़के मदद करने पहुंचे। लेकिन महिलाओं ने कह दिया कि शुरू में किसी ने मदद नहीं की। अब उन्होंंने बीड़ा उठाया है तो मुक्तिधाम तक वे ही अर्थी को कंधे पर लेकर जाएगी। भुरवाटोला से चौथना मुक्तिधाम तक महिलाएं गई। मजदूर को मजदूरी देकर लाश को दफनाने के लिए गड्‌ढा खुदवाया और रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार प्रगति महिला संगठन की महिलाओं ने किया। बेसहारा बुजुर्ग की मदद कर महिलाएं मिसाल बनी और मानवता कायम की।

बेटे से की बात, सहमति के बाद ही लिया निर्णय

ऑटो से बॉडी उतारने के बाद वार्ड की महिलाओं ने प|ी बबिता धोबी से चर्चा की। बबिता ने कहा कि मेरा एक बेटा है लेकिन वह सालों से उनके साथ नहीं रहता। वह आएगा भी की नहीं यह नहीं पता। मोबाइल नंबर लेकर महिलाओं ने हरिराम के बेटे से चर्चा की। बेटा ने कहा कि उसे आने में रात हो जाएगी और लाश को रातभर रखने से परेशानी होगी। वे अपने अनुसार अंतिम संस्कार कर दें। बेटे से सहमति मिलने के बाद महिलाओं ने चंदा किया और अंतिम संस्कार किया। क्षेत्र में महिलाओं का यह नेक कार्य चर्चा का विषय रहा।

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