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8 छात्रों को 3 दिन से उल्टी-दस्त अधीक्षक को जानकारी ही नहीं

कसडोल| एसडीएम के सामने स्थित प्री मैट्रिक बालक आदिवासी छात्रावास के 8 छात्र तीन दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 02:35 AM IST

8 छात्रों को 3 दिन से उल्टी-दस्त अधीक्षक को जानकारी ही नहीं
कसडोल| एसडीएम के सामने स्थित प्री मैट्रिक बालक आदिवासी छात्रावास के 8 छात्र तीन दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। इन बच्चों की जिम्मेदारी संहाल रहे छात्रावास अधीक्षक को इसकी खबर भी नहीं है। सोमवार को छात्रों को छात्रावास में पदस्थ रसोइए ने अस्पताल ले जाकर उपचार कराया। इस संबंध में एसडीएम प्रकाश सिंह राजपूत ने कहा कि अधीक्षक के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उसकी लापरवाही के लिए उसे नोटिस जारी किया जा रहा है।

ब्लॉक में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं में नियम कानून को दरकिनार कर सभी छात्रावासों के अधीक्षक भर्राशाही में उतर आए हैं। इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया है। यहां एसडीएम कार्यालय के सामने स्थित प्री मेट्रिक बालक आदिवासी छात्रावास में रहकर पढ़े रहे 8वीं के कैलाश पैकरा, 10वीं के बालमुकुंद ठाकुर, युवराज ध्रुव, उसत कुमार पैकरा, 6वीं के धनंजय पैकरा, 9वीं के नीलकंठ खड़िया, दीपक ठाकुर और बीरेन्द्र बरिहा दो-तीन दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं पर छात्रावास अधीक्षक बीआर टंडन इस सबसे बेखबर हैं। बच्चों के बीमार पड़ने का कारण तब पता चला, जब छात्रावास में रहने वाले 8 बच्चे एक साथ उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर प्राचार्य केआर कैवर्त्य के पास छुट्टी के लिए गए। प्राचार्य ने तत्काल स्टॉफ एवं छात्रावास अधीक्षक के साथ बच्चों को इलाज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया, जहां डॉक्टर ने उपचार कर दवाइयां दी।

कसडोल. अस्पताल में बीमार बच्चों से जानकारी लेते हुए एसडीएम

तीन-चार दिन में एक बार ही सुबह आते हैं अधीक्षक

घटना की सूचना मिलते ही तत्काल भास्कर प्रतिनिधि छात्रावास गए तो वहां पर सभी बीमार बच्चे उपस्थित मिले, लेकिन छात्रावास अधीक्षक कहीं नजर नहीं आए। बच्चों ने बताया कि अधीक्षक 3 या 4 दिनों में एक बार सुबह के समय आते हैं और कुछ समय बाद चले जाते हैं।

चाय नहीं मिलती है बच्चों को

बच्चों ने खान-पान के संबंध में भी बताया कि सुबह 8 बजे खाना दिया जाता है। शाम 4 बजे मुर्रा का नाश्ता दिया जाता है और शाम 7 बजे फिर खाना दिया जाता है। बच्चों ने स्पष्ट बताया कि उन्हें चाय बिल्कुल नहीं मिलती है। छात्रावास अधीक्षक की भर्राशाही से बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।

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